By पं. नीलेश शर्मा
परिवर्तन, खोज और आत्म-शुद्धि का प्रतीक नक्षत्र, जो रुद्र और राहु की ऊर्जा से प्रभावित होता है

आर्द्रा नक्षत्र वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में छठा नक्षत्र है। यह मिथुन राशि के 6°40' से 20°00' तक फैला है और इसका स्वामी ग्रह राहु है। आर्द्रा का अर्थ ‘नम’ या ‘अश्रु’ माना गया है। इसका प्रतीक आँसू, चमकता हीरा या पसीने की बूँद है। इसके अधिदेवता भगवान शिव के रुद्र रूप हैं, जो विनाश, परिवर्तन और शुद्धिकरण के प्रतीक हैं।
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| नक्षत्र क्रम | 6 (छठा) |
| राशि सीमा | मिथुन 6°40' – 20°00' |
| स्वामी ग्रह | राहु |
| अधिदेवता | रुद्र (शिव का उग्र रूप) |
| प्रतीक | आँसू, चमकता हीरा |
| तत्व | जल |
| शुभ अक्षर | कु, घ, ङ, छ |
| वृक्ष | फालसा |
| गण | मानव |
| लिंग | स्त्री |
आर्द्रा नक्षत्र भगवान रुद्र से संबंधित है। रुद्र का तांडव विनाश और पुनर्निर्माण का प्रतीक है। आँसू शुद्धिकरण और भावनात्मक गहराई का संकेत है। राहु जातक को रहस्य, अनूठापन और आंतरिक जागरण की ओर ले जाता है।
आर्द्रा नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता: रुद्र (शिव)
| पाद | डिग्री सीमा | नवांश राशि | स्वामी ग्रह | मुख्य गुण |
|---|---|---|---|---|
| पहला | 6°40' – 10°00' | धनु | बृहस्पति | मददगार, खोजी, भौतिक सुख |
| दूसरा | 10°00' – 13°20' | मकर | शनि | न्यायप्रिय, कुशल, भौतिकवादी |
| तीसरा | 13°20' – 16°40' | कुंभ | शनि | वैज्ञानिक, रचनात्मक |
| चौथा | 16°40' – 20°00' | मीन | बृहस्पति | संवेदनशील, दयालु, क्रोधी |
| क्षेत्र | अनुकूलता | कारण |
|---|---|---|
| विज्ञान, तकनीक, शोध | ★★★★★ | विश्लेषण क्षमता |
| मीडिया, पत्रकारिता | ★★★★☆ | संचार और रचनात्मकता |
| मनोविज्ञान, चिकित्सा | ★★★★☆ | संवेदनशीलता |
| राजनीति, कूटनीति | ★★★★☆ | रणनीति और बुद्धि |
| कला, फिल्म, लेखन | ★★★★☆ | रचनात्मकता |
| विषय | विवरण |
|---|---|
| नक्षत्र क्रम | 6 |
| राशि सीमा | मिथुन 6°40' – 20°00' |
| स्वामी ग्रह | राहु |
| अधिदेवता | रुद्र |
| प्रतीक | आँसू, चमकता हीरा |
| गुण | जिज्ञासा, विश्लेषण, परिवर्तन |
| करियर | विज्ञान, मीडिया, शोध |
| स्वास्थ्य | गला, फेफड़े |
| जीवनशैली | स्वतंत्रता, बदलाव |
आर्द्रा नक्षत्र जातक जीवन में परिवर्तन, खोज और गहराई का प्रतीक है। राहु और रुद्र के प्रभाव से इनमें साहस, विश्लेषण क्षमता और आत्म-परिवर्तन की शक्ति होती है। ये जातक नवाचार लाते हैं और भावनात्मक गहराई से जीवन को अर्थ देते हैं।
आर्द्रा नक्षत्र: आँसुओं की नमी से जीवन के नवपल्लव तक—परिवर्तन और शुद्धिकरण का वैदिक दीप।
1. आर्द्रा नक्षत्र का प्रतीक आँसू क्यों है?
क्योंकि यह शुद्धिकरण, परिवर्तन और भावनात्मक गहराई का प्रतिनिधित्व करता है।
2. राहु का प्रभाव जातक में कौन से गुण जगाता है?
जिज्ञासा, रहस्यप्रियता, विश्लेषण, असामान्यता और गहन सोच।
3. आर्द्रा जातक किन करियर में श्रेष्ठ होते हैं?
शोध, विज्ञान, तकनीक, मीडिया, पत्रकारिता और मनोविज्ञान।
4. स्वभाव में सबसे बड़ी चुनौती क्या रहती है?
भावनात्मक उतार-चढ़ाव, मूड स्विंग और असुरक्षा की भावना।
5. आर्द्रा नक्षत्र के लिए कौन सा वृक्ष शुभ माना गया है?
फालसा वृक्ष।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्रअनुभव: 25
इनसे पूछें: करियर, पारिवारिक मामले, विवाह
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि.
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