By पं. अमिताभ शर्मा
जानिए 2025 में किन राशियों पर शनि की ढैय्या चल रही है, उसका प्रभाव और उपाय

वैदिक ज्योतिष में शनि को न्याय और कर्मफल का देवता माना गया है। वे प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मानुसार फल देते हैं और इसी कारण शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या जीवन में गहरे परिवर्तन लाती है। वर्ष 2025 में शनि के मीन राशि में प्रवेश के साथ ढैय्या दो राशियों पर प्रारंभ हुई है, जबकि दो राशियाँ इसके प्रभाव से मुक्त हुई हैं। यह काल चेतावनी, आत्ममंथन और धैर्य का समय माना जाता है।
ढैय्या शब्द ढाई से उत्पन्न हुआ है और इसका अर्थ है शनि का किसी जातक पर दो वर्ष छह महीने तक विशेष प्रभाव। जब शनि चंद्र राशि से चौथे या आठवें स्थान में गोचर करते हैं तब ढैय्या लगती है। यह समय मानसिक स्थिति, धन, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन में परिवर्तन ला सकता है।
शनि की ढैय्या: वैदिक ज्योतिष में प्रभाव, कारण और समाधान
सिंह राशि
शनि अष्टम भाव में प्रवेश करते हैं
धनु राशि
शनि चतुर्थ भाव में प्रवेश करते हैं
अष्टम शनि व्यक्ति के जीवन में गहरा परिवर्तन ला सकता है
चतुर्थ शनि घर और मन दोनों पर असर डालते हैं
शनि की गति धीमी होती है इसलिए उनका प्रभाव गहराई से परिणाम देता है। ढैय्या व्यक्ति को स्थिरता, धैर्य, अनुशासन और सत्य के मार्ग पर लौटने की प्रेरणा देती है। यह समय दंड का नहीं आत्मसुधार का होता है।
यह काल व्यक्ति की आंतरिक शक्ति को जगाने का अवसर है
शनि की ढैय्या कोई संकट नहीं बल्कि दिशा देने वाला काल है। यह समय अनुशासन, ईमानदारी और दृढ़ता की परीक्षा लेता है। जो व्यक्ति इस अवधि में सत्य, सेवा और विनम्रता को अपनाता है वह शनि की कृपा का पात्र बनता है।
शनि की ढैय्या कितने समय तक रहती है
लगभग ढाई वर्ष तक प्रभाव देती है।
क्या ढैय्या हमेशा परेशानी लाती है
नहीं। यदि शनि जन्मकुंडली में शुभ हों या व्यक्ति सही कर्म करे तो यह काल उन्नति भी दे सकता है।
सिंह राशि पर प्रभाव अधिक क्यों माना जाता है
अष्टम भाव में शनि गहरे परिवर्तन और मानसिक दबाव बढ़ाते हैं।
क्या उपाय करने से ढैय्या का असर कम होता है
हाँ। सेवा, ध्यान, मंत्र और दान से राहत मिलती है।
क्या ढैय्या करियर पर भी असर डालती है
हाँ। स्थान परिवर्तन, देरी या संघर्ष संभव है परंतु सही रास्ता लंबी अवधि में सफलता लाता है।
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