By पं. संजीव शर्मा
शनि की महादशा, साढ़ेसाती और दोष शांति के लिए प्रभावी पूजा, दान और मंत्र साधना

शनिदेव वैदिक ज्योतिष में कर्म न्याय और अनुशासन के प्रतीक हैं। इन्हें कर्मफल दाता कहा जाता है क्योंकि यह व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनि की महादशा या साढ़ेसाती में इन्हें प्रसन्न करने से जीवन के संकट रुकावटें और ग्रह दोष शांत होते हैं। वैदिक मान्यता है कि शनिदेव की कृपा से केवल सांसारिक सुख ही नहीं बल्कि आत्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
लग्न कुंडली के विभिन्न भावों में शनि का प्रभाव
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल मिले जल से स्नान करें।
काले तिल मिले जल से शिवलिंग का अभिषेक करें क्योंकि शनि और शिव का संबंध अत्यंत गहरा है।
पीपल की जड़ में काले तिल मिला जल चढ़ाएँ।
वृक्ष की तीन परिक्रमा करें और पांच बार उठक बैठक करें।
यह शनि के प्रतीक कौए को समर्पित माना जाता है।
शनि मंदिर में शनि प्रतिमा पर तिल का तेल या सरसों का तेल चढ़ाएँ।
ॐ शं शनैश्चराय नमः
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः
काले तिल
उड़द की दाल
लोहे की वस्तुएँ
सरसों का तेल
काले वस्त्र
छाता जूते या चप्पल
कंबल काले फल या अनाज
दान श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से करें।
दान करते समय शनि को मन में स्मरण करें।
दान जरूरतमंद गरीब वृद्ध या असहाय जनों को करें।
शनिवार को मंदिर या पीपल वृक्ष के पास दान विशेष फल देता है।
साढ़ेसाती ढैय्या या महादशा के कष्ट शांत होते हैं।
आर्थिक स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्याओं में सुधार।
मन में शांति आत्मविश्वास और सकारात्मकता।
जीवन में स्थिरता सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति।
शनिवार को लोहे की थाली पर शनि यंत्र स्थापित करें।
काले फूल तिल और सरसों तेल चढ़ाएँ।
यंत्र के सामने घी का दीपक जलाएँ।
शनि गायत्री मंत्र
ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नो शनि प्रचोदयात
शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः
शनिवार को व्रत
तिल उड़द या काले चने का सात्विक भोजन
पिता वृद्धजन और गरीबों की सेवा
ईमानदारी और सत्यनिष्ठा
झूठ छल या अन्याय
शनिवार को मांसाहार या मदिरा
किसी का अपमान
नीलम धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।
हनुमान चालीसा का नियमित पाठ।
हनुमान मंदिर में सिंदूर चढ़ाना।
शनि मंदिर में काले तिल लोहा या वस्त्र का चढ़ावा।
शनि को क्रूर ग्रह मानना भ्रम है। वह कर्म के गुरु हैं जो हमें अनुशासन धैर्य और सत्य का मार्ग दिखाते हैं। उनका सिद्धांत सरल है
कर्म की पवित्रता ही शनि की कृपा का आधार है।
ईमानदारी सेवा और धैर्य से शनिदेव जीवन की हर कठिनाई को विकास में बदल देते हैं।
कर्म की पवित्रता
दान और सेवा
ध्यान और साधना
शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धा और नियम आवश्यक हैं। जो व्यक्ति इन उपायों को समर्पित भाव से करता है वह जीवन में शांति स्थिरता और आध्यात्मिक विकास प्राप्त करता है।
शनिदेव को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय क्या है
प्रत्येक शनिवार को काले तिल दान करना और शनि मंत्र का जाप करना अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
क्या शनि पूजा घर में की जा सकती है
हाँ पूरी शुद्धि के साथ घर में शनि मंत्र साधना और तेल दीपक किया जा सकता है।
क्या शनि की कृपा केवल दान से मिलती है
दान महत्वपूर्ण है लेकिन शनि की असली कृपा अच्छे कर्म अनुशासन और सेवा भाव से मिलती है।
क्या शनिवार को यात्रा नहीं करनी चाहिए
अनावश्यक यात्रा से बचना अच्छा माना जाता है परंतु आवश्यक कार्य में यात्रा करना दोषकारी नहीं।
क्या नीलम हर व्यक्ति पहन सकता है
नहीं यह केवल तब धारण करना चाहिए जब कुंडली में शनि शुभ हो।
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