By पं. संजीव शर्मा
जानिए उन प्रमुख नाग कथाओं को, जिनमें छुपा है जीवन, धर्म और शक्ति का रहस्य और कद्रू के शाप व ब्रह्मा के वरदान का संदेश।

भारतीय पुराणों में नागों का उल्लेख केवल रहस्य या शक्ति का प्रतीक भर नहीं रहा. नागों की कथाएँ मानव जीवन के उन आयामों को उजागर करती हैं जिनमें करुणा, धर्म, संरक्षण, सेवा और संतुलन एक साथ प्रकट होते हैं. शेष, वासुकि और तक्षक जैसे प्रसिद्ध नागों के अतिरिक्त अनेक ऐसे नाग हैं जिनकी गाथाएँ लोक परंपराओं और पौराणिक ग्रंथों में आज भी जीवित हैं. मणिभद्र, ऐरावत, धृतराष्ट्र और धनंजय जैसे नागों की कथाएँ इस गहन परंपरा को और विस्तृत करती हैं. इनके साथ ही कद्रू के शाप और ब्रह्मा के वरदान की कथा उन आध्यात्मिक सत्यों को सामने लाती है जो जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं.
मणिभद्र नाग को नागों के रक्षक के रूप में जाना जाता है. उज्जैन के निकट स्थित नागलोक की परंपरा में उनका स्थान अत्यंत श्रद्धापूर्ण माना गया है. कहा जाता है कि एक समय उज्जैन में भयंकर महामारी फैल गई. नगरवासियों ने भय और असहायता में मणिभद्र नाग की प्रार्थना की और दूध, चावल, पुष्प और फल अर्पित किए. मणिभद्र प्रसन्न हुए और पूरे नगर को महामारी से मुक्त कर दिया. इसी घटना के कारण मणिभद्र लोकदेवता के रूप में पूजे जाने लगे. उनका नाम आज भी सुरक्षा, कल्याण और भय से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है.
ऐरावत नाग समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए. उनका वर्ण श्वेत और भव्य बताया गया है. ऐरावत चार दाँतों वाले दिव्य हाथी के रूप में प्रकट हुए और इंद्र के वाहन बने. कहा जाता है कि जब ऐरावत अपनी सूंड से अमृत की धार बहाते थे तब देवलोक में जीवन, वर्षा और समृद्धि बढ़ती थी. ऐरावत का नाम नागों के प्रमुख कुलों में सम्मान के साथ लिया जाता है. भारत की कई परंपराओं में ऐरावत की पूजा शक्ति, संरक्षण और वर्षा की कामना के लिए की जाती है. ऐरावत केवल एक नाग या हाथी का रूप नहीं बल्कि स्थिरता और समृद्धि के दिव्य आधार का प्रतीक हैं.
धृतराष्ट्र नाग कद्रू और कश्यप के पुत्र माने जाते हैं. महाभारत में उनका वर्णन नाग कुल के प्रमुख संरक्षक के रूप में किया गया है. उनका स्वभाव शांत, धर्मनिष्ठ और अत्यंत संतुलित बताया गया है. नाग यज्ञ के समय धृतराष्ट्र नाग ने आस्तिक मुनि से नाग जाति की रक्षा की प्रार्थना की. आस्तिक मुनि के प्रयास और जनमेजय के निर्णय से नाग यज्ञ रुका और नागों को नया जीवन मिला. धृतराष्ट्र नाग की कथा यह सिखाती है कि धर्म और धैर्य ही किसी भी जाति या समाज की रक्षा का वास्तविक आधार होते हैं.
धनंजय नाग भी कद्रू के पुत्रों में से एक हैं. वे अत्यंत बुद्धिमान और तांत्रिक शक्तियों से संपन्न बताए गए हैं. नागलोक की रक्षा में उनका बड़ा योगदान माना जाता है. नागपंचमी के दिन धनंजय नाग की विशेष पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि उनकी आराधना से समृद्धि, सुरक्षा और अभयदान प्राप्त होता है. धनंजय नाग की कथा यह संदेश देती है कि ज्ञान और सेवा का भाव व्यक्ति को अद्भुत शक्ति प्रदान करता है और जीवन में संतुलन बनाकर रखता है.
