By पं. संजीव शर्मा
जानिए कैसे उपचय भावों में शुभ ग्रह self made समृद्धि और व्यापारिक साम्राज्य देते हैं

भारतीय ज्योतिष में कई ऐसे धन योग हैं जो विरासत पैतृक संपत्ति या भाग्य के भरोसे मिलने वाले धन को दर्शाते हैं। लेकिन वासुमति योग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से अपने दम पर खड़े होने वाले समृद्ध जीवन का योग है।
वासुमति का शाब्दिक अर्थ होता है समृद्धि प्रचुरता या वह जो धन से युक्त हो। जैसे पृथ्वी अपने भीतर धैर्य भी रखती है और उर्वरता भी। जब कुंडली के वृद्धि भावों में शुभ ग्रहों की ऊर्जा मिलती है तो व्यक्ति जीवन में शून्य से आरंभ करके व्यापारिक साम्राज्य खड़ा करता है और आधुनिक संदर्भ में अत्यंत समृद्ध श्रेणी तक पहुँच सकता है।
इस योग का मुख्य आधार कुंडली के उपचय भाव हैं। उपचय का अर्थ होता है लगातार बढ़ने वाला या क्रमिक विकास।
| मूल सूत्र | विवरण |
|---|---|
| लग्न या चंद्रमा से योग | यदि लग्न या चंद्रमा से बृहस्पति शुक्र बुध और पक्ष बल से बली चंद्रमा उपचय भावों में हों |
| उपचय भाव | तीसरा छठा दसवां और ग्यारहवां भाव |
| योग की क्रिया | चारों घरों में ग्रहों का फैला होना अनिवार्य नहीं है। यदि ये शुभ ग्रह इन भावों को सुरक्षित कर लें तो योग सक्रिय हो जाता है |
इस योग में यह आवश्यक नहीं कि सभी चारों घरों में ग्रह मौजूद ही हों। यदि ये शुभ ग्रह उपचय भावों को पूरी तरह सुरक्षित कर लेते हैं तो वासुमति योग प्रभाव देने लगता है। यही इसकी सबसे सूक्ष्म और सुंदर विशेषता है।
सामान्य ज्योतिष में माना जाता है कि उपचय भावों में राहु शनि या मंगल जैसे ग्रह अधिक अच्छा परिणाम देते हैं क्योंकि वे संघर्ष की शक्ति देते हैं। लेकिन वासुमति योग इस धारणा को संतुलित करता है। यहाँ शुभ ग्रह बैठकर जीवन को एक अलग दिशा देते हैं।
| उपचय भाव | भाव का मूल स्वरूप | शुभ ग्रहों का प्रभाव | व्यावहारिक परिणाम |
|---|---|---|---|
| तीसरा भाव | पराक्रम साहस और आत्म प्रयास | रणनीतिक सूझबूझ और सही दिशा में मेहनत | व्यक्ति अपने दम पर नया स्टार्टअप या व्यापार शुरू करता है |
| छठा भाव | शत्रु प्रतिस्पर्धा और ऋण | बुद्धिमत्ता और कूटनीति से विरोधियों पर विजय | प्रतिस्पर्धा में जीत और लिए गए कर्ज का सही सदुपयोग |
| दसवां भाव | कर्म स्थान करियर और समाज में कद | बेदाग सामाजिक छवि और उच्च प्रबंधकीय क्षमता | करियर में लगातार उन्नति और शीर्ष नेतृत्व की प्राप्ति |
| ग्यारहवां भाव | लाभ स्थान आय के स्रोत और संचित इच्छाएँ | अनेक कानूनी और सम्मानजनक मार्गों से धन आगमन | आय में निरंतर बढ़ोतरी और बड़े आर्थिक लक्ष्यों की पूर्ति |
तीसरा भाव पराक्रम और साहस का स्थान है। जब यहाँ शुभ ग्रह बैठते हैं तो व्यक्ति अंधे साहस पर नहीं चलता। उसे सही दिशा में परिश्रम करने की बुद्धि मिलती है।
ऐसा व्यक्ति अपने दम पर नया व्यापार आरंभ करता है। कई बार वही आरंभ आगे चलकर बड़े उद्यम का रूप ले लेता है। वासुमति योग का यह पक्ष self made सफलता की नींव को बहुत मजबूत करता है।
छठा भाव शत्रु ऋण और प्रतिस्पर्धा का है। सामान्य स्थिति में यह घर संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। लेकिन जब यहाँ शुभ ग्रह हों तो व्यक्ति उसी संघर्ष को साधना बना देता है।
वह अपने व्यापारिक विरोधियों को बिना विवाद के केवल बुद्धि और नीति से पछाड़ देता है। कर्ज भी उसके लिए बोझ नहीं रह जाता। वह उसे साधन की तरह उपयोग करता है और आगे बढ़ता है।
दसवां भाव कर्म स्थान है। यह कुंडली का सबसे शक्तिशाली केंद्र है। यहाँ शुभ ग्रह व्यक्ति को समाज में बेदाग छवि और उच्च प्रबंधकीय क्षमता प्रदान करते हैं।
