By पं. संजीव शर्मा
साढ़ेसाती का भय नहीं, यह आत्मपरीक्षण और कर्म सुधार का काल है

शनि को वैदिक ज्योतिष में न्याय, कर्म और अनुशासन का देवता माना गया है। इनके गोचर से उत्पन्न होने वाला सबसे महत्वपूर्ण काल है शनि की साढ़ेसाती। सामान्य लोगों में इसके प्रति भय देखा जाता है, परंतु वास्तव में यह गहन आत्ममंथन और कर्म सुधार का समय होता है।
वर्ष 2025 में शनि की साढ़ेसाती किन राशियों पर है और उसका प्रभाव
साढ़ेसाती कोई दंड नहीं, बल्कि आत्म-विकास, धैर्य, कर्म सुधार और जागृति का काल है। जो लोग संयम, ईमानदारी और तप के मार्ग पर चलते हैं, वे इस काल से अधिक मजबूत होकर निकलते हैं। शनि हमें तोड़ते नहीं, गढ़ते हैं — ताकि आत्मा और कर्म परिपक्व हो सकें।
1. क्या शनि की साढ़ेसाती हमेशा अशुभ होती है?
नहीं, यह काल व्यक्ति के कर्मों और कुंडली में शनि की स्थिति पर निर्भर करता है। अच्छे कर्म और मजबूत शनि सकारात्मक परिणाम देते हैं।
2. किस राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव सबसे अधिक माना जाता है?
मेष, सिंह और वृश्चिक राशि वालों के लिए प्रभाव अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
3. साढ़ेसाती से बचने का कोई तरीका है?
साढ़ेसाती से बचना संभव नहीं, लेकिन उपाय, सेवा, मंत्र और अनुशासन से इसके कष्ट कम किए जा सकते हैं।
4. क्या साढ़ेसाती में करियर खराब हो जाता है?
कई बार देरी होती है, पर मेहनत और ईमानदारी से बड़ी सफलता भी इसी काल में मिलती है।
5. शनि का सबसे प्रभावकारी उपाय क्या माना जाता है?
हनुमान पूजा, शनि मंत्र जप, पीपल वृक्ष की पूजा और सेवा सबसे प्रभावकारी माने गए हैं।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, आध्यात्मिकता और कर्म
इनके क्लाइंट: दि., उ.प्र., म.हा.
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें