By अपर्णा पाटनी
2026 में सूर्य के कुंभ राशि में प्रवेश से करियर, संबंध और जीवन में बदलाव

सूर्य को ज्योतिष में ग्रहों का राजा और समस्त राशिचक्र की आत्मा माना जाता है। जब सूर्य किसी एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो उसकी यह चाल हर व्यक्ति की जन्म कुंडली, राशि और जीवन की दिशा पर सीधा प्रभाव डालती है। वर्ष 2026 में जब सूर्य मकर से आगे बढ़कर कुम्भ राशि में प्रवेश करेगा तो सामूहिक स्तर पर सोच, दृष्टि और काम करने के तरीके में स्पष्ट परिवर्तन दिखाई देगा।
कुम्भ राशि में सूर्य का गोचर परंपरागत ढर्रे से बाहर निकलकर नए विचार, व्यावहारिक सोच और जिम्मेदार दृष्टि के प्रति प्रेरित करता है। लोग अपने कार्य क्षेत्र, संबंध, घरेलू जीवन और व्यक्तिगत लक्ष्य को अधिक यथार्थ दृष्टि से देखने लगते हैं। यह समय केवल योजनाएं बनाने का नहीं बल्कि उन्हें धैर्य और अनुशासन के साथ धरातल पर उतारने का होता है।
सूर्य का गोचर कब हो रहा है, यह समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के आधार पर शुभ कार्यों की योजना, उपाय और व्यक्तिगत निर्णय अधिक सटीक रूप से किए जा सकते हैं।
इस अवधि में सूर्य कुम्भ की ऊर्जा के साथ मिलकर सामूहिक सोच, सामाजिक जिम्मेदारी और दीर्घकालिक योजनाओं पर विशेष जोर देता है। जो जातक इस समय का उपयोग सजग होकर करते हैं, उनके लिए यह समय स्थायी और ठोस प्रगति की नींव बन सकता है।
जन्म कुंडली में सूर्य व्यक्ति के स्वाभिमान, नेतृत्व क्षमता, उद्देश्य भावना, पिता समान व्यक्तियों, अधिकार और प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। हर बार जब सूर्य एक राशि से दूसरी में जाता है तब यह तय होता है कि आने वाले महीने में लोग किस तरह आत्मविश्वास व्यक्त करेंगे, जिम्मेदारियां कैसे संभालेंगे और चुनौतियों का सामना किस मानसिकता से करेंगे।
कुम्भ एक शनि शासित राशि है, जो अनुशासन, यथार्थवाद, कर्मफल और सामूहिक हित से जुड़ी मानी जाती है। इसलिए कुम्भ में सूर्य का गोचर तेज सूर्य ऊर्जा और शनि की व्यवस्थित, धैर्यपूर्ण प्रकृति का मिश्रण तैयार करता है। यह समय
कभी कभी यह अवधि थोड़ी मांग करने वाली भी महसूस हो सकती है, क्योंकि यह भावुक प्रतिक्रिया से अधिक जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा रखती है। जो लोग धैर्य और अनुशासन के साथ आगे बढ़ते हैं, उनके लिए यह समय ठोस परिणाम लेकर आता है।
सूर्य का कुम्भ राशि में गोचर हर व्यक्ति की जन्म कुंडली में अलग भाव को सक्रिय करता है। इसी के आधार पर कार्य, धन, संबंध, स्वास्थ्य और जीवन दिशा पर इसका प्रभाव बदलता है। नीचे बारहों राशियों के लिए इस गोचर के संभावित प्रभाव और सरल उपाय दिए जा रहे हैं।
मेष राशि के लिए सूर्य कुम्भ में ग्यारहवें भाव से गोचर करता है, जो लाभ, अभिलाषा, सामाजिक दायरा और दीर्घकालिक लक्ष्यों से जुड़ा होता है। यह समय निरंतर प्रयास से प्रगति, सम्मान और परिचय विस्तार के लिए सहायक है। कार्य क्षेत्र में किए गए परिश्रम की सराहना मिलने के संकेत बनते हैं और कई जातकों को वरिष्ठों से सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।
