By अपर्णा पाटनी
जानिए दशम भाव का वैदिक महत्व, करियर, कर्तव्यों, सामाजिक छवि, प्रतिष्ठा और उत्तरार्ध जीवन में इसकी भूमिका की गहराई

वैदिक ज्योतिष में दशम भाव को कर्म स्थान व्यवसाय भाव और राज्य स्थान के रूप में जाना जाता है। यह भाव जातक के कार्यक्षेत्र पेशा सामाजिक सम्मान महत्वाकांक्षा और जीवन की दिशा का सूचक है। जिस प्रकार लग्न यह बताता है कि व्यक्ति कौन है उसी प्रकार दशम भाव यह दर्शाता है कि व्यक्ति समाज के सामने कैसी पहचान बनाएगा और जीवन में कैसी ऊँचाई प्राप्त करेगा।
दशम भाव विशेष रूप से जीवन के उत्तरार्ध में सक्रिय होता है जब व्यक्ति अपने करियर की स्थिरता और सामाजिक योगदान के शिखर पर पहुँचता है।
शनि ग्रह: कर्म का कठोर न्यायाधीश और आध्यात्मिक मार्गदर्शक
| तत्त्व | विवरण |
|---|---|
| भाव संख्या | दशम भाव |
| प्राकृतिक राशि | मकर |
| तत्व | पृथ्वी |
| स्वाभाविक ग्रह | शनि |
| कारक ग्रह | सूर्य शनि बृहस्पति बुध |
| भाव का प्रकार | केन्द्र और अर्थ त्रिकोण |
| क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| कर्म और करियर | व्यक्ति किस प्रकार का कार्य करेगा नौकरी व्यवसाय सरकारी सेवा निजी क्षेत्र पद प्रमोशन स्थिरता विदेश या दूरस्थ कार्य शैली |
| सामाजिक प्रतिष्ठा | सार्वजनिक छवि सम्मान प्रभाव और प्रतिष्ठा |
| पिता और वरिष्ठजन | पिता की स्थिति उम्र से संबंध क्या जातक उनसे आगे बढ़ता है या नहीं |
| प्रेरणा और महत्वाकांक्षा | जीवन की दिशा नेतृत्व क्षमता लक्ष्य |
| शारीरिक बल और स्वास्थ्य | शरीर की शक्ति शरीर की सहनशीलता और जीवनशैली |
| जीवन का उत्तरार्ध | पचास वर्ष के बाद की उपलब्धियाँ और सामाजिक योगदान |
| ग्रह | शुभ प्रभाव | अशुभ प्रभाव |
|---|---|---|
| सूर्य | नेतृत्व सरकारी सेवा उच्च पद सम्मान | अहंकार करियर में अस्थिरता पिता से मतभेद |
| चंद्रमा | सामाजिक संस्थाओं में सम्मान मित्रता दान | भावनात्मक उतार चढ़ाव करियर में अनिश्चितता |
| मंगल | साहस सेना कृषि खेल व्यापार में उन्नति | विवाद आक्रामकता जल्दबाजी से हानि |
| बुध | व्यापार लेखन शिक्षा धर्मार्थ कार्य | भ्रम बार बार करियर परिवर्तन |
| गुरु | सदाचार धन शिक्षा कृषि में लाभ | अवसर चूकना आलस्य |
| शुक्र | कला विधि शिक्षा न्यायिक सेवा | भोगविलास अनावश्यक खर्च |
| शनि | कठोर परिश्रम के बाद सफलता विदेश यात्रा | विलंब बाधाएँ स्वास्थ्य समस्या |
| राहु | तकनीकी क्षेत्र राजनीति असामान्य सफलता | विवाद धोखा अस्थिरता |
| केतु | अनुसंधान समाज सेवा आध्यात्मिक दृष्टि | स्पष्टता की कमी करियर दिशा अस्पष्ट |
जब दशमेश या दशम भाव त्रिकोण या केन्द्र से संबंधित होकर शुभ ग्रहों से युक्त होता है तब जातक असाधारण सफलता प्राप्त करता है।
दशमेश यह बताता है कि व्यक्ति किस दिशा में करियर बनाएगा कौन से अवसर बढ़ेंगे और किन चुनौतियों का सामना करना होगा।
यदि दशम भाव में कोई नीच ग्रह स्थित हो और उसका नीचभंग बन रहा हो तो संघर्षों के बाद व्यक्ति अत्यधिक प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।
दशम भाव स्त्री की सामाजिक पहचान स्वतंत्रता और कार्यक्षेत्र में प्रगति का प्रमुख संकेतक है।
दशम भाव यह स्पष्ट करता है कि व्यक्ति दुनिया के लिए क्या बनकर आता है। यह भाव पहचान महत्वाकांक्षा और कर्म के स्वरूप को आकार देता है। जब यह भाव सशक्त हो तो जातक सम्मानित प्रतिष्ठित और अपने क्षेत्र में अग्रणी होता है। यदि कमजोर हो तो करियर में उतार चढ़ाव और स्थिरता में बाधाएँ आती हैं।
दशम भाव करियर क्यों दर्शाता है
क्योंकि यह कर्म दिशा पेशा और सामाजिक भूमिका का भाव है।
क्या दशम भाव पिता को भी दर्शाता है
हाँ दशम भाव से पिता की स्थिति और संबंध देखे जाते हैं।
कौन सा ग्रह करियर में सबसे अधिक प्रभाव डालता है
सूर्य शनि बुध और बृहस्पति मुख्य कारक माने जाते हैं।
दशम भाव मजबूत होने पर क्या फल मिलता है
उच्च पद सम्मान स्थिर करियर और समाज में मान्यता।
क्या दशम भाव विदेश में करियर देता है
हाँ शनि राहु मंगल या दशमेश की विदेश संकेत देने वाली स्थिति में ऐसे योग बनते हैं।
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