ऐसा जातक करियर में निरंतर आगे बढ़ता है। उसे केवल पद नहीं मिलता बल्कि नेतृत्व का भार भी सहजता से उठाने की क्षमता मिलती है। वासुमति योग का यह भाग व्यक्ति को स्थायित्व और सम्मान दोनों देता है।
ग्यारहवां भाव लाभ स्थान है। यह आय के स्रोतों और इच्छापूर्ति से जुड़ा हुआ है। जब यहाँ शुभ ग्रह बैठते हैं तो धन के आने के रास्ते बढ़ते जाते हैं।
व्यक्ति के पास एक से अधिक कानूनी और सम्मानजनक माध्यमों से आय के मार्ग खुलते हैं। वह केवल कमाता नहीं है बल्कि अपनी बड़ी आर्थिक योजनाओं को भी पूरा करता है। इस भाव में वासुमति योग सबसे स्पष्ट रूप में धन वृद्धि दिखाता है।
कुंडली में वासुमति योग का आकलन करते समय कुछ महत्वपूर्ण ज्योतिषीय कसौटियों को देखना आवश्यक है।
यदि यह योग केवल लग्न से बन रहा हो तो यह उत्तम है। यदि केवल चंद्रमा से बन रहा हो तो भी जातक को धनी बनाता है। लेकिन यदि यह लग्न और चंद्रमा दोनों से एक साथ उपचय भावों में घटित हो रहा हो तो व्यक्ति वैश्विक स्तर का उद्योगपति या अत्यधिक प्रभावशाली समृद्ध व्यक्ति बन सकता है।
यह स्थिति वासुमति योग की ताकत को कई गुना बढ़ा देती है। लग्न और चंद्र दोनों का समर्थन इसे विशेष रूप से सशक्त बनाता है।
इस योग में चंद्रमा को शुभ ग्रह तभी माना जाएगा जब वह शुक्ल पक्ष की पंचमी से लेकर कृष्ण पक्ष की पंचमी के बीच का हो। इसमें पूर्ण प्रकाश बना रहता है।
यदि चंद्रमा अमावस्या के आस पास का है तो वह क्रूर ग्रह की श्रेणी में आ जाता है और योग की शुद्धता कम हो जाती है। इसलिए चंद्र बल को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
उपचय भावों में बैठे शुभ ग्रहों पर राहु केतु या किसी अन्य पापी ग्रह की दृष्टि या युति नहीं होनी चाहिए। जितने शुद्ध और मजबूत अंशों में ये ग्रह होंगे व्यक्ति उतनी ही तेजी से आर्थिक ऊंचाइयों को छुएगा।
शुद्ध ग्रहों का प्रभाव इस योग को स्थिर और फलदायी बनाता है। अशुद्धता आने पर इसके परिणाम कमजोर हो सकते हैं।
वासुमति योग एक धीमी लेकिन बहुत मजबूत नींव वाला योग है। यह व्यक्ति को अचानक लॉटरी से अमीर नहीं बनाता।
जैसे जैसे आयु बढ़ती है और विशेषकर गुरु या शुक्र की महादशा या अंतर्दशा आती है वैसे वैसे आर्थिक ग्राफ तेजी से ऊपर की ओर बढ़ता है। समय इस योग के फल को गहराई और स्थायित्व देता है।
वासुमति योग यह सिखाता है कि स्थायी समृद्धि उन लोगों को मिलती है जो समय के साथ बढ़ते हैं। यह योग आत्मनिर्भरता संयम रणनीति और सही समय पर किया गया परिश्रम सिखाता है।
एक सशक्त वासुमति योग व्यक्ति को स्वयं निर्मित समृद्धि व्यापारिक साम्राज्य और लंबी अवधि की आर्थिक मजबूती प्रदान कर सकता है। परंतु इसका पूर्ण फल तभी प्रकट होता है जब शुभ ग्रह उपचय भावों में शुद्ध हों चंद्रमा बलवान हो और दशा चक्र अनुकूल समय पर सक्रिय हो।
वासुमति योग क्या है जब लग्न या चंद्रमा से शुभ ग्रह उपचय भावों में स्थित होकर धन वृद्धि का योग बनाते हैं तो उसे वासुमति योग कहते हैं।
वासुमति योग का मुख्य फल क्या है यह योग व्यक्ति को स्वयं के प्रयासों से समृद्धि व्यापारिक सफलता और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता देता है।
क्या वासुमति योग विरासत से मिलने वाले धन का योग है नहीं वासुमति योग का मूल स्वभाव self made समृद्धि का है। यह व्यक्ति को अपने बल पर आगे बढ़ाता है।
चंद्रमा का पक्ष बल क्यों महत्वपूर्ण है यदि चंद्रमा शुक्ल पक्ष का बलवान हो तो वासुमति योग अधिक प्रभावशाली होता है। अमावस्या के आस पास चंद्रमा होने पर इसका फल कमजोर पड़ सकता है।
वासुमति योग का फल कब सबसे अधिक मिलता है जब गुरु या शुक्र की महादशा या अंतर्दशा आती है तब इस योग का आर्थिक प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है।
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