By पं. नीलेश शर्मा
जानिए दशम भाव में शनि की स्थिति करियर, पद, सामाजिक प्रतिष्ठा और जीवन के उद्देश्य को कैसे प्रभावित करती है

दशम भाव को वैदिक ज्योतिष में कर्म स्थान कहा जाता है। यह वह स्थान है जो व्यक्ति के कार्य जीवन सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यावसायिक दिशा का निर्धारण करता है। जब इस भाव में शनि स्थित होता है तो यह जीवन में जिम्मेदारी अनुशासन और परिश्रम का गहरा प्रभाव डालता है। यह स्थिति धीरे चलने वाली परंतु स्थायी सफलता देती है।
शनि के प्रभाव को कम करने के सर्वोत्तम उपाय: वैदिक दृष्टि और ज्योतिषीय समाधान
दशम भाव दर्शाता है
शनि कर्मफल दाता है और व्यक्ति को उसकी मेहनत निष्ठा और जीवनशैली के आधार पर फल देता है। दशम भाव में शनि एक सशक्त कर्म योग का निर्माण करता है।
दसवें भाव का शनि सिखाता है कि सफलता का मार्ग संघर्ष से होकर जाता है। यह ग्रह आपको गिरा भी सकता है लेकिन वही आपको उठाकर मजबूती भी देता है। यह सिखाता है कि कर्म ही जीवन की असली पूंजी है। जो अपने पथ पर धैर्य समर्पण और सत्य के साथ चलता है वह अंततः शनि की कृपा से स्थायी सफलता प्राप्त करता है।
दशम भाव में शनि कठिनाइयों के माध्यम से व्यक्ति को परिपक्व बनाता है। यह स्थिति दृढ़ संकल्प दीर्घकालिक सफलता और नैतिक शक्ति देती है। सही उपाय और सकारात्मक जीवन दृष्टि से शनि जातक का सबसे बड़ा मार्गदर्शक बन जाता है।
क्या दसवें भाव में शनि करियर में देरी करता है
हाँ प्रारंभिक वर्षों में देरी होती है लेकिन बाद में स्थायी सफलता मिलती है।
क्या इस स्थिति से पिता के साथ संबंध प्रभावित होते हैं
हाँ शुरुआती मतभेद संभव हैं लेकिन समय के साथ संबंध मजबूत होते हैं।
क्या यह विवाह को प्रभावित करता है
हाँ विवाह देरी से होता है लेकिन संबंध स्थिर रहते हैं।
क्या इस स्थिति से विदेश योग बनते हैं
हाँ विशेषकर यदि शनि शुभ हो या दशा अनुकूल हो।
क्या उपाय करने से शनि का प्रभाव बेहतर होता है
हाँ मंत्र दान और सेवा से शनि अत्यंत शुभ परिणाम देता है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्रअनुभव: 25
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इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि.
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