आर्थिक रूप से यह अवधि आमदनी बढ़ाने, बचत सुधारने और दीर्घकालिक योजनाओं पर काम करने के लिए सहायक है। जो लोग व्यापार या प्रतियोगी वातावरण में काम करते हैं, उन्हें प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सकती है। व्यक्तिगत जीवन में मित्रों और जीवनसाथी से सहयोग मिलता है, जिससे भावनात्मक संतुष्टि बढ़ती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से ऊर्जा स्तर अच्छा रहने की संभावना है, जिससे सक्रिय रहना सहज होगा।
उपाय प्रतिदिन उगते सूर्य को जल अर्पित करें और श्रद्धा से गायत्री मंत्र का जप करें। इससे आत्मविश्वास, स्पष्टता और निर्णय क्षमता मजबूत होगी।
वृषभ राशि के लिए सूर्य का कुम्भ में गोचर दसवें भाव से होता है, जो कार्य क्षेत्र, दायित्व और सामाजिक स्थान का भाव है। यह समय कार्य क्षेत्र में नई जिम्मेदारियां, महत्वपूर्ण कार्य या भूमिका विस्तार लेकर आ सकता है। काम का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन उसी अनुपात में प्रतिष्ठा और पहचान में भी वृद्धि संभव है।
आर्थिक रूप से स्थिर आय और धीरे धीरे बढ़ती सुरक्षा का संकेत मिलता है, खासकर नौकरी और संपत्ति से जुड़े मामलों में। व्यवसाय कर रहे जातक यदि नियोजित, अनुशासित तरीके से आगे बढ़ें तो अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। निजी जीवन में काम की व्यस्तता संबंधों पर प्रभाव डाल सकती है, इसलिए जीवनसाथी या परिवार से स्पष्ट संवाद बनाए रखना आवश्यक है। स्वास्थ्य सामान्य रूप से ठीक रहेगा, बशर्ते तनाव और थकान को अनदेखा न किया जाए।
उपाय अपनी दिनचर्या में अनुशासन बनाए रखें, समय पर कार्य पूरे करें और बड़ों व अधिकार पदों पर बैठे लोगों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करें।
मिथुन राशि के लिए सूर्य कुम्भ में नवें भाव से गोचर करता है, जो भाग्य, उच्च शिक्षा, मान्यताओं और दूरस्थ संबंधों का भाव है। यह समय दृष्टिकोण विस्तार, नई सीख और जीवन दिशा तय करने के लिए अनुकूल है। वरिष्ठों, गुरुओं या पिता समान व्यक्तियों से मार्गदर्शन मिलने के योग बनते हैं, जो जीवन के फैसलों को स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं।
आर्थिक रूप से कौशल आधारित काम, अतिरिक्त प्रोत्साहन, यात्रा या विदेश से जुड़े अवसरों से लाभ संभव है। शिक्षा, सलाहकार कार्य, लेखन या संवाद से जुड़े पेशे वालों के लिए यह अवधि विशेष रूप से सहायक हो सकती है। निजी जीवन में जीवनसाथी के साथ विचारों का आदान प्रदान, साझा लक्ष्य और संवाद संबंधों को मजबूत बना सकते हैं। स्वास्थ्य लगभग स्थिर रहने की संभावना है, हालांकि मानसिक थकान या अत्यधिक सोच से बचने के लिए पर्याप्त विश्राम आवश्यक रहेगा।
उपाय नियमित रूप से आदित्य हृदय स्तोत्र का श्रद्धा से पाठ करें या कम से कम कुछ श्लोक पढ़ें। इससे सकारात्मक सोच और आत्मबल में वृद्धि होगी।
कर्क राशि के लिए सूर्य का कुम्भ में गोचर अष्टम भाव से होता है, जो परिवर्तन, गुप्त विषय, साझा संसाधन और मानसिक दृढ़ता से जुड़ा है। यह समय भीतर से मजबूत रहने की मांग करता है। कार्य क्षेत्र में प्रगति थोड़ी धीमी महसूस हो सकती है या स्वीकृति अपेक्षा से देर से मिले, लेकिन लगातार और ईमानदार प्रयास अंततः फल देने लगते हैं।
आर्थिक रूप से अचानक खर्च, उधारी या कर संबंधित मामलों में सावधानी जरूरी है। इस समय किसी बड़े जोखिम या अत्यधिक अनुमान आधारित निवेश से बचना बुद्धिमानी होगी। व्यक्तिगत जीवन में भावनात्मक संवेदनशीलता बढ़ सकती है, जिससे छोटी बातों पर भी मन आहत हो सकता है। संवाद को परिपक्व और संतुलित रखने की आवश्यकता होगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रतिरोधक क्षमता और तनाव से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है।
