By पं. सुव्रत शर्मा
धर्म, प्रेम और मुक्ति की अद्वितीय कथा जिसने भाई दूज जैसे त्योहार को जन्म दिया

वैदिक संस्कृति में यम और यमुना केवल भाई बहन नहीं हैं बल्कि धर्म न्याय और अमर प्रेम के आदर्श प्रतीक हैं। यह कथा मानवीय रिश्तों की पवित्रता नैतिक सीमाओं और आध्यात्मिक मुक्ति का सार प्रस्तुत करती है। ऋग्वेद से लेकर विष्णु पुराण तक यह कथा यम द्वितीया जैसे पर्वों की आधारशिला बनी जो भाई बहन के बंधन की अमरता का उत्सव है।
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| माता पिता | सूर्य देव विवस्वान और संज्ञा सरण्यू |
| जन्म | जुड़वां भाई बहन |
| स्थान | सूर्यलोक |
| प्रमुख ग्रंथ | ऋग्वेद 10.10 विष्णु पुराण 3.2.4 मार्कण्डेय पुराण 74.4 |
| यमुना का स्वरूप | नदी देवी पृथ्वी पर प्रवाहित |
यम देवता: मृत्यु, धर्म और न्याय के वैदिक अधिपति
बहुत समय पहले सूर्य देव के घर जुड़वां संतानें जन्मीं यम और यमुना। बचपन से ही वे एक दूसरे के सबसे निकट साथी थे। यमुना की हँसी में यम को जीवन का उल्लास मिलता था और यम की गंभीरता यमुना को सुरक्षा देती थी। वे साथ खेलते थे साथ भोजन करते थे और हर दिन का आरंभ और अंत एक दूसरे के बिना अधूरा लगता था।
समय के साथ दोनों की भूमिकाएँ बदल गईं। यम को मृत्यु और धर्म का भार मिला तो यमुना पृथ्वी पर उतरकर नदी बनीं। यमुना हर वर्ष कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन अपने भाई को बुलाने का निमंत्रण भेजती थीं। यम अपने कर्म धर्म में व्यस्त रहते थे जिससे वह आ नहीं पाते थे। यमुना प्रतीक्षा करती रहीं उनके मन में भाई के स्वागत की आशा जीवित रहती थी।
एक वर्ष यम ने बहन की प्रतीक्षा और प्रेम को समझा। वे यमुना के घर पहुँचे। यमुना ने रंगोली बनाई तिलक किया आरती उतारी और अपने हाथों से भोजन परोसा। यम ने बहन के प्रेम की गहराई अनुभव की। भोजन के बाद यम ने कहा
आज से जो भाई अपनी बहन से तिलक और भोजन पाएगा उसे मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तुम्हारा प्रेम अमर है यह वरदान युगों तक जीवित रहेगा।
इसी घटना से यम द्वितीया की परंपरा आरंभ हुई। आज भी बहनें भाइयों को तिलक लगाती हैं मिठाई खिलाती हैं और भाई बहन की रक्षा का वचन देता है। यह त्योहार केवल परंपरा नहीं बल्कि उस अनश्वर प्रेम का प्रतीक है जिसमें धर्म कर्तव्य और स्नेह का मेल है।
यम और यमुना की गाथा सिखाती है कि प्रेम और धर्म जीवन में समान रूप से आवश्यक हैं। भाई बहन का रिश्ता केवल रक्त का नहीं आत्मा का बंधन है जिसमें प्रतीक्षा समर्पण और आशीर्वाद की मधुरता है।
यमुना की प्रतीक्षा और यम का वरदान मिलकर बताते हैं कि प्रेम समय और मृत्यु से परे होता है।
प्रेम की प्रतीक्षा व्यर्थ नहीं जाती वह किसी न किसी रूप में अमर आशीर्वाद बनकर लौटती है।
| क्रिया | अर्थ |
|---|---|
| तिलक | बहन द्वारा भाई के माथे पर चंदन या केसर का टीका |
| अर्घ्य | यमुना जल से भाई का स्वागत |
| भोजन | भाई को हाथ से बना भोजन परोसना |
| वरदान | भाई द्वारा बहन की रक्षा और समृद्धि का वचन |
• प्रेम की पवित्रता भाई बहन का स्नेह स्वार्थ रहित होता है
• धर्म की प्रधानता यम बताते हैं कि नैतिकता प्रेम से ऊपर है
• मुक्ति का संदेश यमुना दर्शाती हैं कि शुद्ध मन से किया गया स्नान पापों को शांत करता है
यम यमुना की कथा मनुष्य को याद दिलाती है कि प्रेम अमर है किंतु धर्म उसकी मर्यादा निर्धारित करता है।
• यमुना का उद्गम यमुनोत्री
• यमुना के तट पर कृष्ण की लीलाएँ
• यमुना आज भी अनेक नगरों की जीवनदायिनी नदी
• यम द्वितीया क्यों मनाई जाती है
क्योंकि यह यम और यमुना के अमर प्रेम और भाई बहन के संरक्षण का प्रतीक है।
• यमुना को नदी देवी क्यों कहा जाता है
क्योंकि वह पृथ्वी पर जीवन को पोषित करने वाली दैवी ऊर्जा मानी गई हैं।
• यम का वरदान क्या दर्शाता है
प्रेम की पवित्रता और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश।
• क्या यम और यमुना वास्तव में जुड़वां थे
पुराणों के अनुसार वे सूर्य और संज्ञा की जुड़वां संतान हैं।
• यम द्वितीया और भाई दूज में क्या अंतर है
दोनों का आधार वही कथा है नाम और क्षेत्रीय परंपराएँ अलग हैं।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
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