By पं. अमिताभ शर्मा
विनाश, आत्मपरिवर्तन और पुनर्जागरण का ज्योतिषीय प्रतीक

वैदिक ज्योतिष विज्ञान में मूल नक्षत्र का विशेष महत्व है। यह सत्ताईस नक्षत्रों में उन्नीसवाँ नक्षत्र है और धनु राशि के पहले चरण को प्रभावित करता है। इसका विस्तार शून्य अंश शून्य कला से लेकर तेरह अंश बीस कला तक है। इस नक्षत्र का नाम मूल अपने आप में इसके गहन अर्थ को प्रकट करता है। मूल का अर्थ है जड़। यह नक्षत्र जीवन के सबसे मौलिक पहलुओं का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ सतह पर दिखाई देने वाली चीजों को हटाकर वास्तविक सत्य और नींव को उजागर किया जाता है। मूल नक्षत्र वह खगोलीय द्वार है जहाँ से अस्तित्व अपनी गहरी जड़ों की खोज करता है और जहाँ विनाश के माध्यम से नवीनीकरण और आत्मिक उत्थान आरंभ होता है।
यह नक्षत्र जीवन और मृत्यु, विनाश और सृजन तथा परिवर्तन और पुनर्जन्म का दैवी प्रतीक है। इसकी ऊर्जा जातकों से अपेक्षा करती है कि वे सतही घटनाओं या संबन्धों से परे जाकर अपनी आत्मा, अपने मूल कारणों और जीवन की सच्चाई को देखें और उसे स्वीकार करें।
मूल नक्षत्र की अधिदेवता हैं निर्ऋति देवी। वैदिक पौराणिक ग्रंथों में निर्ऋति का संबंध विनाश, मृत्यु और विघटन से बताया गया है। वे मृत्यु को भय नहीं बल्कि पवित्र मार्ग मानती हैं। उनका कार्य है पुराने और सड़े-गले तत्त्वों को नष्ट कर देना ताकि सृजन को नया अवसर मिले। इस प्रकार वे जीवन में मृत्यु और पुनर्जन्म के सत्य को स्थापित करती हैं।
इस नक्षत्र के ग्रहस्वामी हैं केतु, जिन्हें मोक्षकारक कहा जाता है। केतु का स्वभाव है, आध्यात्मिकता, वैराग्य, गूढ़ विज्ञान, रहस्यों की खोज और गहन अंतर्ज्ञान। केतु जातकों के जीवन को हमेशा भटकाव से निकालकर आत्मगौरव और आत्मोत्थान की ओर धकेलता है। इससे जातक जीवन में रहस्यमयी अनुभवों, अद्वितीय घटनाओं और अप्रत्याशित परिवर्तनों से गुजरते हैं।
निर्ऋति और केतु का मेल इस नक्षत्र को अत्यंत शक्तिशाली और रहस्यमयी बनाता है। यह जातकों को आत्म-दर्शन, परिवर्तन और नवीनीकरण का गहन मार्ग दिखाता है।
मूल नक्षत्र गंडान्त बिंदु पर स्थित है। गंडान्त का अर्थ है, जहाँ जल तत्व समाप्त होता है और अग्नि तत्व प्रारम्भ होता है। यह स्थान अत्यधिक शक्तिशाली और कर्मिक बंधनों से भरा होता है। यहाँ जन्म लेने वालों को जीवन में भारी संघर्ष, गहन परिवर्तन और कठिन कर्मिक पाठ मिलते हैं। परंतु यही संघर्ष इन्हें अपनी आत्मा की जड़ों से जोड़कर ऊँचाई की ओर ले जाता है।
मूल नक्षत्र जातक जीवन के कई क्षेत्रों में विशेष रूप से सफल हो सकते हैं।
मूल नक्षत्र जातक अपने रिश्तों में गहरी निष्ठा रखते हैं। वे अपने साथी के प्रति वफादार और समर्पित रहते हैं, लेकिन कभी-कभी अत्यधिक अधिकार और नियंत्रण प्रवृत्ति संबंधों में तनाव डाल सकती है।
मूल नक्षत्र जातक प्रायः वात दोष प्रधान होते हैं। इसका अर्थ है कि इनका शरीर तनाव, चिंता और तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ियों से ग्रसित होने की संभावना रखता है।
| विशेषता | विस्तृत विवरण |
|---|---|
| नक्षत्र विस्तार | 0°00′ - 13°20′ धनु राशि |
| प्रतीक | जड़ों की गठरी, सिंह की पूंछ और लाल गिद्ध |
| अधिदेवता | देवी निर्ऋति, मृत्यु और नवीनीकरण की प्रतीक |
| ग्रह स्वामी | केतु, मोक्ष का सूचक ग्रह |
| लिंग | तटस्थ |
| गुण | तामसिक, जो जड़ता और परिवर्तन दोनों को दर्शाता है |
| तत्व | वायु, जो गति और मानसिक क्षमता का प्रतीक है |
| पशु प्रतीक | नर कुत्ता, जो वफादारी और सुरक्षा का प्रतीक है |
| बीज ध्वनि | ये, यो, बा, बी |
| शुभ रंग | पीला-भूरा और क्रीम |
| शुभ रत्न | लहसुनिया (कैट्स आई) |
| शुभ अंक | 3 और 7 |
| शुभ दिन | शनिवार, मंगलवार और बुधवार |
मूल नक्षत्र बताता है कि विनाश केवल अंत नहीं बल्कि नए आरंभ की ओर ले जाने वाला माध्यम है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक जीवन भर गहन चुनौतियों का सामना करते हैं लेकिन साथ ही उनमें उन्हें पार करने की क्षमता भी रहती है। उनका प्रत्येक संघर्ष उन्हें नया आकार देता है और उन्हें आत्मिक दृष्टि और दैवीय ज्ञान का साक्षात्कार कराता है। विनाश का अर्थ यहाँ है पुराने, गलत और अहंकारी स्वरूप को त्यागना और पुनर्जन्म लेना एक शुद्ध, गहन और सशक्त आत्मा के रूप में।
प्रश्न 1: मूल नक्षत्र किस राशि में आता है और इसका विस्तार कितना है?
उत्तर: मूल नक्षत्र धनु राशि में आता है और इसका विस्तार 0°00′ से 13°20′ अंश तक है।
प्रश्न 2: मूल नक्षत्र के अधिदेव और ग्रहस्वामी कौन हैं?
उत्तर: अधिदेव देवी निर्ऋति हैं जो मृत्यु और पुनर्जन्म का मार्ग देती हैं और ग्रह स्वामी केतु है।
प्रश्न 3: मूल नक्षत्र जातकों की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर: ये शोधप्रिय, धैर्यवान, भावनात्मक रूप से गहरे, आध्यात्मिक झुकाव वाले और सदैव मूल सत्य की खोज में रहते हैं।
प्रश्न 4: करियर में इन जातकों के लिए कौन-कौन से क्षेत्र अनुकूल हैं?
उत्तर: औषधीय विज्ञान, सर्जरी, गूढ़ अध्ययन, शोध, कला, मॉडलिंग, सामाजिक सुधार और ज्योतिष इनके लिए उत्कृष्ट हैं।
प्रश्न 5: स्वास्थ्य संबंधी कौन से उपाय विशेष लाभकारी होते हैं?
उत्तर: आयुर्वेदिक उपचार, योग, ध्यान, प्राणायाम तथा लहसुनिया रत्न धारण करना इनके लिए शुभ है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
अनुभव: 32
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इनके क्लाइंट: छ.ग., उ.प्र., म.प्र., दि.
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