By पं. संजीव शर्मा
जानिए मृगशिरा नक्षत्र से जुड़ी पौराणिक कथाएं, स्वभाव, करियर और जीवन के गूढ़ रहस्य

मृगशिरा नक्षत्र (मृग + शिरा = हिरण का सिर) वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में पाँचवाँ नक्षत्र है। यह वृषभ 23°20' से मिथुन 6°40' तक फैला है। इसका स्वामी ग्रह मंगल है और अधिदेवता सोम (चंद्रमा) हैं। मृगशिरा का प्रतीक हिरण का सिर है, जो जिज्ञासा, खोज, चंचलता और अन्वेषण का प्रतिनिधित्व करता है।
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| नक्षत्र क्रम | 5 (पाँचवाँ) |
| राशि सीमा | वृषभ 23°20' - मिथुन 6°40' |
| स्वामी ग्रह | मंगल |
| अधिदेवता | सोम (चंद्रमा) |
| प्रतीक | हिरण का सिर |
| तत्व | पृथ्वी |
| गण | देव |
| योनि | सर्प (पुरुष सर्प) |
| शुभ अक्षर | वे, वो, का, की |
| वृक्ष | खैर |
| रंग | सिल्वर ग्रे |
वैदिक साहित्य के अनुसार, ब्रह्मा अपनी मानस पुत्री सरस्वती पर मोहित हो गए। सरस्वती ने मादा हिरण का रूप धारण कर आकाश में पलायन किया। ब्रह्मा भी हिरण बनकर पीछे गए। इस अनुचित पीछा से क्रोधित शिव ने ब्रह्मा पर बाण चलाया। आकाश में हिरण का सिर स्थिर हो गया और वही मृगशिरा नक्षत्र कहलाया।
शिव का बाण आज भी आर्द्रा नक्षत्र के रूप में इसका पीछा करता है।
ब्रह्मा, सरस्वती और हिरण का सिर (मृगशिरा): एक पौराणिक कथा और उसका वैदिक रहस्य
| लिंग | विशेषताएँ |
|---|---|
| पुरुष | लंबा कद, मजबूत कंधे, तीक्ष्ण नेत्र, आकर्षक व्यक्तित्व |
| महिला | सुंदर दांत, छरहरा शरीर, प्रभावशाली अभिव्यक्ति |
| क्षेत्र | अनुकूलता | कारण |
|---|---|---|
| साहित्य व लेखन | ★★★★★ | कल्पनाशीलता |
| अनुसंधान व विज्ञान | ★★★★☆ | खोजी स्वभाव |
| कला व संगीत | ★★★★☆ | सौंदर्यबोध |
| यात्रा और पर्यटन | ★★★★☆ | नए अनुभवों की चाह |
| शिक्षण व प्रशिक्षण | ★★★★☆ | संवाद क्षमता |
संवेदनशील अंग: पाचन तंत्र, गला, कंधे
सुझाव: ध्यान, योग, हल्का भोजन, व्यायाम
| आयु | महत्व |
|---|---|
| 20-30 वर्ष | करियर और विवाह की शुरुआत |
| 32 वर्ष | पेशेवर उत्कृष्टता |
| 33-55 वर्ष | आर्थिक स्थिरता |
| 50+ वर्ष | आध्यात्मिक झुकाव |
“हिरण की तरह खोजो, ऋषि की तरह सीखो।”
मृगशिरा हमें सिखाता है कि जीवन की खोज भीतर है, बाहर नहीं।
कल्पना को लक्ष्य में बदलना ही सच्ची सिद्धि है।
1. मृगशिरा नक्षत्र का मुख्य स्वभाव क्या है?
जिज्ञासा, खोज, कल्पनाशीलता और मानसिक चंचलता।
2. इस नक्षत्र के स्वामी ग्रह कौन हैं?
मंगल, जबकि अधिदेवता सोम (चंद्रमा) हैं।
3. मृगशिरा जातक किन करियर में सफल होते हैं?
लेखन, कला, अनुसंधान, पर्यटन, शिक्षा।
4. मृगशिरा नक्षत्र का पौराणिक आधार क्या है?
ब्रह्मा-सरस्वती कथा और शिव द्वारा दिया गया दंड।
5. किस आयु में जीवन का प्रमुख परिवर्तन आता है?
32 वर्ष और 33-55 के बीच स्थिरता का समय।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
अनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, आध्यात्मिकता और कर्म
इनके क्लाइंट: दि., उ.प्र., म.हा.
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