रोहिणी नक्षत्र वैदिक ज्योतिष का चौथा नक्षत्र है। यह वृषभ राशि में 10°00' से 23°20' तक फैला है और इसका स्वामी ग्रह चंद्रमा है। इसका अधिष्ठाता देवता प्रजापति ब्रह्मा हैं। रोहिणी नक्षत्र समृद्धि, पोषण, प्रेम, वृद्धि और आकर्षण का प्रतीक है। इसे चंद्रमा के लिए सबसे प्रिय नक्षत्र माना जाता है।
रोहिणी नक्षत्र: मूल विवरण
| विशेषता | विवरण |
|---|
| नक्षत्र क्रम | 4 (चौथा) |
| राशि सीमा | वृषभ 10°00' - 23°20' |
| स्वामी ग्रह | चंद्रमा |
| अधिष्ठाता देवता | ब्रह्मा (प्रजापति) |
| प्रतीक | बैलगाड़ी, रथ, लाल गाय |
| तत्व | पृथ्वी |
| शक्ति | रोहण शक्ति (वृद्धि और सृजन) |
| शुभ रंग | सफेद, लाल |
| शुभ वृक्ष | जामुन |
| गण | मानव |
| गुण | रजस |
पौराणिक कथाएँ
1. चंद्रमा और रोहिणी: प्रेम और श्राप की कथा
- दक्ष प्रजापति की 27 पुत्रियाँ चंद्रमा को विवाह में मिलीं। चंद्रमा का प्रेम रोहिणी पर अधिक केंद्रित था, जिससे अन्य पत्नियाँ क्रोधित हुईं। उन्होंने दक्ष से शिकायत की।
- दक्ष ने चंद्रमा को श्राप दिया कि उसकी चमक क्षीण हो जाएगी।
- चंद्रमा ने शिव की आराधना की और शिव ने श्राप को आंशिक रूप से शिथिल किया।
- यही कारण है कि चंद्रमा घटता-बढ़ता है।
- यह कथा रोहिणी की सुंदरता और चंद्रमा के प्रति उसकी प्रियता का प्रतीक है।
2. सृष्टि-रचना और ब्रह्मा का संबंध
- ब्रह्मा ने सृष्टि की शुरुआत रोहिणी ऊर्जा से की।
- "रोहिणी" का अर्थ है — वृद्धि, उगना, पोषण।
- यह नक्षत्र नए आरंभ, रचनात्मकता, जन्म और समृद्धि का प्रतिनिधि है।
3. श्रीकृष्ण का जन्म
- श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था।
- इससे नक्षत्र की पवित्रता और शुभता और भी बढ़ जाती है।
4. बलराम और रोहिणी का मातृत्व
- बलराम का भ्रूण देवकी के गर्भ से योगमाया द्वारा रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित किया गया।
- इसी कारण बलराम को रोहिणी-नंदन कहा जाता है।
- यह नक्षत्र मातृत्व, सुरक्षा और पालन-पोषण की ऊर्जा को उजागर करता है।
5. जैन परंपरा में रोहिणी व्रत
- जैन ग्रंथों में वर्णित है कि रानी रोहिणी ने व्रत, सेवा और संयम से मोक्ष प्राप्त किया।
- यह कथा आत्मशुद्धि और तप की महिमा को दर्शाती है।
ब्रह्मा देव: रोहिणी नक्षत्र के अधिष्ठाता और सृजन के देवता
खगोलीय और ज्योतिषीय तथ्य
| गुण | विवरण |
|---|
| नक्षत्र सीमा | वृषभ 10°00' - 23°20' |
| सबसे चमकीला तारा | Aldebaran |
| तत्व | पृथ्वी |
| गुण | रजस |
| स्वामी ग्रह | चंद्रमा |
| अधिष्ठाता | ब्रह्मा |
| योनि | पुरुष सर्प |
चार पद और उनके प्रभाव
| पद | नवांश राशि | स्वामी ग्रह | मुख्य गुण |
|---|
| पहला | मेष | मंगल | ऊर्जा, साहस, महत्वाकांक्षा |
| दूसरा | वृषभ | शुक्र | सौंदर्य, आकर्षण, भौतिक समृद्धि |
| तीसरा | मिथुन | बुध | कला, बुद्धिमत्ता, संचार कौशल |
| चौथा | कर्क | चंद्रमा | भावुकता, मातृत्व, संवेदनशील स्वभाव |
व्यक्तित्व, स्वभाव और जीवन लक्ष्य
प्रमुख विशेषताएँ
- कला, संगीत, डिजाइन, सौंदर्य और रचनात्मकता में गहरी रुचि
- भौतिक सुखों से प्रेम
- आकर्षक व्यक्तित्व
- परिवार और संबंधों में गहरा लगाव
- भावुक और कल्पनाशील प्रवृत्ति
कमजोरियाँ
- हठ और जिद
- अत्यधिक लगाव और ईर्ष्या
- संवेदनशीलता के कारण भावनात्मक असंतुलन
- विलासिता की अधिकता
पुरुष जातक की विशेषताएँ
- आकर्षक, लंबा और प्रभावशाली व्यक्तित्व
- व्यावसायिक और कलात्मक क्षेत्रों में सफलता
- भावुक, लेकिन प्रयासशील और महत्वाकांक्षी
महिला जातक की विशेषताएँ
- सौंदर्य, शिष्टता और कला में महारत
- परिवार के प्रति समर्पण
- आत्मविश्वासी और भावुक
करियर और सफलता के क्षेत्र
| क्षेत्र | अनुकूलता | कारण |
|---|
| कला, संगीत, फैशन | ★★★★★ | रचनात्मकता |
| कृषि, व्यापार | ★★★★☆ | संसाधन प्रबंधन |
| शिक्षा, लेखन | ★★★★☆ | बुद्धिमत्ता और संचार |
| मीडिया, फिल्म | ★★★★☆ | आकर्षण और अभिव्यक्ति |
| पोषण, चिकित्सा | ★★★★☆ | सेवा और देखभाल |
विवाह, संबंध और अनुकूलता
उपयुक्त नक्षत्र
- कृतिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, रेवती, श्रवण, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा
सावधानी
स्वास्थ्य और उपाय
संभावित स्वास्थ्य चुनौतियाँ
- गला, गर्दन
- थायरॉइड
- शुगर
- भावनात्मक तनाव
उपाय
- शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करें
- “ॐ ब्राह्मयै नमः” मंत्र का जाप
- सोमवार व्रत
- हीरा या सफेद पुखराज धारण करें
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व
- विवाह, गृह-प्रवेश, नई शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ
- कृष्ण जन्म से इसकी पवित्रता बढ़ती है
- ब्रह्मा की रचनात्मक ऊर्जा से जुड़ा नक्षत्र
FAQs
1. रोहिणी नक्षत्र चंद्रमा का प्रिय क्यों है?
क्योंकि यह सौंदर्य, प्रेम, आकर्षण और पोषण की ऊर्जा का प्रतिनिधि है।
2. रोहिणी नक्षत्र में जन्मे लोग किस क्षेत्र में सफल होते हैं?
कला, संगीत, व्यापार, मीडिया और डिजाइन में।
3. इसका अधिष्ठाता देवता कौन है?
प्रजापति ब्रह्मा।
4. क्या यह विवाह के लिए शुभ है?
हाँ, यह शादी और गृहस्थ जीवन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
5. इस नक्षत्र का सबसे चमकीला तारा कौन है?
एल्डेबेरन, आकाश में सबसे चमकीले तारों में से एक।