By अपर्णा पाटनी
जानिए अश्विनी नक्षत्र की दिव्य उत्पत्ति की प्राचीन कथा, उनके प्रतीक, गुण, वैदिक महत्व और जीवन पर प्रभाव

आकाश में उगती पहली किरण जिस प्रकार जीवन को नई दिशा देती है उसी प्रकार अश्विनी नक्षत्र भी वैदिक ज्योतिष में आरंभ गति और नवजीवन का पहला संकेत माना जाता है। इस नक्षत्र की गूढ़ महिमा केवल ज्योतिष में ही सीमित नहीं रहती क्योंकि इसकी जड़ें एक ऐसी कथा से जुड़ी हैं जो सूर्य की प्रचंडता संज्ञा की तपस्या और अश्विनी कुमारों के अद्भुत जन्म को एक सूत्र में पिरोती है। यह कथा नवजीवन उपचार और पुनरुत्थान की वह परंपरा सामने लाती है जिसने भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य और ऊर्जा को दिव्य आयाम प्रदान किया।
संज्ञा अत्यंत कोमल स्वभाव वाली थीं इसलिए सूर्य के तेज को अधिक समय तक सहन न कर सकीं। उन्होंने अपनी छाया को सूर्य के पास छोड़ दिया और साधना के लिए पृथ्वी पर चली गईं। छाया ने सूर्य की सेवा की और उनसे संतान भी उत्पन्न हुई परंतु सूर्य को संज्ञा के अप्रत्याशित लोप पर आशंका बढ़ती गई और अंततः वे सत्य की खोज में निकल पड़े।
संज्ञा उस समय उत्तरकुरु प्रदेश में तपस्या कर रही थीं और घोड़ी का रूप धारण कर चुकी थीं। उनका यह रूप गहन तप और अग्नि समान धैर्य का प्रतीक था। सूर्य को जब यह बात ज्ञात हुई तो उन्होंने भी अश्व का रूप लिया और संज्ञा के समीप पहुँचे। इसी मिलन से जन्म हुआ एक अद्भुत युगल का जो दिव्य चिकित्सा के जनक बने।
अश्विनी कुमार: वैदिक चिकित्सा, दिव्यता और नवजीवन के प्रतीक
अश्विनी कुमारों का जन्म पूर्णतः विशिष्ट था। उनका धड़ मानवीय था और मुख अश्व का। यह रूप वेग शक्ति और अनंत गति का संदेश देता है। वैदिक ग्रंथों में उल्लेख है कि वे अपनी इच्छा से अश्व मुख को त्याग कर मानव रूप धारण कर सकते थे। इस अद्वितीय क्षमता ने उन्हें देवों के बीच असाधारण बनाया।
दो जुड़वां भाइयों के नाम हैं नासत्य और दश्र। नासत्य सत्य और उपचार के प्रतीक माने जाते हैं और दश्र सेवा करुणा और नवजीवन की दिव्यता को दर्शाते हैं। दोनों ने देव चिकित्सक का पद प्राप्त किया और देवयुद्धों में घायल देवताओं के लिए अमृत समान उपचार लेकर प्रकट होते रहे।
ऋग्वेद में अश्विनी कुमारों के लिए अनेक सूक्त मिलते हैं जिनमें उनके चिकित्सा कार्यों का अत्यंत विस्तार से वर्णन है। वे नेत्रहीनों को दृष्टि देते थे वृद्धों को यौवन प्रदान करते थे और मृत्यु के समीप व्यक्ति में नई ऊर्जा भर देते थे। ऋषि दधीचि के लिए विशेष उपचार, विश्पला को धातु का नया अंग देना, भुज्यु को समुद्र से बचाना, अत्रि को पृथ्वी की दरार से निकालना ऐसे अनेक उल्लेख वेदों में वर्णित हैं।
इन उदाहरणों के भीतर केवल चमत्कार का वर्णन नहीं मिलता क्योंकि यह कथा उस वैदिक परंपरा का संकेत भी है जिसमें जीवन के प्रत्येक स्तर पर नवजीवन को संभव माना गया है।
अश्विनी नक्षत्र राशि चक्र का प्रथम नक्षत्र है और मेष राशि के प्रथम अंशों से शुरू होता है। इस नक्षत्र की ऊर्जा मनुष्य को साहस पुनरुत्थान और आरंभ के लिए प्रेरित करती है। इसका अधिष्ठाता देवता अश्विनी कुमार हैं और स्वामी ग्रह केतु है जो अंतर्ज्ञान आध्यात्मिकता और सूक्ष्म शक्तियों की ओर मन को ले जाता है।
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| नक्षत्र क्रम | 1 |
| राशि | मेष |
| डिग्री सीमा | 0°00' से 13°20' |
| स्वामी ग्रह | केतु |
| देवता | अश्विनी कुमार |
| प्रतीक | अश्व का सिर |
| शक्ति | आरंभ गति उपचार नवजीवन |
| शुभ अक्षर | चु चे चो ला |
अश्विनी नक्षत्र में जन्मे लोग तेजस्वी, आकर्षक, ऊर्जावान और नवाचार प्रिय होते हैं। इनमें आरंभ करने की अद्भुत क्षमता होती है और कई बार इन्हें उपचारक प्रवृत्ति भी प्राप्त होती है जो इनकी मूल आध्यात्मिक जड़ है।
अश्विनी कुमारों के जन्म की कथा केवल एक पौराणिक प्रसंग नहीं क्योंकि यह आरंभ और गति के उस आध्यात्मिक सूत्र को प्रकट करती है जो जीवन में ठहराव को तोड़ कर नई दिशा देता है। घोड़े का सिर उस वेग का प्रतीक है जो संकल्प को क्रिया में बदल देता है। सूर्य और संज्ञा का तप तथा अश्विनी कुमारों की जन्म लीला इस नक्षत्र को नवजीवन का प्रथम द्वार बनाती है।
अश्विनी नक्षत्र का प्रतीक घोड़े का सिर क्यों माना जाता है
क्योंकि अश्विनी कुमारों का जन्म अश्व रूप से हुआ था और घोड़ा गति, शक्ति और आरंभ का प्रतीक है।
अश्विनी कुमारों को देव चिकित्सक क्यों कहा गया है
क्योंकि वे रोगों को दूर करने, अंग पुनः स्थापित करने और घायल देवताओं को स्वस्थ करने में सक्षम थे।
सूर्य संज्ञा और अश्विनी नक्षत्र का संबंध क्या दर्शाता है
यह कथा नवजीवन, ऊषा, उपचार और तेजस्विता का प्रतीक है जो नक्षत्र की मुख्य ऊर्जा है।
अश्विनी नक्षत्र में जन्म लेने वालों में कौन से गुण प्रमुख होते हैं
ऊर्जा, साहस, आकर्षण, त्वरित निर्णय क्षमता और उपचारक प्रवृत्ति।
क्या अश्विनी नक्षत्र शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है
हाँ क्योंकि यह आरंभ और गति का नक्षत्र है इसलिए नई शुरुआत, यात्रा और चिकित्सा कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।
सूर्य राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी सूर्य राशिअनुभव: 15
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इनके क्लाइंट: म.प्र., दि.
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