By पं. अमिताभ शर्मा
रामायण, वामन अवतार और वैदिक प्रतीकों में पुनर्वसु नक्षत्र की बार-बार शुरुआत और विजय की दिव्य ऊर्जा प्रकट होती है।

जीवन में नई शुरुआत, आशा और विजय
पुनर्वसु नक्षत्र मिथुन 20°00' से कर्क 3°20' तक फैला है। इसका स्वामी बृहस्पति और अधिष्ठात्री देवी अदिति हैं। यह नक्षत्र “पुनः शुभ” और “प्रकाश की वापसी” का प्रतीक है, जो जीवन में बार-बार नई शुरुआत, कठिनाई के बाद सफलता और हर अंधकार के बाद उजाला लाने वाली ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।
पुनर्वसु का प्रतीक तरकश है, जिसमें तीर खत्म होने पर फिर से भरते हैं।
जब जीवन में बाधाएँ, हानि या निराशा आती है, यह नक्षत्र दोबारा प्रयास करने और आशा लौटाने की शक्ति देता है।
वैदिक संकेत यही है कि असफलता अंतिम नहीं होती, बल्कि नए प्रयास का द्वार खोलती है।
श्रीराम का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ, और जीवन भर वे पुनरुत्थान का प्रतीक रहे।
वनवास, सीता हरण और युद्ध के कठिन चरणों के बाद भी श्रीराम ने धैर्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा।
रावण वध के बाद अयोध्या लौटने पर दीप जलाकर स्वागत किया गया, जो उजाले की प्रतीक वापसी है।
रामराज्य की स्थापना पुनर्वसु की ही तरह संतुलन और समृद्धि का पुनर्जन्म था।
असुरराज बलि के अत्याचार से देवता निराश थे।
अदिति की प्रार्थना से विष्णु ने पुनर्वसु नक्षत्र में वामन रूप लिया।
तीन पग भूमि में वामन ने तीनों लोक समेट लिए।
इसके बाद देवताओं को स्वर्ग लौटा और पृथ्वी में संतुलन आया।
यह पुनर्वसु ऊर्जा की स्पष्ट अभिव्यक्ति है, जहाँ अव्यवस्था के बाद पुनः व्यवस्था आती है।
| प्रसंग | संदेश |
|---|---|
| श्रीराम की अयोध्या वापसी | उजाले की वापसी, विजय |
| वामन अवतार | संतुलन और समृद्धि की पुनर्स्थापना |
| जीवन की चुनौतियाँ | प्रयास के बाद सफलता |
| तरकश | बार-बार ऊर्जा का संचार |
पुनर्वसु की शक्ति “वसुत्व प्रपाण” है, जिसका अर्थ है संपत्ति, ऊर्जा और शुभता की बार-बार वापसी।
अदिति का मातृत्व इस नक्षत्र को पुनर्जन्म, करुणा और नवीनीकरण का स्रोत बनाता है।
पुनर्वसु सिखाता है कि कोई भी कठिनाई स्थायी नहीं होती।
संघर्ष के बाद आशा, अंधकार के बाद प्रकाश और हानि के बाद सफलता लौटती है।
इस नक्षत्र की ऊर्जा धैर्य, संतुलन और करुणा को जीवन का आधार बनाती है।
पुनर्वसु नक्षत्र: ज्योतिषीय लक्षण, स्वभाव और सफलता के संकेत
1. पुनर्वसु नक्षत्र “नई शुरुआत” का प्रतीक क्यों माना जाता है?
क्योंकि इसका अर्थ ही “पुनः शुभ” है और इसका प्रतीक तरकश पुनर्पूर्ति दर्शाता है।
2. श्रीराम का पुनर्वसु से क्या संबंध है?
उनका जन्म इसी नक्षत्र में हुआ और जीवनभर उन्होंने पुनरुत्थान का संदेश दिया।
3. वामन अवतार पुनर्वसु ऊर्जा कैसे दर्शाता है?
असंतुलन के बाद फिर से धर्म और समृद्धि की स्थापना इसका उदाहरण है।
4. क्या पुनर्वसु जातकों में पुनरावृत्ति का भाव अधिक होता है?
हाँ, वे कठिनाइयों से उबरकर बार-बार नई शुरुआत करने में सक्षम होते हैं।
5. पुनर्वसु की “वसुत्व शक्ति” क्या है?
यह संपत्ति, शुभता और ऊर्जा की बार-बार वापसी का संकेत है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
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