By पं. अमिताभ शर्मा
शुक्र का सूर्य राशि सिंह में प्रवेश: सौंदर्य और नेतृत्व का दिव्य संगम

गोचर तिथि: 15 सितम्बर 2025, सोमवार
समय: प्रातः 12:23 बजे (IST)
शुक्र ग्रह जब अग्नि तत्व वाली सिंह राशि में प्रवेश करते हैं तब प्रेम, सौंदर्य, विलासिता और रचनात्मकता के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार होता है। सिंह राशि सूर्य की राशि है, जो आत्मविश्वास, राजसी अभिव्यक्ति और नेतृत्व का प्रतीक है। इस गोचर में शुक्र का तेज और सूर्य की गरिमा मिलकर ऐसी स्थिति बनाते हैं जो व्यक्ति को आकर्षक, आत्मविश्वासी और प्रभावशाली बनाती है। परंतु अहंकार, दिखावे या अत्यधिक भोग-विलास से यह दिव्यता कलुषित भी हो सकती है।
यह काल आत्मप्रदर्शन, कला, संगीत, अभिनय, नेतृत्व और प्रेम के विस्तार के लिए अत्यंत शुभ है। किंतु सच्ची सफलता वही प्राप्त करेगा जो अपने वैभव में विनम्रता और अपने प्रेम में शालीनता बनाए रखे।
भाव: पंचम भाव - रचनात्मकता, संतान और प्रेम
कला, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़े लोगों के लिए यह अत्यंत अनुकूल समय है। निवेश में सफलता संभव है, किन्तु विवेक आवश्यक है। प्रेम जीवन में नई शुरुआत के संकेत हैं।
उपाय: शुक्रवार को माता लक्ष्मी को लाल गुड़हल का पुष्प अर्पित करें और "ॐ शुक्राय नमः" का जप करें।
भाव: चतुर्थ भाव - गृह सुख, माता और स्थिरता
घर-संपत्ति, सजावट या वाहन में निवेश का योग बनेगा। परिवार में सौहार्द बना रहेगा, किंतु व्यय पर संयम रखें।
उपाय: घर के ईशान कोण में घी का दीपक जलाएं और शुक्रवार को सफेद मिष्ठान दान करें।
भाव: तृतीय भाव - संचार, कौशल और पराक्रम
पत्रकारिता, लेखन, मीडिया और विपणन से जुड़े जातकों के लिए यह लाभकारी समय है। यात्रा और नए संपर्क से सफलता मिलेगी।
उपाय: पक्षियों को हरी मूंग खिलाएं और "ॐ द्रां द्रीम द्रौं सः शुक्राय नमः" मंत्र का जप करें।
भाव: द्वितीय भाव - धन, वाणी और परिवार
आर्थिक दृष्टि से उन्नति का समय है। निवेश फलदायक रहेगा। पारिवारिक प्रेम और मधुर वाणी से संबंध प्रगाढ़ होंगे।
उपाय: शुक्रवार को केसरयुक्त दूध शिवलिंग पर चढ़ाएं।
भाव: प्रथम भाव - व्यक्तित्व और आत्मबल
आकर्षण, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में सम्मान और अवसर मिलेंगे। परंतु अहंकार से बचें।
उपाय: चंदन का तिलक लगाएं और प्रतिदिन ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करें।
भाव: द्वादश भाव - विदेश, व्यय और आत्मविवेक
विदेश यात्रा और आध्यात्मिक झुकाव का योग है। खर्च बढ़ सकते हैं, अतः संयम रखें। गुप्त संबंधों से दूर रहें।
उपाय: रात्रि में कपूर जलाकर सोएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करें।
भाव: एकादश भाव - लाभ, मित्र और इच्छापूर्ति
मित्रों से सहयोग और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आर्थिक लाभ और सुखद अवसर प्राप्त होंगे।
उपाय: शुक्रवार को शिवलिंग पर गुलाब की पंखुड़ियाँ चढ़ाएं और महिलाओं को श्रृंगार सामग्री दान करें।
भाव: दशम भाव - कर्म, प्रतिष्ठा और प्रसिद्धि
कैरियर में उन्नति और जनमान्यता के योग हैं। कार्यस्थल पर प्रेम संबंधों में सावधानी रखें।
उपाय: शुक्रवार को लक्ष्मीजी को कमल पुष्प अर्पित करें और ‘श्री सूक्त’ का पाठ करें।
भाव: नवम भाव - भाग्य, शिक्षा और धर्म
धार्मिक यात्राएँ और अध्ययन के अवसर मिलेंगे। विदेश से जुड़ा कार्य लाभकारी रहेगा।
उपाय: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और ब्राह्मणों को पीत वस्त्र दान करें।
भाव: अष्टम भाव - परिवर्तन, गूढ़ता और गुप्त लाभ
आध्यात्मिक उन्नति का समय है, परंतु स्वास्थ्य और खर्च पर ध्यान दें।
उपाय: ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जप करें और शनिवार को पीपल के नीचे सरसों का तेल चढ़ाएं।
भाव: सप्तम भाव - दांपत्य और साझेदारी
विवाह, व्यवसायिक भागीदारी और नए संबंधों के लिए शुभ समय है। संबंधों में ईमानदारी और मधुरता बनाए रखें।
उपाय: शुक्रवार को देवी लक्ष्मी को चंदन अर्पित करें और ओपल रत्न धारण करें (ज्योतिषी से परामर्श के बाद)।
भाव: षष्ठ भाव - सेवा, स्वास्थ्य और प्रतिस्पर्धा
प्रतियोगिता में विजय और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। परंतु व्यय नियंत्रण में रखें।
उपाय: शुक्रवार को जरूरतमंदों को मट्ठा या दही का दान करें और ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का जप करें।
प्रश्न 1: क्या यह गोचर प्रेम संबंधों के लिए शुभ है?
हाँ, विशेषतः मेष, तुला और सिंह राशि वालों के लिए यह काल प्रेम और आकर्षण में वृद्धि लाता है।
प्रश्न 2: क्या आर्थिक दृष्टि से लाभ होगा?
हाँ, उचित निवेश और सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले जातकों को धनलाभ के अवसर मिलेंगे।
प्रश्न 3: स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव रहेगा?
अति विलासिता और तनाव से बचें, अन्यथा थकावट या हृदय संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रश्न 4: क्या यह समय विवाह के लिए शुभ है?
तुला, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए यह काल विशेष रूप से अनुकूल है।
प्रश्न 5: इस गोचर का आध्यात्मिक संदेश क्या है?
यह सिखाता है कि सच्चा वैभव विनम्रता में है और सच्चा प्रेम आत्मबल में।
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