By पं. अमिताभ शर्मा
यह वैदिक कथा प्रेम, धर्म, न्याय और बुद्धि के जन्म की गूढ़ व्याख्या प्रस्तुत करती है

वैदिक साहित्य और पुराणों में वर्णित सोम, तारा और बृहस्पति की कथा न केवल एक रोचक आख्यान है, बल्कि यह प्रेम, धर्म, न्याय और बुद्धि के जन्म का गहरा प्रतीक भी है। यह कथा हमें बताती है कि जीवन के जटिल संबंधों में भी अंततः धर्म और ज्ञान की विजय होती है।
बृहस्पति, देवताओं के गुरु और धर्म के प्रतीक, की पत्नी तारा अत्यंत रूपवती और बुद्धिमती थीं। तारा चंद्रदेव सोम से आकर्षित हो गईं और सोम भी उनसे प्रेम करने लगे। यह भावनात्मक आकर्षण इतना प्रबल हुआ कि तारा बृहस्पति को छोड़कर सोम के पास चली गईं।
तारा के चले जाने से देवलोक में हलचल मच गई। बृहस्पति ने देवताओं से सहायता माँगी। दूसरी ओर सोम को दानवों का सहारा था। इस कारण देव-दानव युद्ध छिड़ गया और सृष्टि असंतुलित होने लगी।
जब संघर्ष असहनीय हो गया तो ब्रह्मा ने हस्तक्षेप किया। तारा से पूछा गया कि वह किससे प्रेम करती हैं। तारा ने स्वीकार किया कि वह सोम से प्रेम करती हैं और उनके गर्भ में सोम का ही पुत्र है। ब्रह्मा ने तारा को बृहस्पति के पास लौटने का आदेश दिया और तारा ने आदेश का पालन किया।
तारा ने बृहस्पति के घर एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। इस पुत्र का नाम बुद्ध रखा गया। बुद्ध आगे चलकर विवेक, कौशल और ज्ञान के प्रतीक बने। बुद्ध का जन्म इस कथा में संघर्ष के बाद ज्ञान के उदय का महत्व दर्शाता है।
| पात्र | प्रतीकात्मक अर्थ |
|---|---|
| सोम | मन, भावनाएँ, कामना |
| तारा | बुद्धि, विवेक, मार्गदर्शन |
| बृहस्पति | धर्म, नैतिकता, ज्ञान |
| बुद्ध | विवेक, करुणा, आत्मज्ञान |
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यह कथा बताती है कि:
"तारा की वापसी और बुद्ध का जन्म याद दिलाता है कि अंधकार के बाद ही प्रकाश आता है।"
1. तारा सोम के साथ क्यों गईं?
क्योंकि वह सोम से प्रेम करने लगी थीं और भावनात्मक रूप से उनसे जुड़ गईं।
2. देव-दानव संघर्ष क्यों हुआ?
तारा के जाने के कारण बृहस्पति और सोम के बीच विवाद बढ़ा और दोनों को अपने-अपने समर्थक मिले जिससे युद्ध हुआ।
3. बुद्ध का पिता कौन माना जाता है?
जन्म के समय तारा बृहस्पति के घर थीं, परंतु जैविक रूप से बुद्ध सोम के पुत्र माने जाते हैं।
4. इस कथा का मुख्य संदेश क्या है?
संघर्षों के बाद ज्ञान और विवेक का उदय होता है और धर्म अंततः स्थापित होता है।
5. यह कथा ज्योतिष से कैसे जुड़ी है?
सोम चंद्रमा के रूप में मन और भावों के कारक हैं जबकि बृहस्पति ज्ञान और धर्म के; बुद्ध का जन्म दोनों के संतुलन का प्रतीक है।
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