By पं. नीलेश शर्मा
सूर्य, मंगल व वृश्चिक का दिव्य सम्बन्ध

सूर्य के वृश्चिक प्रवेश का प्रत्येक क्षण विशेष महत्व रखता है। 16 नवम्बर 2025, रविवार, दोपहर 1:44 बजे (IST) सूर्य देव मित्र ग्रह मंगल की शासित राशि वृश्चिक में प्रवेश करते हैं। यह कालखण्ड ऊर्जा, साहस, आंतरिक बल, रहस्य एवं विवेक के जागरण का प्रेरक बिंदु बनता है। ज्योतिष शास्त्र के शाश्वत सिद्धांत अनुसार सूर्य की किरणें इस काल में आत्मबल, स्वाध्याय और गहन परिवर्तन के लिए मार्ग प्रशस्त करती हैं। सूर्य-मंगल की मित्रता जातकों को कर्म, यश, संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों में स्थिरता की शक्ति देती है।
| तिथि | वार | प्रवेश समय |
|---|---|---|
| 16 नवम्बर 2025 | रविवार | 1:44 अपराह्न |
सूर्य प्रत्यक्ष जीवन का अधिपति है। मंगल की ऊर्जा वृश्चिक राशि को गूढ़ता एवं विशेषत्व प्रदान करती है। इस गोचर में सूर्य तेजस्विता, स्वावलंबन एवं संस्कृति की प्रतिष्ठा को जाग्रत करता है। किंतु, वाणी की कटुता एवं व्यवहार में रूखापन विवाद की आशंका उत्पन्न करता है। संयमित बोलचाल और उचित आचरण से ही इस काल की शुभता प्राप्त होती है।
| राशि | मुख्य प्रभाव | दिव्य उपाय |
|---|---|---|
| मेष | संघर्ष व व्यक्तिगत-विवाहिक कठिनाई | योग, ध्यान, शांत वाणी |
| वृषभ | आर्थिक गतिरोध, संबंधों में विवाद | संयम, विनम्र संवाद |
| मिथुन | प्रगति, वरिष्ठों से सहयोग | विश्राम, कार्य-जीवन संतुलन |
| कर्क | संबंधों में माधुर्य, पदोन्नति | भाव-नियंत्रण, नियमित ध्यान |
| सिंह | मतभेद, वरिष्ठों का मार्गदर्शन | धैर्य, संयमित प्रयास |
| कन्या | कार्य उन्नति, संबंधों में सहयोग | वाणी व व्यय पर नियंत्रण |
| तुला | आर्थिक लाभ, संबंधों में प्रगाढ़ता | अहंकार व कठोर भाषा से सजग |
| वृश्चिक | यश, लाभ, प्रतिष्ठा | अहं संयम, योग, ध्यान |
| धनु | कार्यभार, मानसिक तनाव | संयम, साधना, धैर्य |
| मकर | धन, प्रशंसा, साझेदारी | नम्रता, संबंधों में संयम |
| कुम्भ | पेशेवर सफलता, पारिवारिक सुख | संयम, विनम्रता |
| मीन | कुशलता, यात्रा में लाभ, आर्थिक स्थिरता | अहं संयम, आध्यात्मिक प्रवास |
मेष जातकों के लिए सूर्य वृश्चिक में उलझनों और संघर्ष का काल है। व्यक्तिगत संबंधों और कार्यक्षेत्र में चुनौती मिलेगी, संतुलन और योग-ध्यान से मानसिक शांति संभव।
वृषभ हेतु आर्थिक प्रगति धीमी, संबंधों में अहं व वाद-विवाद की संभावना। संयम, मधुर संवाद और शांतिपूर्ण आचारण आवश्यक।
मिथुन के लिए वरिष्ठों से सहयोग, व्यापार में लाभ, स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता।
कर्क को पारिवारिक आनंद, पेशेवर उपलब्धि; संवेदनाओं का संतुलन रखें।
सिंह को मतभेद का सामना, वरिष्ठों का मार्गदर्शन लाभकारी रहेगा। संयमित प्रयास से उन्नति संभव।
कन्या जातकों को कार्य उन्नति, संबंधों में सहयोग मिलेगा; वाणी व व्यय में नियंत्रण रखें।
तुला को आर्थिक लाभ, संबंधों में भाव-नियंत्रण आवश्यक, अहंकार त्यागें।
वृश्चिक को यश, प्रतिष्ठा, व्यवसाय में लाभ; अहं संयम और योग से संतुलन।
धनु को कार्यभार, तनाव, साधना व संयम से संतुलन प्राप्त करें।
मकर को धन, प्रशंसा, नम्रता जरूरी; भाई-बहनों से विवाद से बचें।
कुम्भ के पेशेवर सफलता, सौहार्द; संयमित व शांत रहें।
मीन को कार्य कुशलता, यात्रा से लाभ, आर्थिक स्थिरता; अहं पर नियंत्रण व आध्यात्मिक यात्रा फायदेमंद।
सूर्य की ऊर्जा गूढ़ एवं तीक्ष्ण होती है। इसलिए इस गोचर काल में क्रोध, कठोरता, अहं, वाणी की तीक्ष्णता से बचाव जरूरी है। साधना, ध्यान, संयम ही शुभ फलदायक होंगे।
वृश्चिक राशि में सूर्य का प्रवेश अनुग्रह, परिवर्तन, रहस्य एवं साधना का प्रेरक है। विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा नक्षत्र की दिव्यता इस काल को जन्म देती है।
| नक्षत्र | प्रभाव | देवता |
|---|---|---|
| विशाखा | लक्ष्य सिद्धि, विविध फल | इन्द्र-अग्नि |
| अनुराधा | मित्रता, भक्ति | मित्र |
| ज्येष्ठा | साहस, संघर्ष, आत्मविश्वास | इन्द्र-कृष्ण |
सूर्य गोचर आत्मबल, संबंध, स्वास्थ्य व कार्यक्षेत्र में परिवर्तन तथा दृढ़ता लाता है।
'ॐ घृणि सूर्याय नमः' एवं आदित्य हृदय स्तोत्र का नित्य जाप लाभकारी है।
विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा सूर्य का प्रभाव तीव्र करती हैं।
संयमित वाणी, अहंकार का त्याग, योग, ध्यान व वरिष्ठों से मार्गदर्शन आवश्यक।
प्रातः सूर्य अर्घ्य, ध्यान, साधना, श्वास अभ्यास श्रेष्ठ।
सूर्य राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी सूर्य राशिअनुभव: 25
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