By पं. अमिताभ शर्मा
जानिए कैसे ब्रह्मा देव रोहिणी नक्षत्र के माध्यम से सृजन, उर्वरता और समृद्धि की ऊर्जा प्रदान करते हैं

रोहिणी नक्षत्र वैदिक ज्योतिष का चौथा नक्षत्र है, जो वृषभ राशि में 10°00' से 23°20' तक फैला है। इसका स्वामी ग्रह चंद्रमा है और अधिष्ठाता देवता ब्रह्मा हैं, जो सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं। रोहिणी का प्रतीक रथ या बैलगाड़ी है, जो सृजन, गति और भौतिक समृद्धि का सूचक है।
रोहिणी नक्षत्र: कथा, पौराणिकता और वैदिक ज्योतिष में गहराई
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| नक्षत्र क्रम | 4 |
| राशि सीमा | वृषभ 10°00' - 23°20' |
| स्वामी ग्रह | चंद्रमा |
| अधिष्ठाता देवता | ब्रह्मा |
| तत्त्व | पृथ्वी |
| शक्ति | रोहण शक्ति |
| गण | मानव |
| योनि | पुरुष सर्प |
ब्रह्मा वैदिक दर्शन में सृष्टि के मूल कारण हैं। ऋग्वेद में उन्हें हिरण्यगर्भ कहा गया है। उनके चार मुख और चार हाथ ज्ञान, दिशा और सृजन का प्रतीक हैं।
ब्रह्मा की विधातृ शक्ति रोहिणी में वृद्धि और विकास के रूप में प्रकट होती है। इस नक्षत्र के जातक कृषि, कला और भौतिक समृद्धि वाले क्षेत्रों में सफल होते हैं।
पद्म पुराण के अनुसार ब्रह्मा ने सृष्टि की शुरुआत रोहिणी नक्षत्र से ही की। यहीं से प्रजापतियों और वेदों का सृजन प्रारंभ हुआ।
जब विष्णु क्षीरसागर में शयन कर रहे थे, तब ब्रह्मा उनकी नाभि से उत्पन्न कमल से प्रकट हुए। उन्होंने रोहिणी की ऊर्जा से प्रेरित होकर वेदों, सप्तर्षियों और पृथ्वी पर जीवन की बीज रूप में स्थापना की।
ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का प्रकट होना रोहिणी नक्षत्र में ब्रह्मा की प्रेरणा से हुआ। इसलिए रोहिणी जातक कलात्मक, संगीतप्रिय और ज्ञानवान होते हैं।
| गुण | अभिव्यक्ति |
|---|---|
| सृजनात्मकता | कला, संगीत, वास्तु में उत्कृष्टता |
| उर्वरता | कृषि, निवेश और व्यवसाय में सफलता |
| आकर्षण | व्यक्तित्व में सौम्यता और प्रभावशीलता |
| दृढ़ संकल्प | लक्ष्य प्राप्ति तक अडिग रहना |
| समृद्धि | धन और सुख-सुविधाओं का संचय |
ॐ वेदात्मने विधिमहे कमलासनाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात्
108 बार प्रातःकाल जाप करें।
"ब्रह्मा की सृजन शक्ति हर रोहिणी जातक के भीतर विद्यमान है।"
1. रोहिणी नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता कौन हैं?
ब्रह्मा देव।
2. रोहिणी का मुख्य प्रतीक क्या है?
रथ या बैलगाड़ी।
3. इस नक्षत्र के जातक किन क्षेत्रों में सफल होते हैं?
कला, कृषि, व्यवसाय, संगीत और रचनात्मक कार्य।
4. ब्रह्मा का रोहिणी नक्षत्र से क्या संबंध है?
यह नक्षत्र ब्रह्मा की सृजन शक्ति का प्रत्यक्ष रूप है।
5. रोहिणी नक्षत्र के लिए कौन सा मंत्र शुभ माना जाता है?
ॐ वेदात्मने विधिमहे कमलासनाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात्।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
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