By पं. अभिषेक शर्मा
जानिए कैसे पुनर्वसु नक्षत्र के चार पाद जातक के स्वभाव, करियर, स्वास्थ्य और रिश्तों को अलग-अलग रूप देते हैं

पुनर्वसु नक्षत्र (मिथुन 20°00' से कर्क 3°20') वैदिक ज्योतिष का सातवाँ नक्षत्र है, जिसका अर्थ है "पुनः शुभ" या "प्रकाश की वापसी"। इसके चार पाद जातक के व्यक्तित्व, करियर, स्वास्थ्य और जीवन पथ को अलग-अलग दिशा में प्रभावित करते हैं। प्रत्येक पाद का अपना स्वामी ग्रह और विशिष्ट ऊर्जा होती है, जो जीवन में विविध अनुभव लाती है।
पुनर्वसु नक्षत्र: ज्योतिषीय लक्षण, स्वभाव और सफलता के संकेत
| पाद | डिग्री सीमा | नवांश राशि | स्वामी ग्रह | मुख्य प्रभाव |
|---|---|---|---|---|
| प्रथम | 20°00' - 23°20' | मेष | मंगल | ऊर्जा, साहस, नेतृत्व |
| द्वितीय | 23°20' - 26°40' | वृषभ | शुक्र | भौतिक सुख, रचनात्मकता |
| तृतीय | 26°40' - 30°00' | मिथुन | बुध | बुद्धिमत्ता, संचार कौशल |
| चतुर्थ | 00°00' - 03°20' | कर्क | चंद्रमा | संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता |
पुनर्वसु नक्षत्र के चार पाद जीवन के चार आयामों को दर्शाते हैं।
इन चारों पादों का सम्मिलित प्रभाव जातक के व्यक्तित्व को पूर्णता और संतुलन प्रदान करता है।
“पुनर्वसु की यात्रा हर पाद में नए रंग जोड़ती है—जहाँ साहस, सुख, बुद्धि और संवेदना मिलकर जीवन को संपूर्ण बनाते हैं।”
1. पुनर्वसु नक्षत्र के चार पाद क्यों महत्वपूर्ण हैं?
वे व्यक्तित्व, करियर, स्वास्थ्य और संबंधों की दिशा निर्धारित करते हैं।
2. कौन-सा पाद सबसे मजबूत माना जाता है?
यह जातक की कुंडली पर निर्भर करता है, लेकिन मंगल और बुध पाद विशेष रूप से प्रभावी माने जाते हैं।
3. क्या पुनर्वसु आध्यात्मिक नक्षत्र है?
हाँ, देवी अदिति का प्रभाव इसे ज्ञान, संरक्षण और आध्यात्मिकता से जोड़ता है।
4. कौन-सा gemstone सबसे अच्छा प्रभाव देता है?
पुखराज मुख्य रत्न है, लेकिन पाद अनुसार मूंगा, मोती या पन्ना भी उपयोगी होते हैं।
5. क्या चारों पाद जीवन में अलग-अलग परिणाम देते हैं?
हाँ, प्रत्येक पाद अलग प्रवृत्ति, अनुभव और जीवन दिशा को दर्शाता है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
अनुभव: 19
इनसे पूछें: विवाह, संबंध, करियर
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि, उ.प्र.
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