By पं. अभिषेक शर्मा
जानिए कैसे कर्मेश का नवम में उच्च और भाग्येश का दशम में होना अखंड धन, निष्कलंक कीर्ति और नेतृत्व देता है

भारतीय ज्योतिष में जब नवम भाव अर्थात भाग्य स्थान और दशम भाव अर्थात कर्म स्थान के बीच कोई सकारात्मक संबंध बनता है, तो उसे धर्माधर्माधिपति योग या सामान्य राजयोग कहा जाता है। लेकिन जब यह संबंध अपने सबसे शुद्ध, बलवान और आदर्श रूप में प्रकट होता है तब जन्म लेता है श्रीनाथ योग।
श्रीनाथ भगवान विष्णु अर्थात लक्ष्मीपति का एक अत्यंत पवित्र नाम है। यह योग कुंगली का वह दुर्लभ क्षण है जहाँ व्यक्ति का पुरुषार्थ अर्थात Action और उसकी दैवीय कृपा अर्थात Destiny एक दूसरे में पूरी तरह समाहित हो जाते हैं। जिस जातक की कुंडली में यह महायोग विद्यमान होता है, उसका जीवन ऐश्वर्य, धार्मिक कीर्ति और सफलता का एक अनुपम उदाहरण बनता है। श्रीनाथ योग व्यक्ति को अखंड धन और निष्कलंक कीर्ति प्रदान करता है।
इस योग का मुख्य आधार कुंडली के दो सबसे शक्तिशाली घरों अर्थात नवम और दशम के स्वामियों के बीच होने वाला परिवर्तन योग अर्थात Exchange Yoga है, जिसमें एक विशेष शर्त जुड़ी होती है।
सरल शब्दों में कहें तो, कर्म का मालिक भाग्य के घर में अपनी सर्वोच्च स्थिति अर्थात उच्च में हो और भाग्य का मालिक कर्म के घर को संभाल रहा हो। यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा का सबसे शक्तिशाली आदान प्रदान है।
ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार, नवम भाव को विष्णु स्थान अर्थात त्रिकोण और दशम भाव को लक्ष्मी स्थान अर्थात केंद्र का सबसे मजबूत रूप माना जाता है।
| योग के मुख्य घटक | ज्योतिषीय महत्व | राजयोग में भूमिका |
|---|---|---|
| कर्मेश का नवम में उच्च का होना | दशम भाव कर्म स्थान है और नवम भाव विष्णु स्थान या त्रिकोण है | व्यक्ति के सभी कर्म धर्म और नैतिकता से प्रेरित होते हैं और कर्म की शक्ति सौ गुना बढ़ जाती है |
| भाग्येश का दशम में आना | नवम भाव भाग्य स्थान है और दशम भाव लक्ष्मी स्थान या केंद्र है | व्यक्ति को अपने करियर में भाग्य का ऐसा पहिया मिलता है जो कभी थमता नहीं |
| उच्च के ग्रह का महत्व | दशमेश का नवम भाव में उच्च का होना अनिवार्य है | यह योग केवल कुछ विशिष्ट लग्नों में ही पूरी शुद्धता के साथ घटित हो सकता है |
जब कर्मेश नवम में जाता है, तो व्यक्ति के सभी कर्म धर्म और नैतिकता से प्रेरित होते हैं। जब भाग्येश दशम में आता है, तो व्यक्ति को अपने करियर में भाग्य का ऐसा पहिया मिलता है जो कभी थमता नहीं।
श्रीनाथ योग से युक्त जातक का जीवन साधारण नहीं होता। इसके व्यावहारिक फल निम्नलिखित हैं।
कर्मेश का उच्च होना और नवम में स्थित होना कुछ विशिष्ट लग्नों में ही पूरी शुद्धता के साथ घटित हो सकता है।
