By अपर्णा पाटनी
जानिए अश्विनी कुमारों की उत्पत्ति, चिकित्सा चमत्कार, आध्यात्मिक महत्व और जीवन में उनके प्रेरक संदेश

आकाश में उगती हुई पहली आभा जब रात के मौन को चीरती है तब मनुष्य को यह अनुभव होता है कि जीवन में हर अंधकार का एक अंत है और हर अंत के भीतर एक नई शुरुआत की संभावना भी छुपी है। वैदिक परंपरा में यह उषा का क्षण केवल प्रकृति का परिवर्तन नहीं माना गया बल्कि इसे नवजीवन का संदेश माना गया। इसी संदेश को देवत्व के रूप में अभिव्यक्त करते हैं अश्विनी कुमार जिन्हें वैदिक संस्कृति में दिव्य चिकित्सक, आरोग्यदाता और पुनरुत्थान की शक्ति का प्रथम प्रतीक कहा गया है। इनके स्वरूप में जीवन की गति, उपचार की प्रक्रिया और नवजीवन की आशा को एक साथ देखा जाता है।
अश्विनी कुमारों के जन्म का वर्णन वेदों में अत्यंत सुंदर रूप में मिलता है। सूर्य देव और संज्ञा के संबंध से उत्पन्न इन दिव्य जुड़वां देवताओं को स्वर्ग लोक के पुत्र कहा गया। एक पुरानी कथा बताती है कि सूर्य और संज्ञा ने घोड़े का रूप धारण किया और उसी रूप में इन जुड़वां भाइयों का जन्म हुआ। इसी कारण उन्हें अश्विन कहा गया जो घोड़े के समान गति शक्ति और जीवंतता का प्रतीक है। वैदिक साहित्य में इनके लिए अनेक विशेषण मिलते हैं जिनसे इनके चरित्र की गहराई प्रकट होती है।
इनके दो नाम नासत्य और दस्र माने जाते हैं। नासत्य का अर्थ है सत्य के निकट रहने वाला और दस्र का अर्थ है दाता। दोनों भाई सुनहरे कवच धारण करते हैं और प्रकाशमान रथ पर आरूढ़ होकर देवताओं और मानवों के कल्याण के लिए विचरण करते हैं। इनके रथ को तीन पहियों वाला बताया गया है जो त्रिगुणों का प्रतीक माना जाता है। इनके साथ उड़ते हुए पक्षियों की उपस्थिति इन्हें प्रभात का अग्रदूत बनाती है क्योंकि इनके आगमन के साथ अंधकार के बाद प्रकाश का उदय होता है।
ऋग्वेद में इनके लिए सत्तावन से अधिक सूक्त समर्पित हैं जो वैदिक युग में इनके महत्व को स्पष्ट करते हैं। इन सूक्तों में इनके अद्भुत चिकित्सा कार्य चमत्कारी शक्ति और रोगनाशक विद्या का विस्तृत वर्णन मिलता है। वेदों में यह भी कहा गया है कि अश्विनी कुमार वेदांत की उस चेतना का प्रतिनिधित्व करते हैं जो जीवन के भीतर छिपी हुई पुनरुत्थान शक्ति को जागृत करती है। इनकी आराधना से रोगों का निवारण होता है और मनुष्य को नवजीवन प्राप्त होता है।
एक कथा में ये अंधकार में गिरे व्यक्ति को बचाते हैं। एक अन्य कथा में वे नेत्रहीन को दृष्टि प्रदान करते हैं। एक असाधारण वर्णन में वे वृद्ध को पुनः यौवन प्रदान करते हैं। एक प्रसंग में वे मृत व्यक्ति को पुनर्जीवित करते हैं। यह उल्लेख वास्तविक शल्य चिकित्सा से कहीं बढ़कर आध्यात्मिक पुनरुत्थान का संकेत देता है जो वेदों की गहराई में निहित है।
अश्विनी नक्षत्र की पौराणिक उत्पत्ति: सूर्य, संज्ञा और अश्विनी कुमारों की जन्मकथा
कथा है कि युद्ध में वीरांगना विश्पला का पैर कट गया। अश्विनी कुमारों ने उसे लोहे का कृत्रिम पैर प्रदान किया जिससे वह फिर से युद्धभूमि में वापस लौटी। यह अद्भुत प्रसंग आधुनिक कृत्रिम अंगों और अंग प्रतिस्थापन की अवधारणा का एक वैदिक प्रतीक माना गया।
इन्होंने दधीचि को घोड़े का सिर प्रदान किया ताकि वे अत्यंत कठोर तपस्या के दौरान अपनी रक्षा कर सकें। यह प्रसंग मानसिक शक्ति और एकाग्रता की महत्ता का प्रतीक है।
वेदों में वर्णित यह प्रसंग बताता है कि अश्विनी कुमारों ने गहरे समुद्र में डूबते हुए भुज्यु को अपने रथ पर बैठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। यह घटना संकट से मुक्ति के दैवीय रूप का एक सुंदर उदाहरण है।
एक अन्य कथा में अश्विनी कुमार वंधना नामक व्यक्ति को मृत्यु से वापस लाते हैं। यह कथा मनुष्य की आंतरिक शक्ति और अदृश्य जीवन ऊर्जा को दर्शाती है।
इन सभी कथाओं में एक समान तत्व दिखाई देता है। यह तत्व है पुनर्जीवन की शक्ति और यह विश्वास कि जीवन में कोई भी स्थिति अंतिम नहीं होती।
