By पं. सुव्रत शर्मा
जानिए कैसे बृहस्पति ने धर्म, नीति और आत्मबल से देवताओं को विजय दिलाई और पुष्य नक्षत्र को अमृत नक्षत्र बनाया

भारतीय वेदों और पुराणों में बृहस्पति को देवताओं का गुरु, ज्ञान का प्रकाश और धर्म का संरक्षक कहा गया है। पुष्य नक्षत्र के अधिष्ठाता होने के कारण वे ज्ञान, नीति और आत्मिक शक्ति के प्रतिनिधि हैं। उनकी कथा जीवन में दिशा, आशा और आंतरिक बल का संदेश देती है।
ऋग्वेद और पुराणों में बृहस्पति बार-बार वर्णित हैं। उन्होंने देवताओं को मंत्र, यज्ञ और नीति का मार्ग सिखाया। कठिन समय में वे देवताओं को सही निर्णय और आत्मबल प्रदान करते थे।
पुष्य नक्षत्र - पोषण, समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र
स्वर्ग में देवता और असुर लगातार युद्ध करते थे। असुरों के गुरु शुक्राचार्य ने ‘मृत-संजीवनी’ विद्या प्राप्त कर ली थी। इससे वे हर मृत असुर को पुनः जीवित कर देते थे। देवता भयभीत हो गए और संघर्ष असंतुलित हो गया।
देवताओं ने इंद्र के नेतृत्व में सभा बुलाई और बृहस्पति से मार्गदर्शन की विनती की।
बृहस्पति ने कहा कि विजय केवल अस्त्रों से नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और आत्मबल से मिलती है।
उन्होंने देवताओं को आत्मशुद्धि, अनुशासन और यज्ञ की पवित्रता का महत्व समझाया।
उन्होंने प्रत्येक देवता को उसका कर्तव्य याद दिलाया और एक विशेष यज्ञ करवाया।
यज्ञ के दौरान उन्होंने कहा:
“धर्मो रक्षति रक्षितः”
धर्म की रक्षा करने वाला व्यक्ति स्वयं धर्म द्वारा संरक्षित रहता है।
यज्ञ की ऊर्जा ने देवताओं में साहस और विश्वास का संचार किया।
नए आत्मबल और धर्मबल के साथ देवताओं ने युद्ध किया।
अब असुरों के पुनर्जीवित होने की विद्या भी प्रभावी नहीं रही।
देवताओं ने धैर्य, संयम और नीति से विजय पाई।
पुष्य नक्षत्र के अधिष्ठाता बृहस्पति होने के कारण इस नक्षत्र में जन्मे जातक:
पुष्य नक्षत्र को अमृत नक्षत्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी ऊर्जा पोषण, शांति और दिव्य संरक्षण देती है।
1. बृहस्पति को देवगुरु क्यों कहा जाता है?
क्योंकि वे देवताओं को मंत्र, नीति, यज्ञ और जीवन-मार्ग सिखाते थे।
2. शुक्राचार्य की मृत-संजीवनी विद्या क्या थी?
एक दिव्य शक्ति जिससे मृत असुर फिर से जीवित हो जाते थे।
3. बृहस्पति ने देवताओं को कैसे मजबूत किया?
यज्ञ, मंत्र, आत्मबल और धर्म का महत्व समझाकर।
4. पुष्य नक्षत्र बृहस्पति से कैसे जुड़ा है?
यह नक्षत्र बृहस्पति द्वारा शासित है, इसलिए इसकी ऊर्जा ज्ञान और पोषण देती है।
5. इस कथा का मुख्य संदेश क्या है?
आत्मिक शक्ति, धर्म और सही मार्गदर्शन हर कठिनाई को पार कर सकता है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
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