उपाय प्रतिदिन श्रद्धा से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। यह मंत्र भावनात्मक संतुलन, मानसिक दृढ़ता और भीतर की शांति बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
सिंह राशि के लिए सूर्य कुम्भ में सप्तम भाव से गोचर करता है, जो साझेदारी, विवाह, सहयोग और जनसंपर्क से संबंधित है। यह समय व्यवसायिक साझेदारी, ग्राहकों से संबंध और समूह कार्य से लाभ पाने के लिए उपयुक्त है। जो जातक साझेदारी आधारित काम करते हैं, उन्हें नए अवसर या विस्तार के संकेत मिल सकते हैं।
आर्थिक रूप से आय का स्थिर प्रवाह, साझेदारी या संयुक्त प्रयास से लाभ की संभावना बनती है। निजी जीवन में जीवनसाथी के साथ संबंध सामान्य रूप से सहयोगपूर्ण रह सकते हैं, बशर्ते अहं और जिद को नियंत्रण में रखा जाए। कार्य क्षेत्र तथा निजी दोनों क्षेत्रों में विनम्रता और संवाद कौशल सफलता की कुंजी बन सकते हैं। स्वास्थ्य के लिहाज से ऊर्जा अच्छी रहेगी, लेकिन अत्यधिक आत्मविश्वास या तनाव से बचना आवश्यक है।
उपाय रविवार के दिन सूर्य को अर्घ्य देकर प्रार्थना करें और व्यवहार में विनम्रता का अभ्यास करें।
कन्या राशि के लिए सूर्य का कुम्भ में गोचर छठे भाव से होता है, जो प्रतियोगिता, सेवा, दिनचर्या और स्वास्थ्य से जुड़ा है। यह समय मेहनत, संघर्ष और जिम्मेदारी बढ़ा सकता है, लेकिन साथ ही चुनौतियों पर विजय पाने के अवसर भी देता है। कार्यस्थल पर समस्याओं का समाधान करने, संगठन क्षमता दिखाने और सेवा भाव से काम करने से सम्मान मिल सकता है।
आर्थिक रूप से खर्च में बढ़ोतरी की संभावना है, इसलिए बजट और वित्तीय अनुशासन जरूरी होगा। कर्ज या अनावश्यक व्यय से बचने की कोशिश करनी चाहिए। निजी जीवन में काम का तनाव संबंधों पर असर डाल सकता है, इसलिए परिवार और जीवनसाथी के लिए भी समय निकालना आवश्यक होगा। स्वास्थ्य की दृष्टि से पाचन तंत्र, शर्करा स्तर या अत्यधिक काम से होने वाली थकान पर ध्यान देना जरूरी है।
उपाय नियमित व्यायाम, समय पर भोजन और ध्यान को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। इससे मानसिक स्पष्टता, धैर्य और ऊर्जा में संतुलन बना रहेगा।
तुला राशि के लिए सूर्य कुम्भ में पंचम भाव से गुजरता है, जो रचनात्मकता, शिक्षा, संतान और निर्णय क्षमता का भाव है। यह समय बौद्धिक उन्नति और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए सहायक है। विद्यार्थी, कलाकार या विश्लेषणात्मक कार्यों में लगे जातक अधिक एकाग्रता और गंभीरता के साथ काम कर सकते हैं, हालांकि परिणामों में थोड़ा समय लग सकता है।
आर्थिक पक्ष में निवेश, अनुमान आधारित कार्य या रचनात्मक परियोजना से लाभ संभव है, लेकिन अत्यधिक जोखिम से बचना चाहिए। निजी जीवन में जीवनसाथी और बच्चों के साथ संबंध मधुर रह सकते हैं, जिससे भावनात्मक संतोष मिलेगा। स्वास्थ्य सामान्य रूप से संतुलित रह सकता है, बशर्ते मानसिक तनाव और अनावश्यक चिंता से दूरी बनाई जाए।
उपाय प्रतिदिन सूर्योदय के समय सूर्य नमस्कार का अभ्यास करें। इससे शरीर, मन और ऊर्जा के स्तर में अच्छा संतुलन बनता है।
वृश्चिक राशि के लिए सूर्य का कुम्भ में गोचर चतुर्थ भाव से होता है, जो घर, माता, भावनात्मक सुरक्षा और आंतरिक शांति से जुड़ा है। इस समय परिवार और घर से संबंधित जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। घरेलू व्यवस्था, भूमि या वाहन से जुड़े विषयों पर ध्यान देना पड़ सकता है।
कार्य क्षेत्र में प्रगति धीरे लेकिन स्थिर रहने की संभावना है। आर्थिक स्थिति में सुधार संभव है, हालांकि परिणाम अचानक की बजाय क्रमिक रूप से मिलेंगे। निजी जीवन में परिवार और जीवनसाथी के साथ भावनात्मक समझ और धैर्य आवश्यक रहेगा। स्वास्थ्य की दृष्टि से मानसिक तनाव और हृदय या रक्तचाप से जुड़े मामलों पर ध्यान रखना लाभदायक होगा।
उपाय प्रतिदिन प्रातःकाल पूर्व दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाएं और शांति की प्रार्थना करें। इससे घर में सकारात्मकता और मन में स्थिरता बढ़ती है।
धनु राशि के लिए सूर्य कुम्भ में तृतीय भाव से गोचर करता है, जो साहस, संचार, प्रयास और छोटे यात्राओं से संबंधित है। यह समय पहल करने, नई जिम्मेदारियां स्वीकार करने और कौशल विकसित करने के लिए अनुकूल है। कार्य क्षेत्र में संवाद कौशल, प्रस्तुति और परिचय से लाभ मिल सकता है।
आर्थिक रूप से स्थिरता धीरे धीरे बढ़ सकती है, खासकर यदि अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखा जाए। निजी जीवन में जीवनसाथी के साथ खुला और ईमानदार संवाद संबंधों को मजबूत बनाए रखेगा। स्वास्थ्य के मामले में ऊर्जा अच्छी रहने की संभावना है, हालांकि अत्यधिक थकान या बहुत अधिक काम से बचने की आवश्यकता होगी।
उपाय प्रतिदिन श्रद्धा से “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जप करें। यह उपाय आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति और सकारात्मकता बढ़ाने में सहायक है।
मकर राशि के लिए सूर्य कुम्भ में द्वितीय भाव से गोचर करता है, जो धन, वाणी, परिवार और मूल्यों से संबंध रखता है। यह समय आर्थिक विषयों पर गंभीर और जिम्मेदार रुख अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। आय में सुधार, बचत और लंबी अवधि की आर्थिक योजना पर ध्यान बढ़ सकता है।
कार्य क्षेत्र में नेतृत्व भूमिका, उत्तरदायित्व और स्थिरता से जुड़े अवसर मिल सकते हैं, जिससे आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। निजी जीवन में परिवार के साथ संबंध सामान्य रूप से सहायक रह सकते हैं, लेकिन वाणी में कठोरता या अधैर्य से बचना आवश्यक होगा। स्वास्थ्य संतुलित रह सकता है, यदि खानपान और दिनचर्या को सुव्यवस्थित रखा जाए।
उपाय रविवार के दिन गेहूं या गुड़ का दान करें और हर दिन बोलचाल में सौम्यता का अभ्यास करें। यह सूर्य और द्वितीय भाव दोनों को संतुलित करने में मदद करता है।
कुम्भ राशि के लिए सूर्य का गोचर प्रथम भाव में होता है, जो स्वयं, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और जीवन दिशा से जुड़ा है। यह समय स्वयं को नए दृष्टिकोण से देखने, व्यक्तिगत लक्ष्य तय करने और नेतृत्व क्षमता को निखारने का है। कार्य क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी स्वयं संभालने और निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
आर्थिक रूप से यह समय व्यावहारिक निर्णय, अनुशासित खर्च और दीर्घकालिक योजना से लाभ देने वाला है। निजी जीवन में संबंधों में ईमानदार संवाद और सम्मान से सामंजस्य बना रह सकता है। स्वास्थ्य के स्तर पर ऊर्जा अच्छी रह सकती है, हालांकि अहं से जुड़े तनाव या थकान से बचना आवश्यक होगा।
उपाय अहं संघर्षों से बचें और हर दिन दिन की शुरुआत सूर्य को प्रार्थना करके करें। थोड़ी देर शांत बैठकर स्वयं के लक्ष्य और जिम्मेदारियों पर ध्यान करें।
मीन राशि के लिए सूर्य कुम्भ में द्वादश भाव से गोचर करता है, जो व्यय, एकांत, विदेश, अवचेतन मन और आध्यात्मिक विकास से जुड़ा है। यह समय बाहरी भागदौड़ से थोड़ा हटकर भीतर की यात्रा की ओर ले जा सकता है। कई जातक मन ही मन आत्मचिंतन, प्रार्थना या ध्यान की ओर स्वाभाविक आकर्षण महसूस कर सकते हैं।
कार्य क्षेत्र में पर्दे के पीछे किए जाने वाले कार्य, शोध या विदेश से जुड़े अवसर सामने आ सकते हैं। आर्थिक रूप से खर्च बढ़ने की संभावना है, इसलिए योजनाबद्ध वित्तीय प्रबंधन आवश्यक रहेगा। निजी जीवन में धैर्य और समझ जरूरी है, क्योंकि थकान या मन की व्यस्तता गलतफहमी पैदा कर सकती है। स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद, आराम, मनन और सजगता बहुत लाभकारी होगी।
उपाय प्रतिदिन कुछ समय शांत बैठकर प्रार्थना करें और मन की उथल पुथल को लेखन या ध्यान के माध्यम से बाहर निकालने की कोशिश करें।
कुम्भ राशि में सूर्य का यह गोचर जीवन में अनुशासन, जिम्मेदारी और स्पष्टता लाने का निमंत्रण है। जो लोग अपनी आदतों, समय प्रबंधन और लक्ष्य निर्धारण पर ईमानदारी से काम करते हैं, उनके लिए यह अवधि लंबे समय की प्रगति की मजबूत नींव बना सकती है।
इस समय
विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। अहं टकराव से बचना, धैर्य रखना और लगातार छोटे लेकिन स्थिर कदम बढ़ाना सूर्य की ऊर्जा को संतुलित और फलदायी दिशा में ले जाता है।
कुछ लोगों के लिए, जन्म कुंडली के अनुसार सही सलाह के बाद रत्न धारण करना भी सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। सूर्य के लिए पारंपरिक रूप से माणिक्य को प्रमुख रत्न माना जाता है, जो आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और जीवटता को बढ़ाने में मदद कर सकता है, यदि कुंडली इसकी अनुमति देती हो।
चूंकि हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है, इसलिए माणिक्य या सूर्य संबंधी किसी भी रत्न को धारण करने से पहले अनुभवी ज्योतिषीय परामर्श लेना आवश्यक है, ताकि रत्न ऊर्जा को संतुलित ढंग से सक्रिय करे, न कि चुनौतियों को बढ़ा दे।
कुल मिलाकर कुम्भ राशि में सूर्य का गोचर 2026 हर राशि के लिए परिपक्वता, व्यावहारिक सोच और जिम्मेदारी का समय लेकर आता है। कुछ राशियों के लिए यह वृद्धि, सम्मान और आर्थिक मजबूती का अवसर बन सकता है, जबकि अन्य के लिए यह धैर्य, योजना और भीतर की मजबूती सीखने का महत्वपूर्ण चरण हो सकता है।
जो लोग इस अवधि के संकेतों को समझकर अपने फैसलों, संबंधों और कर्मों में स्पष्टता और ईमानदारी लाते हैं, वे आगे की राह पर अधिक भरोसे, स्थिरता और उद्देश्य के साथ बढ़ सकते हैं। यही इस गोचर का वास्तविक लाभ है, जो केवल परिस्थितियां नहीं बदलता बल्कि व्यक्ति की दृष्टि और दिशा दोनों को अधिक जागरूक बना देता है।
सूर्य राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी सूर्य राशिअनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, मुहूर्त
इनके क्लाइंट: म.प्र., दि.
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