By पं. अभिषेक शर्मा
रामायण, महाभारत और अदिति की संतानों की कथाएँ पुनर्वसु नक्षत्र में छिपे द्वैत और जुड़वाँ संतानों के संकेतों को उजागर करती हैं।

वैदिक ज्योतिष में द्वैत और बहुलता का रहस्य
पुनर्वसु नक्षत्र मिथुन 20°00' से कर्क 3°20' तक फैला है। इसका स्वामी ग्रह बृहस्पति और अधिष्ठात्री देवी अदिति हैं। यह नक्षत्र “पुनः शुभ” और “प्रकाश की वापसी” का प्रतीक है। वैदिक साहित्य में यह जुड़वाँ संतानों, अनेक जन्मों और द्वैत सिद्धांत से गहराई से जुड़ा है।
अदिति को वेदों में असीम और देवताओं की माता कहा गया है।
उनकी कोख से बारह आदित्य और अष्ट वसु उत्पन्न हुए।
ऋग्वेद में उन्हें अपरिमित संतानों वाली देवी कहा गया है।
अदिति का मातृत्व जीवन में बार-बार नवजन्म और नई संभावनाओं का स्रोत है।
श्रीराम का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ।
उनके जीवन में द्वैत और बहुलता कई रूपों में प्रकट हुई।
इन उदाहरणों के कारण पुनर्वसु जातकों में जुड़वाँ संतान योग अधिक माना जाता है।
श्रीराम का जन्म और पुनर्वसु नक्षत्र: आशा, पुनरुत्थान और धर्म की अमर गाथा
माद्री ने पुनर्वसु नक्षत्र में अश्विनी कुमारों का आह्वान किया।
नकुल और सहदेव का जन्म इसी ऊर्जा का प्रतीक है।
| कथा | जुड़वाँ पात्र | संबंध | विशेषता |
|---|---|---|---|
| रामायण | लव-कुश | श्रीराम-सीता के पुत्र | वीरता और उत्तराधिकार |
| महाभारत | नकुल-सहदेव | पांडव | कौशल और ज्ञान |
| वैदिक | अश्विनी कुमार | दिव्य चिकित्सक | उपचार और पुनर्जीवन |
पहले तीन पाद मिथुन राशि में आते हैं, जो स्वयं जुड़वाँ का प्रतीक है।
तारामंडल में कास्टर और पोलक्स (जुड़वाँ तारे) शामिल हैं।
ज्योतिषीय प्रभाव:
पुनर्वसु यह दर्शाता है कि जीवन में द्वैत और अनेक रूप एक-दूसरे को पूर्ण करते हैं।
अदिति की बहुलता और जुड़वाँ कथाएँ जीवन में विविधता की महिमा दिखाती हैं।
1. क्या पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म लेने वालों में जुड़वाँ संतान योग अधिक होता है?
हाँ, ग्रंथों में इसे विशेष योग माना गया है।
2. पुनर्वसु का जुड़वाँ ऊर्जा से क्या संबंध है?
क्योंकि यह मिथुन राशि, द्वैत और जुड़वाँ तारों से जुड़ा है।
3. अदिति को अनेक संतानों की माता क्यों कहा जाता है?
क्योंकि वे आदित्य और वसुओं की जननी हैं।
4. रामायण में जुड़वाँ जन्म का क्या महत्व है?
लव और कुश पुनर्वसु की पुनर्जन्म और पुनरुत्थान ऊर्जा का प्रतीक हैं।
5. अश्विनी कुमारों का पुनर्वसु से क्या संबंध है?
वे स्वयं दिव्य जुड़वाँ हैं और उपचार तथा पुनर्जीवन का प्रतीक हैं।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
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