वेदों में अश्विनी कुमारों को उषा का अग्रदूत कहा गया है। जब उषा का रथ आकाश में फैलता है तब उसके पहले जो प्रकाश द्रव्य चलता है उसे अश्विनी कुमारों का प्रकाश माना गया है। यह प्रकाश मनुष्य की चेतना में वह संदेश भरता है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा हो पर उसके पार उजाला अवश्य है। इनका संबंध मधु और सोम से भी बताया गया है। मधु जीवन की मिठास का प्रतीक है और सोम स्वास्थ्य और शक्ति का।
अश्विनी नक्षत्र का अधिष्ठाता अश्विनी कुमार हैं इसलिए इस नक्षत्र में जन्मे लोगों के स्वभाव में भी इनकी दिव्य ऊर्जा झलकती है।
अश्विनी नक्षत्र तेजप्रद ऊर्जा, आरंभ की शक्ति और उपचार के गुण के लिए प्रसिद्ध है।
इस नक्षत्र के जातक स्वभाव से साहसी होते हैं और नई शुरुआत करने में अग्रणी रहते हैं।
इनमें नेतृत्व का स्वभाव देखा जाता है और कई बार वे दूसरों को प्रेरित भी करते हैं।
ज्योतिष में यह नक्षत्र केतु से संबंधित माना गया है जो आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और रहस्यबोध का ग्रह है। इसलिए अश्विनी जातक बाहरी जीवन में सक्रिय होने के साथ साथ भीतर की दुनिया में भी गहराई से उतरते हैं। इस नक्षत्र का रंग लाल माना गया है और दिशा पूर्व जिसे नई शुरुआत का मार्ग माना जाता है।
| तत्व | आध्यात्मिक संकेत |
|---|---|
| घोड़े का सिर | गति, शक्ति और नई शुरुआत |
| सुनहरा कवच | सुरक्षा और दिव्यता |
| तीन पहियों वाला रथ | त्रिगुणों की एकता |
| उषा के अग्रदूत | अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा |
| मधु और सोम | जीवन ऊर्जा और आरोग्य |
इन प्रतीकों में वह संदेश छुपा है कि मनुष्य को जीवन में स्थिर नहीं रहना चाहिए बल्कि निरंतर बढ़ते रहना चाहिए। उपचार की प्रक्रिया भी यही कहती है कि शरीर और मन की मरम्मत धीरे धीरे परंतु निरंतर होती है।
अश्विनी कुमार समाज को यह प्रेरणा देते हैं कि उपचार केवल औषधि का कार्य नहीं है बल्कि करुणा धैर्य और सकारात्मकता की प्रक्रिया है।
यह संदेश आज भी वैसा ही प्रासंगिक है जैसा वैदिक काल में था।
मनुष्य जब अपने कठिन समय से गुजरता है तब उसे यही शक्ति मार्ग दिखाती है कि उपचार की शुरुआत भीतर से होती है।
इसलिए अश्विनी कुमारों की उपासना केवल शारीरिक रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है बल्कि यह मानसिक शक्ति को भी जागृत करती है।
अश्विनी कुमारों के लिए वैदिक मंत्रों का जाप मन को स्थिर करता है।
इनके लिए प्रसिद्ध मंत्र है
ॐ अश्विनीकुमाराभ्यां नमः
या
ॐ अश्विनीकुमाराय नमः
इन मंत्रों का जाप उपचार के समय मन में विश्वास उत्पन्न करता है और जीवन ऊर्जा को सक्रिय करता है।
अश्विनी कुमार यह सिखाते हैं कि मनुष्य में गहरी छिपी हुई शक्ति किसी कठिन परिस्थिति में फिर से जीवन का मार्ग खोल सकती है।
वे यह भी बताते हैं कि कठिनाई के बाद नई शुरुआत संभव है और हर नए प्रयास में पुनर्जीवन की संभावना छुपी होती है।
इसीलिए इन्हें नवजीवन के प्रथम देवता कहा गया है।
इनकी कथा एक आश्वासन है कि जहां जीवन है वहां उपचार है और जहां उपचार है वहां नवजीवन है।
अश्विनी कुमारों को देवताओं का चिकित्सक क्यों कहा गया है
क्योंकि वे रोग निवारण पुनर्जीवन और शारीरिक मानसिक शक्ति प्रदान करने में सक्षम माने गए हैं।
वेदों में इनके कितने सूक्त मिलते हैं
ऋग्वेद में इनके लिए सत्तावन से अधिक सूक्त मिलते हैं जो उनके महत्व को दर्शाते हैं।
इनका संबंध घोड़े के सिर से क्यों है
घोड़े का सिर गति शक्ति जीवंतता और आरंभ की ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।
कौन सा मंत्र इनके लिए उपयुक्त माना गया है
ॐ अश्विनीकुमाराभ्यां नमः और ॐ अश्विनीकुमाराय नमः।
अश्विनी नक्षत्र से इनका क्या संबंध है
वे इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता हैं और इस नक्षत्र में जन्मे जातकों के स्वभाव में भी इनकी ऊर्जा परिलक्षित होती है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्रअनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, मुहूर्त
इनके क्लाइंट: म.प्र., दि.
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