By अपर्णा पाटनी
जानिए वह रहस्यमयी कारण, जिसकी वजह से पुरी के जगन्नाथ मंदिर में समुद्र की आवाज नहीं सुनाई देती

पुरी का जगन्नाथ मंदिर अपनी दिव्यता के साथ अपने रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। इनमें सबसे अद्भुत रहस्य यह है कि मंदिर परिसर में समुद्र की लहरों का शोर सुनाई नहीं देता, जबकि मंदिर से थोड़ा बाहर जाते ही वही ध्वनि अत्यंत स्पष्ट सुनाई देती है। इस रहस्य के पीछे भगवान हनुमान की एक गूढ़ लीला छिपी है, जो वैदिक ज्ञान, प्रकृति और देवताओं के अद्भुत सामंजस्य को दर्शाती है।
पुराणों के अनुसार, एक समय ऐसा आया जब जगन्नाथ जी समुद्र के तट पर स्थित अपने धाम में विश्राम नहीं कर पा रहे थे। समुद्र की गर्जन करती लहरें उनकी निद्रा में बाधा डाल रही थीं। तब उन्होंने हनुमान जी को समस्या सुलझाने का आदेश दिया।
हनुमान जी ने समुद्र देव से निवेदन किया कि वे थोड़ा शांत हो जाएँ। समुद्र देव ने कहा कि उनका स्वभाव गति और ध्वनि है, किंतु यदि वायु की दिशा बदले तो ध्वनि मंदिर तक नहीं पहुँचेगी।
हनुमान जी ने पवन देव का आह्वान किया। पवन देव ने बताया कि दिशा वे नहीं बदल सकते, पर हनुमान अपनी गति से वायु अवरोध बना सकते हैं।
हनुमान जी ने मंदिर के चारों ओर इतनी तीव्र गति से परिक्रमा की कि एक शक्तिशाली वायु चक्र बन गया।
इस वायु अवरोध ने समुद्र की ध्वनि तरंगों को मंदिर क्षेत्र में प्रवेश करने से रोक दिया।
जगन्नाथ जी को पूर्ण शांति मिली और वे निश्चिंत होकर विश्राम कर सके।
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हनुमान जी की यह लीला बताती है कि वैदिक परंपरा में प्रकृति और देवता एक दूसरे के पूरक हैं।
उन्होंने किसी तत्व को दबाया नहीं, बल्कि प्रकृति के नियमों को समझकर समाधान निकाला।
रथ यात्रा की अवधि में यह लीला विशेष रूप से स्मरण की जाती है।
आज भी मंदिर के भीतर समुद्र की ध्वनि लगभग लुप्त रहती है।
कुछ कदम बाहर जाते ही वही लहरें तेज सुनाई देती हैं।
भक्त इसे हनुमान जी की रक्षा मानते हैं और वैज्ञानिक इसे ध्वनि विज्ञान की विशेष स्थिति बताते हैं।
हनुमान जी की इस कथा का संदेश गहरा है।
समस्या चाहे जितनी भी कठिन हो, भक्ति और बुद्धि दोनों का उपयोग करने पर समाधान अवश्य मिलता है।
यह कथा सिखाती है कि प्रकृति और ईश्वर सदैव साथ हैं, बस उनके संकेतों को समझने की आवश्यकता है।
क्या सच में जगन्नाथ मंदिर में समुद्र की आवाज़ सुनाई नहीं देती?
हाँ, मंदिर के भीतर शोर बहुत कम हो जाता है जबकि बाहर स्पष्ट सुनाई देता है।
क्या इसे हनुमान जी की लीला माना जाता है?
भक्त इस घटना को हनुमान जी की वायु रक्षा मानते हैं।
विज्ञान इसे कैसे समझाता है?
इसे ध्वनि तरंगों की दिशा, अवरोध और वायु प्रवाह का परिणाम माना जाता है।
क्या यह प्रभाव आज भी अनुभव किया जा सकता है?
हाँ, प्रतिदिन लाखों भक्त इसे प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं।
क्या इसका ज्योतिषीय महत्व है?
जल और वायु तत्वों के संतुलन को वैदिक दृष्टि में इसका कारण माना जाता है।
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