By अपर्णा पाटनी
रचनात्मकता, आध्यात्मिकता और नवीनीकरण का प्रतीक है पुनर्वसु नक्षत्र-जानिए इसके जातकों की खूबियाँ और चुनौतियाँ

पुनर्वसु नक्षत्र वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में सातवां स्थान रखता है। इसका विस्तार मिथुन 20°00' से कर्क 3°20' तक है। इसके स्वामी बृहस्पति हैं और अधिष्ठाता देवी अदिति मानी जाती हैं। पुनर्वसु का अर्थ है “पुनः शुभ” या “प्रकाश की वापसी” जो नवीनीकरण, आशा, समृद्धि और आंतरिक शक्ति का प्रतीक है। इसका प्रतीक तरकश है, जो नए प्रयास, दृढ़ संकल्प और जीवन में बार-बार उठ खड़े होने की क्षमता को दर्शाता है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| नक्षत्र क्रम | 7 (सातवां) |
| राशि सीमा | मिथुन 20°00' – कर्क 3°20' |
| स्वामी ग्रह | बृहस्पति |
| अधिष्ठाता देवी | अदिति |
| प्रतीक | तरकश |
| तत्व | वायु |
| शुभ रंग | पीला |
| शुभ रत्न | पुखराज |
| पशु प्रतीक | बिल्ली |
पुनर्वसु का अर्थ है "पुनः शुभ" अर्थात कठिनाइयों के बाद फिर से प्रकाश, स्थिरता और सकारात्मकता का लौट आना। देवी अदिति की कृपा से यह नक्षत्र संरक्षक ऊर्जा, मातृत्व और विस्तार का प्रतीक है। ग्रंथों में वर्णन है कि भगवान श्रीराम का जन्म भी पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ, इसलिए यह और भी पवित्र माना जाता है।
श्रीराम का जन्म और पुनर्वसु नक्षत्र: आशा, पुनरुत्थान और धर्म की अमर गाथा
| पाद | नवांश राशि | स्वामी ग्रह | मुख्य गुण |
|---|---|---|---|
| पहला | मेष | मंगल | ऊर्जा, साहस, नेतृत्व |
| दूसरा | वृषभ | शुक्र | रचनात्मकता, स्थिरता |
| तीसरा | मिथुन | बुध | बुद्धिमत्ता, संचार |
| चौथा | कर्क | चंद्रमा | संवेदनशीलता, पोषण |
| क्षेत्र | अनुकूलता | कारण |
|---|---|---|
| शिक्षा, शोध | ★★★★★ | जिज्ञासा और ज्ञान |
| कला, लेखन | ★★★★☆ | रचनात्मकता |
| मीडिया और संचार | ★★★★☆ | अभिव्यक्ति कौशल |
| व्यवसाय, वित्त | ★★★★☆ | विश्लेषण क्षमता |
| चिकित्सा, सेवा | ★★★★☆ | दया व संवेदनशीलता |
| विज्ञान, अनुसंधान | ★★★★☆ | विस्तारवादी सोच |
| विषय | विवरण |
|---|---|
| प्रमुख गुण | नवीनीकरण, आशा, रचनात्मकता |
| करियर | शिक्षा, कला, विज्ञान |
| स्वास्थ्य | तंत्रिका तंत्र, पाचन |
| जीवनशैली | संतुलन, साधना |
पुनर्वसु नक्षत्र जीवन में बार-बार उभरने वाली सकारात्मक ऊर्जा, आशा और प्रकाश का प्रतीक है। यह नक्षत्र सिखाता है कि हर चुनौती के बाद एक नया अध्याय खुलता है और हर अंधकार के बाद प्रकाश अवश्य लौटता है।
1. पुनर्वसु नक्षत्र का मूल अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है “पुनः शुभ” यानी कठिनाइयों के बाद फिर से उजाला और सकारात्मकता का लौट आना।
2. इसका अधिष्ठाता कौन है?
अदिति देवी, जो देवताओं की माता हैं।
3. इस नक्षत्र में जन्मे जातक कैसे होते हैं?
रचनात्मक, अनुकूलनीय, संवेदनशील और आशावादी।
4. कौन-से करियर इनके लिए श्रेष्ठ हैं?
शिक्षा, लेखन, मीडिया, विज्ञान और सेवा।
5. कौन-से उपाय लाभदायक माने जाते हैं?
योग, ध्यान, पीला रंग, पुखराज रत्न और अदिति देवी की उपासना।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्रअनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, मुहूर्त
इनके क्लाइंट: म.प्र., दि.
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