By पं. नरेंद्र शर्मा
जानिए वामन पुराण में वर्णित विष्णु के केशों में आर्द्रा नक्षत्र के स्थान की कथा, उसका दार्शनिक और ज्योतिषीय संदेश।

वामन पुराण में आर्द्रा नक्षत्र का संबंध भगवान विष्णु के केशों से बताया गया है। यह कथा ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से जीवनदायिनी नमी, शीतलता और ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतीक मानी जाती है। आर्द्रा नक्षत्र (मिथुन 6°40' से 20°00') का स्वामी राहु है और अधिष्ठाता रुद्र (शिव) हैं।
वामन पुराण के अनुसार जब भगवान विष्णु ने बलि से तीन पग भूमि माँगने के लिए वामन अवतार धारण किया, तब उनके विराट स्वरूप में:
| प्रतीक | दार्शनिक अर्थ |
|---|---|
| विष्णु के केश | ब्रह्मांडीय व्यवस्था और संतुलन |
| आर्द्रा की नमी | जीवनदायिनी ऊर्जा और पुनर्जनन |
| चमकता हीरा | चेतना में दिव्य ज्ञान |
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| स्रोत ग्रंथ | वामन पुराण |
| नक्षत्र स्थान | विष्णु के मुकुट के समीप केशों में |
| मुख्य प्रतीक | नमी, हीरा, शीतलता |
| ज्योतिषीय योगदान | ऊर्जा और संतुलन |
| मानव जीवन संदेश | शुद्धता, धैर्य और संतुलन |
आर्द्रा नक्षत्र की पौराणिक कथाएँ: वेद और पुराणों से प्रमुख विषय
वामन पुराण की यह कथा दर्शाती है कि आर्द्रा नक्षत्र विष्णु के केशों में स्थित होकर ब्रह्मांड में नमी, जीवन और संतुलन का संचार करता है। यह नक्षत्र जल, शीतलता और दिव्य ऊर्जा के महत्व को समझने का मार्ग दिखाता है।
1. वामन पुराण में आर्द्रा नक्षत्र का स्थान कहाँ बताया गया है?
आर्द्रा नक्षत्र विष्णु के मुकुट के पास स्थित केशों में विराजमान बताया गया है।
2. आर्द्रा नक्षत्र को नमी से क्यों जोड़ा गया है?
क्योंकि यह जीवनदायिनी वर्षा, भावनात्मक शुद्धि और पुनर्जनन का प्रतीक है।
3. आर्द्रा नक्षत्र का अधिदेवता कौन है?
रुद्र (शिव का उग्र रूप)।
4. इस कथा का मुख्य संदेश क्या है?
जीवन में संतुलन, शुद्धता और ऊर्जा का संरक्षण आवश्यक है।
5. ज्योतिष में आर्द्रा नक्षत्र का महत्व क्या है?
यह परिवर्तन, संवेदनशीलता, शोध और भीतर के जागरण का प्रतीक माना जाता है।
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