By पं. अभिषेक शर्मा
जानें रोहिणी नक्षत्र के चार चरणों की विशेषताओं, करियर संभावनाओं और व्यक्तित्व पर प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण

रोहिणी नक्षत्र, वृषभ राशि में 10°00' से 23°20' तक फैला है और इसका स्वामी चंद्रमा है। यह नक्षत्र अपनी कोमलता, आकर्षण, उर्वरता और रचनात्मकता के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इसकी असली विविधता इसके चार पादों में छुपी है। हर पाद जातक के स्वभाव, सोच, करियर और जीवन के रंग को अलग-अलग ढंग से उभारता है।
(13°20' - 16°40', सिंह नवांश, स्वामी सूर्य)
मुख्य गुण: महत्वाकांक्षा, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मकता
कहानी: कल्पना कीजिए, एक ऐसा व्यक्ति जो भीड़ में सबसे आगे चलता है, जिसके चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक है और जिसकी आंखों में बड़े सपनों की झलक है। यही है रोहिणी का प्रथम पाद। इस चरण में जन्मे जातक स्वभाव से महत्वाकांक्षी, जिद्दी और आत्मनिर्भर होते हैं। इनमें नेतृत्व की अद्भुत क्षमता होती है और वे अपनी रचनात्मकता को हकीकत में बदलना जानते हैं।
ये लोग प्रशासन, राजनीति, खेल, नृत्य, अभिनय और कला जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ते हैं। कभी-कभी स्वार्थ या अहंकार भी दिख सकता है, लेकिन इनकी ऊर्जा और आत्मविश्वास इन्हें भीड़ से अलग बनाते हैं।
विशेष: जीवन में जल्दी आगे बढ़ने की चाह, लेकिन दूसरों की भावनाओं को कभी-कभी नजरअंदाज कर सकते हैं।
(16°40' - 20°00', कन्या नवांश, स्वामी बुध)
मुख्य गुण: मेहनती, व्यावहारिक, विश्लेषणात्मक, परोपकारी
कहानी: इस पाद में जन्मा व्यक्ति जीवन को व्यवस्थित और अनुशासित पसंद करता है। उसकी सोच व्यावहारिक है, वह हर समस्या का समाधान तर्क और विवेक से निकालता है। सेवा-भाव, शिक्षा और समाज सुधार इनके स्वभाव में गहराई से जुड़ा है।
शिक्षा, चिकित्सा, लेखन, प्रशासन और समाज सेवा इनके उपयुक्त क्षेत्र हैं। इनकी कार्यशैली में पूर्णता और सेवा का भाव स्पष्ट दिखाई देता है।
विशेष: कभी-कभी आलोचनात्मक या संकोची हो सकते हैं, लेकिन जीवन उद्देश्यपूर्ण होता है।
रोहिणी नक्षत्र: कथा, पौराणिकता और वैदिक ज्योतिष में गहराई
(20°00' - 23°20', तुला नवांश, स्वामी शुक्र)
मुख्य गुण: सामंजस्य, आकर्षण, सौंदर्यबोध, न्यायप्रियता, विलासिता
कहानी: यह पाद समाज के आकर्षण का केंद्र है। इन जातकों में नैसर्गिक सुंदरता, संतुलन और कलात्मकता भरी होती है। ये लोग कला, संगीत, फैशन, न्याय, व्यापार और काउंसलिंग में आगे बढ़ते हैं।
इनकी सोच संतुलित होती है और संबंधों में सामंजस्य रखने में निपुण होते हैं। विलासिता और सुंदरता इनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
विशेष: कभी-कभी भोग-विलास या संबंधों में अस्थिरता आ सकती है।
(23°20' - 26°40', कर्क नवांश, स्वामी चंद्रमा)
मुख्य गुण: तीव्र ऊर्जा, गहराई, अन्वेषण, साहस, रहस्यप्रियता
कहानी: इस पाद के जातक संवेदनशील, भावनात्मक और रहस्यमय होते हैं। इनकी ऊर्जा गहरी और अन्वेषणशील होती है। ये लोग अनुसंधान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, रक्षा और परामर्श जैसे क्षेत्रों में आगे रहते हैं।
इनकी सोच गहरी होती है और परिवार, मातृत्व तथा भावनात्मक सुरक्षा का इन पर गहरा प्रभाव रहता है।
विशेष: दूसरों की भावनाओं को समझते हैं, लेकिन कभी-कभी अपने भावों में उलझ सकते हैं।
| पाद | डिग्री सीमा | नवांश राशि | स्वामी ग्रह | मुख्य गुण | उपयुक्त क्षेत्र |
|---|---|---|---|---|---|
| प्रथम | 13°20' - 16°40' | सिंह | सूर्य | महत्वाकांक्षा, नेतृत्व | प्रशासन, कला, राजनीति |
| द्वितीय | 16°40' - 20°00' | कन्या | बुध | व्यावहारिकता, सेवा | शिक्षा, चिकित्सा, समाज सेवा |
| तृतीय | 20°00' - 23°20' | तुला | शुक्र | सौंदर्य, आकर्षण | कला, संगीत, फैशन, व्यापार |
| चतुर्थ | 23°20' - 26°40' | कर्क | चंद्रमा | गहराई, संवेदनशीलता | अनुसंधान, मनोविज्ञान, चिकित्सा |
रोहिणी नक्षत्र के चार पाद जीवन के चार रंगों की तरह हैं। कहीं महत्वाकांक्षा है, कहीं सेवा, कहीं सौंदर्य और कहीं गहराई। हर पाद अपनी विशिष्ट ऊर्जा से जातक के स्वभाव और जीवन मार्ग को निर्देशित करता है। इन पादों की समझ व्यक्ति को जीवन में दिशा, संतुलन और सफलता की ओर ले जा सकती है।
1. रोहिणी नक्षत्र का सबसे महत्वाकांक्षी पाद कौन सा है?
प्रथम पाद, क्योंकि यह सिंह नवांश और सूर्य के प्रभाव में आता है।
2. कौन सा पाद कला और सौंदर्य के लिए सबसे उपयुक्त है?
तृतीय पाद, शुक्र के प्रभाव के कारण।
3. कौन सा पाद अनुसंधान और मनोविज्ञान के लिए अच्छा माना जाता है?
चतुर्थ पाद।
4. कौन सा पाद सबसे अधिक व्यावहारिक और विश्लेषणात्मक होता है?
द्वितीय पाद, क्योंकि यह कन्या नवांश और बुध से प्रभावित होता है।
5. क्या चारों पादों का स्वभाव एक-दूसरे से अलग होता है?
हाँ, प्रत्येक पाद अलग व्यक्तित्व, करियर और जीवन दृष्टिकोण प्रदान करता है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
अनुभव: 19
इनसे पूछें: विवाह, संबंध, करियर
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि, उ.प्र.
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें