By पं. संजीव शर्मा
शुक्र का मंगल राशि में प्रवेश: प्रेम, आत्मविश्वास और सौंदर्य का संयोग

31 मई 2025, शनिवार को प्रातः 11:42 बजे (IST) शुक्र देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे। यह गोचर उस समय को इंगित करता है जब सौंदर्य, प्रेम, आकर्षण और भौतिक सुख की ग्रह ऊर्जा अग्नि तत्व की सक्रियता के साथ मिलती है। मेष राशि मंगल की अधिपति राशि है और शुक्र-मंगल का यह संगम कर्म, साहस, सौंदर्य और आत्मविश्वास को एक साथ जागृत करता है। वैदिक दृष्टि से यह काल आत्मसंतुलन, संयमित भोग, तथा सृजनात्मक प्रेरणा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवधि में व्यक्ति आत्मप्रकाश, आकर्षण और व्यक्तिगत उपलब्धियों की ओर अग्रसर होगा। हालांकि, अत्यधिक उत्साह और भोगप्रियता से बचना आवश्यक है, ताकि शुक्र की दिव्यता आत्म-विकास का माध्यम बन सके न कि मोह का।
यह गोचर आत्मविश्वास, आकर्षण और वैभव को बढ़ाता है। नए अवसर मिलेंगे और व्यवसाय में लाभ के संकेत हैं। प्रेम संबंधों में उत्साह रहेगा, किंतु क्रोध या अहंकार से बचें।
उपाय: ऊर्जा को संयमित करने हेतु योग या ध्यान का अभ्यास करें।
शुक्र आपके स्वामी ग्रह हैं और बारहवें भाव से भोग और व्यय का योग बना रहे हैं। वैभव और आराम में वृद्धि होगी, किंतु खर्च भी बढ़ेंगे। संबंधों में संयम और विनम्रता आवश्यक है।
उपाय: शुक्रवार को दान करें और सफेद वस्त्र धारण करें।
शुक्र ग्यारहवें भाव में इच्छापूर्ति और लाभ का संकेत दे रहे हैं। मित्रों का सहयोग मिलेगा और आर्थिक स्थिरता बढ़ेगी। पारिवारिक वातावरण प्रसन्न रहेगा।
उपाय: शुक्रवार को इत्र या पुष्प अर्पण करें।
दसवें भाव में स्थित शुक्र कार्यक्षेत्र में सम्मान और अवसर देंगे। वरिष्ठों से सहयोग प्राप्त होगा। गृहस्थ जीवन में भी स्थिरता और संतुलन आएगा।
उपाय: देवी लक्ष्मी की उपासना करें और शुक्रवार को गुलाबी पुष्प अर्पित करें।
शुक्र नवम भाव में शुभ अवसरों और भाग्यवृद्धि के संकेत दे रहे हैं। यात्रा, अध्ययन या धार्मिक कार्यों में सफलता मिलेगी। अहंकार और अत्यधिक आत्मविश्वास से बचें।
उपाय: प्रतिदिन सूर्योदय के समय आभार व्यक्त करें।
शुक्र अष्टम भाव में स्थित होकर गूढ़ आकर्षण और परिवर्तन ला रहे हैं। धन, स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सावधानी आवश्यक है। अध्यात्म और ध्यान से शांति प्राप्त होगी।
उपाय: हरे मूंग या फल शुक्रवार को दान करें।
शुक्र सप्तम भाव में स्थित होकर दांपत्य जीवन को सुखद बना रहे हैं। नए संबंधों और साझेदारियों में सफलता के योग हैं। प्रेम विवाह या व्यापारिक गठबंधन सफल होंगे।
उपाय: शुक्रवार को माता-पिता का आशीर्वाद लें।
षष्ठ भाव में शुक्र कर्मशीलता और प्रतिस्पर्धा में विजय देंगे। स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक है, अन्यथा थकान या तनाव की संभावना है।
उपाय: शुक्रवार को सुगंधित दीपक जलाएं।
पंचम भाव में शुक्र रचनात्मकता, प्रेम और आनंद बढ़ाते हैं। कला, संगीत या बच्चों से जुड़े कार्यों में प्रगति होगी। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी।
उपाय: शुक्रवार को गोमाता को हरी घास खिलाएं।
चतुर्थ भाव में शुक्र गृहस्थ सुख, संपत्ति और वाहन लाभ के संकेत दे रहे हैं। परिवार में प्रेम और एकता बढ़ेगी।
उपाय: शुक्रवार को देवी लक्ष्मी को सफेद पुष्प अर्पित करें।
तृतीय भाव में शुक्र साहस और वाणी की शक्ति बढ़ा रहे हैं। नए कौशल और रचनात्मक विचारों में वृद्धि होगी।
उपाय: लाल या गुलाबी वस्त्र धारण करें।
द्वितीय भाव में शुक्र धन, वाणी और परिवार में शुभता लाएंगे। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी और पारिवारिक मेल-मिलाप बढ़ेगा।
उपाय: प्रतिदिन ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ का जप करें।
हाँ, विशेषतः मेष, तुला और मीन राशि वालों के लिए यह समय प्रेम और भावनात्मक प्रगाढ़ता को बढ़ाने वाला है।
हाँ, कर्मशील और साहसी दृष्टिकोण रखने वाले जातकों को व्यवसाय और नौकरी दोनों में लाभ के योग हैं।
अत्यधिक विलासिता या तनाव से बचें। संतुलित आहार और योगाभ्यास आवश्यक है।
तुला, मीन और धनु राशियों के लिए यह काल विशेष रूप से सुखद है। अहंकार से दूर रहना शुभ रहेगा।
शुक्रवार को देवी लक्ष्मी की आराधना करें, सुगंधित पुष्प अर्पित करें और सफेद वस्त्र धारण करें।
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