By पं. नीलेश शर्मा
जानिए कैसे एलोरा की गुफाओं में स्थित कैलाशा मंदिर बना अद्वितीय वास्तुकला, भक्ति और शिल्प का संगम

भारत की प्राचीन वास्तुकला और अध्यात्मिक परंपरा में एलोरा का कैलाशा मंदिर एक अद्वितीय चमत्कार है। यह मंदिर अपनी संरचना, शिल्पकला और आध्यात्मिक महत्व के कारण विश्व भर में प्रसिद्ध है। इसे देखना केवल एक स्थापत्य अनुभव नहीं, बल्कि भक्ति, कौशल और समर्पण की जीवंत यात्रा है।
कैलाशा मंदिर महाराष्ट्र के एलोरा गुफा समूह में स्थित है, जो औरंगाबाद से लगभग तीस किलोमीटर दूर है। एलोरा एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और कैलाशा मंदिर इसकी सबसे प्रमुख धरोहर माना जाता है।
कैलाशा मंदिर एक ही विशाल बासाल्ट चट्टान को काटकर बनाया गया है। इसमें किसी प्रकार का सीमेंट या सरिया इस्तेमाल नहीं किया गया। यह विशेषता इसे विश्व में अनूठा बनाती है।
माना जाता है कि इसका निर्माण राष्ट्रकूट वंश के राजा कृष्ण प्रथम द्वारा आठवीं सदी में कराया गया और यह लगभग बारह सौ वर्ष प्राचीन है।
जहाँ सामान्य इमारतें नीचे से ऊपर बनती हैं, वहीं कैलाशा मंदिर का निर्माण ऊपर से नीचे की दिशा में किया गया। इसमें लगभग दो लाख टन चट्टान को हाथ के औजारों से हटाया गया। यह प्रेरणा देता है कि दृढ़ इच्छा और कौशल से असंभव कार्य भी संभव हो सकता है।
मंदिर में रामायण और महाभारत के कई प्रसंगों को दर्शाती हुई कलाकृतियाँ उकेरी गई हैं। बासाल्ट चट्टान में तराशी गई मूर्तियाँ जीवन्त प्रतीत होती हैं और मंदिर के हर कोण में धर्म और कला की ऊर्जा अनुभव होती है।
इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर को बनाने में लगभग अठारह वर्ष लगे। इसकी विशालता, जटिलता और शिल्प परंपरा भारतीय ज्ञान और भक्ति की सर्वोच्च साधना का उदाहरण है।
कैलाशा मंदिर केवल एक स्थापत्य चमत्कार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक भी है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान | एलोरा गुफाएँ, औरंगाबाद, महाराष्ट्र |
| निर्माण काल | राष्ट्रकूट शासक कृष्ण प्रथम, 8वीं सदी |
| निर्माण शैली | एकल बासाल्ट चट्टान को ऊपर से नीचे तराशना |
| कुल निकाली गई चट्टान | लगभग 2,00,000 टन |
| निर्माण का समय | लगभग 18 वर्ष |
| प्रमुख विशिष्टता | बिना सीमेंट या सरिया, पूर्णतः हाथ से तराशा गया |
| नक्काशी | रामायण, महाभारत और देवी-देवताओं के दृश्य |
कैलाशा मंदिर का दर्शन करना केवल स्थापत्य वैभव को देखना नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आध्यात्मिकता और शिल्प कला के दिव्य संगम का अनुभव करना है। यह मंदिर विश्व को यह संदेश देता है कि श्रद्धा, साधना और कौशल के मिलन से असंभव भी संभव हो जाता है।
1. कैलाशा मंदिर को अद्वितीय क्यों माना जाता है
क्योंकि यह एक ही चट्टान को तराशकर बनाया गया है और इसकी संरचना विश्व में दुर्लभ है।
2. इस मंदिर का निर्माण किसने करवाया था
राष्ट्रकूट वंश के राजा कृष्ण प्रथम ने आठवीं सदी में इसका निर्माण करवाया।
3. कैलाशा मंदिर बनाने में कितना समय लगा
लगभग अठारह वर्ष का समय लगा।
4. क्या मंदिर में रामायण और महाभारत की नक्काशी है
हाँ, दोनों महाकाव्यों के कई दृश्य मंदिर की दीवारों पर उकेरे गए हैं।
5. कैलाशा मंदिर आध्यात्मिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है
क्योंकि यह शिव को समर्पित है और इसमें कला तथा भक्ति का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है।
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