कद्रू नाग जाति की माता थीं. एक बार उन्होंने अपनी बहन विनता के साथ उच्चैःश्रवा घोड़े के विषय में विवाद किया. कद्रू ने छल का सहारा लिया और अपने नाग पुत्रों को कहा कि वे घोड़े की पूँछ को काला दिखाएं. कुछ नाग पुत्रों ने इस छल का विरोध किया. कद्रू क्रोधित हो गईं और उन्होंने उन नागों को शाप दिया कि वे भविष्य में होने वाले सर्प यज्ञ में भस्म हो जाएंगे. इस शाप के कारण नागों के विनाश का भय बढ़ गया. कद्रू के शाप में उस पीड़ा का संकेत भी छिपा है जो अधर्म के मार्ग से उत्पन्न होती है.
कद्रू के शाप से व्यथित नागों ने ब्रह्मा जी से प्रार्थना की कि उनकी रक्षा की जाए. ब्रह्मा जी ने उन्हें यह वर दिया कि जो नाग धर्म, सत्य और करुणा का पालन करेंगे उन्हें कोई हानि नहीं पहुँचेगी. उन्होंने आस्तिक मुनि को नागों की रक्षा के लिए प्रेरित किया. आगे चलकर आस्तिक मुनि के प्रयास से नाग यज्ञ रुका और नाग जाति को अभयदान प्राप्त हुआ. ब्रह्मा जी का यह वरदान इस बात का संकेत देता है कि धर्म और करुणा के मार्ग पर चलने वालों की रक्षा सदा सुनिश्चित होती है.
कद्रू और विनता की कथा - नागों की उत्पत्ति और गरुड़-नाग शत्रुता
| नाग या पात्र | कथा या घटना | संदेश या महत्व |
|---|---|---|
| मणिभद्र | उज्जैन में महामारी से रक्षा | लोकदेवता, संरक्षण, कल्याण |
| ऐरावत | समुद्र मंथन से उत्पत्ति, इंद्र का वाहन | शक्ति, ऐश्वर्य, वर्षा |
| धृतराष्ट्र | नाग यज्ञ के समय संरक्षण | धैर्य, संतुलन, धर्म |
| धनंजय | नागलोक के रक्षक | ज्ञान, सुरक्षा, सेवा |
| कद्रू का शाप | नागों को भस्म होने का शाप | छल, परिणाम |
| ब्रह्मा का वरदान | धर्मी नागों की रक्षा | आध्यात्मिक संरक्षण, अभयदान |
इन कथाओं में जीवन के वे मूल्य छिपे हैं जो मनुष्य को संतुलन, करुणा और धर्म की दिशा में आगे बढ़ाते हैं. मणिभद्र की रक्षा शक्ति हो या ऐरावत का अमृतमय अस्तित्व, धृतराष्ट्र की धर्मनिष्ठा हो या धनंजय का ज्ञान, हर कथा एक गहरा संदेश देती है. कद्रू के शाप और ब्रह्मा के वरदान से यह समझ आता है कि छल विनाश का कारण बनता है जबकि सत्य, सेवा और धैर्य अभयदान का मार्ग खोलते हैं.
मणिभद्र नाग को लोकदेवता क्यों माना जाता है
वे उज्जैन में लोगों की रक्षा करने और महामारी से मुक्ति दिलाने के लिए प्रसिद्ध हैं.
ऐरावत को इंद्र का वाहन कैसे माना गया
समुद्र मंथन से उत्पन्न होने के बाद इंद्र ने उन्हें अपना दिव्य वाहन स्वीकार किया.
धृतराष्ट्र नाग की विशेषता क्या बताई जाती है
वे धर्मनिष्ठ, धैर्यवान और नाग कुल के प्रमुख संरक्षक माने जाते हैं.
धनंजय नाग की पूजा किस उद्देश्य से की जाती है
समृद्धि, सुरक्षा और ज्ञान की प्राप्ति के लिए उनकी पूजा की जाती है.
कद्रू के शाप और ब्रह्मा के वरदान का मुख्य संदेश क्या है
अधर्म विनाश का कारण बनता है और धर्म तथा करुणा जीवन में अभय की प्राप्ति कराते हैं.
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
अनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, आध्यात्मिकता और कर्म
इनके क्लाइंट: दि., उ.प्र., म.हा.
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