कुंडली का गहराई से विश्लेषण करते समय श्रीनाथ योग की वास्तविक तीव्रता को मापने के लिए इन तीन कसौटियों का परीक्षण अनिवार्य है।
किसी भी राजयोग का फल जातक को तभी पूरी तरह मिलता है जब कुंडली का लग्नेश अर्थात 1st Lord स्वयं मजबूत स्थिति में हो। यदि राजा अर्थात जातक का आत्मबल मजबूत होगा, तभी वह इस विशाल श्रीनाथ साम्राज्य के सुख को संभाल पाएगा।
नवम और दशम भाव में बैठे इन योगकारक ग्रहों पर राहु, केतु या किसी नीच के ग्रह की प्रतिकूल दृष्टि या युति नहीं होनी चाहिए। यदि ये ग्रह पीड़ित होंगे, तो सफलता तो मिलेगी लेकिन कड़े संघर्ष और मानसिक तनाव के बाद।
इस योग का वास्तविक और क्रांतिकारी उत्कर्ष जातक को तब अनुभव होता है जब उसकी युवावस्था या करियर के सबसे महत्वपूर्ण वर्षों में नवमेश या दशमेश की महादशा या अंतर्दशा क्रियाशील होती है। यह समय व्यक्ति को फर्श से उठाकर समाज के सर्वोच्च शिखर पर स्थापित कर देता है। दशा चक्र का स्वर्णिम समय श्रीनाथ योग को पूर्ण रूप में प्रकट करता है।
श्रीनाथ योग यह सिखाता है कि सच्ची सफलता केवल कर्म या केवल भाग्य से नहीं बल्कि दोनों के सर्वोच्च मिलन से मिलती है। जब कर्मेश नवम में उच्च का हो और भाग्येश दशम में हो, तो व्यक्ति को अखंड धन, निष्कलंक कीर्ति, परम धार्मिक स्वभाव और सम्मोहक वक्तृत्व मिलता है।
एक सशक्त श्रीनाथ योग व्यक्ति को अखंड धन और राजसी ऐश्वर्य, निष्कलंक कीर्ति और नेतृत्व, परम धार्मिक और न्यायप्रिय स्वभाव और सम्मोहक वक्तृत्व प्रदान करता है। परंतु इसका पूर्ण फल तभी मिलता है जब लग्नेश शक्तिशाली हो, क्रूर ग्रहों का प्रभाव न हो, अंश बल मजबूत हो और दशा चक्र का स्वर्णिम समय युवावस्था या करियर के महत्वपूर्ण वर्षों में आए।
श्रीनाथ योग क्या है श्रीनाथ योग तब बनता है जब दशमेश अपनी उच्च राशि में होकर नवम भाव में हो और भाग्येश दशम भाव में विराजमान हो।
श्रीनाथ योग का सबसे बड़ा लाभ क्या है यह योग व्यक्ति को अखंड धन, राजसी ऐश्वर्य, निष्कलंक कीर्ति, नेतृत्व, परम धार्मिक स्वभाव और सम्मोहक वक्तृत्व प्रदान करता है।
क्या लग्नेश का शक्तिशाली होना श्रीनाथ योग के लिए अनिवार्य है हाँ, किसी भी राजयोग का फल पूरी तरह मिलने के लिए लग्नेश का मजबूत स्थिति में होना अनिवार्य है।
कर्मेश और भाग्येश के परिवर्तन से फल कैसे अलग होते हैं कर्मेश नवम में उच्च का होने पर धर्म और नैतिकता से प्रेरित कर्म होते हैं, भाग्येश दशम में होने पर करियर में भाग्य का पहिया चलता है जो कभी थमता नहीं।
श्रीनाथ योग का प्रभाव जीवन में सबसे अधिक कब दिखाई देता है जब युवावस्था या करियर के सबसे महत्वपूर्ण वर्षों में नवमेश या दशमेश की महादशा या अंतर्दशा क्रियाशील होती है तब श्रीनाथ योग का प्रभाव सर्वाधिक होता है।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ
500+
USERS
100K+
TRUSTED ASTROLOGERS
20K+
DOWNLOADS