By अपर्णा पाटनी
प्रेम, मोह, क्षमा और बुद्ध ग्रह की उत्पत्ति से जुड़ी यह कथा आज के संबंधों में भी गहरी सीख देती है

भारतीय पुराणों में देवताओं की शक्ति के साथ उनकी भावनाएं, संबंध और मानवीय कमजोरियां भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। तारा, चंद्रमा और बृहस्पति की यह कथा प्रेम, मोह, अपराधबोध, ईर्ष्या, क्षमा और आत्मबोध की गहन यात्रा है। यह कहानी बुध ग्रह के जन्म से भी जुड़ी है और जीवन के लिए गहरा संदेश देती है।
देवताओं के गुरु बृहस्पति धर्म, ज्ञान और नीति के प्रतीक थे। उनकी पत्नी तारा अपनी सुंदरता और बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध थीं। तारा के भीतर एक सूक्ष्म बेचैनी थी, जिसे कोई नहीं समझ पाता था।
चंद्रमा अपनी शीतलता और आकर्षक व्यक्तित्व के कारण सभी का ध्यान आकर्षित करते थे। तारा और चंद्रमा के मिलन से दोनों के बीच एक मौन आकर्षण उत्पन्न हुआ। तारा का मन चंद्रमा की ओर खिंच गया और अंततः वह बृहस्पति का गृह छोड़कर चंद्रमा के साथ चली गईं।
तारा के जाने से बृहस्पति आहत और क्रोधित हुए। चंद्रमा तारा को लौटाने को तैयार नहीं थे। विवाद इतना बढ़ा कि देवताओं और असुरों के बीच भी विभाजन हो गया। इंद्र और कई देवता बृहस्पति के साथ थे, जबकि कुछ ताकतें चंद्रमा की ओर झुक गईं। स्वर्ग अशांत हो उठा।
जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तब ब्रह्मा ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने तारा से पूछा कि वह किसके साथ रहना चाहती हैं। तारा ने अपनी भूल स्वीकार की और बृहस्पति के पास लौट आईं। बृहस्पति ने उन्हें क्षमा किया, किन्तु तारा गर्भवती थीं।
तारा ने एक सुंदर बालक को जन्म दिया, जिसका नाम रखा गया बुध। बृहस्पति और चंद्रमा दोनों ने उसे अपना पुत्र बताया। अंततः तारा ने स्वीकार किया कि बुध चंद्रमा के पुत्र हैं। बृहस्पति ने सत्य स्वीकार किया और बुध को आशीर्वाद दिया।
यह कथा बताती है कि रिश्तों की परीक्षा हर युग में होती है। मोह, ईर्ष्या या क्रोध के स्थान पर संवाद, सत्य और क्षमा अपनाने से संतुलन लौट आता है। हर उलझन के बाद बुध की तरह नई शुरुआत और समझ का जन्म होता है।
बृहस्पति - देवताओं के गुरु और पुष्य नक्षत्र के अधिष्ठाता: एक प्रेरक कथा
1. तारा चंद्रमा के साथ क्यों गईं?
चंद्रमा के आकर्षण और तारा की आंतरिक बेचैनी ने दोनों को एक-दूसरे के करीब ला दिया।
2. बृहस्पति ने तारा को वापस क्यों स्वीकार किया?
क्योंकि क्षमा और धर्म का मार्ग बृहस्पति के स्वभाव का मूल है।
3. बुध का पिता कौन था?
तारा ने स्वीकार किया कि बुध चंद्रमा के पुत्र हैं।
4. इस कथा का मुख्य संदेश क्या है?
रिश्तों में सत्य, संवाद और क्षमा ही संतुलन और शांति लाते हैं।
5. इस कथा का ज्योतिष से क्या संबंध है?
बुध ग्रह की उत्पत्ति और बृहस्पति की भूमिका के कारण यह कथा वैदिक ज्योतिष में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्रअनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, मुहूर्त
इनके क्लाइंट: म.प्र., दि.
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