By अपर्णा पाटनी
जानिए तृतीय भाव का वैदिक महत्व, साहस, संचार क्षमता, भाई-बहनों के संबंध और व्यक्तिगत विकास में इसकी भूमिका

कुंडली का तृतीय भाव वैदिक ज्योतिष में ऐसा केंद्र माना जाता है जहां से व्यक्ति के भीतर छिपे साहस का स्वरूप उभरता है। यह भाव बताता है कि जीवन की परिस्थितियों से सामना करने के लिए भीतर कितना धैर्य है और चुनौतियों के समय मन कितना स्थिर रहता है। कई प्राचीन ग्रंथों में तृतीय भाव को पराक्रम और प्रयास का आधार माना गया है। यह वह स्थान है जो मनुष्य को संघर्षों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
ज्योतिष शास्त्र: जीवन का मार्गदर्शक प्राचीन विज्ञान
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| भाव संख्या | 3 तीसरा भाव |
| नाम | तृतीय भाव सहज भाव पराक्रम भाव |
| काल पुरुष राशि | मिथुन Gemini |
| तत्व | वायु Air |
| स्वाभाविक कारक ग्रह | मंगल Mars |
| स्वामी ग्रह काल पुरुष के अनुसार | बुध Mercury |
| कारक ग्रह | मंगल Mars |
तृतीय भाव उस शक्ति को दर्शाता है जिसे मनुष्य अपने कर्मों से अर्जित करता है। यह भाव जीवन की गतिविधियों को गति देता है और व्यक्ति को यह समझने में मदद करता है कि आगे बढ़ने के लिए किस प्रकार का प्रयास आवश्यक है।
| क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| साहस और पराक्रम | कठिन परिस्थितियों में कैसी प्रतिक्रिया होगी यह इसी भाव से देखा जाता है। मजबूत होने पर जातक निडर और निर्णायक होता है। |
| भाई बहन | छोटे भाई बहनों की स्थिति और संबंधों का आकलन इसी भाव से किया जाता है। |
| संचार और बुद्धिमत्ता | लेखन कला भाषण संवाद और मानसिक चातुर्य का संबंध इसी भाव से है। |
| छोटी यात्राएं | व्यापारिक यात्राएं नजदीकी भ्रमण और पड़ोसियों से संबंध तृतीय भाव से देखे जाते हैं। |
| शारीरिक अंग | हाथ कंधे गर्दन और छाती के ऊपरी भाग का संबंध इस भाव से है। |
| युवावस्था | जीवन के प्रारंभिक संघर्ष और प्रयास इसी भाव से जुड़े होते हैं। |
| कलात्मक झुकाव | संगीत चित्रकारी नृत्य और रचनात्मक गतिविधियां यदि शुक्र बुध या चंद्रमा शुभ हो तो बढ़ती हैं। |
| ग्रह | फल |
|---|---|
| सूर्य | नेतृत्व शक्ति बढ़ती है पर भाई से दूरी हो सकती है |
| चंद्रमा | रचनात्मकता और भावनात्मक लगाव बढ़ता है |
| मंगल | साहस निर्णय क्षमता और शारीरिक सक्रियता में वृद्धि |
| बुध | लेखन संवाद और बुद्धि का विकास |
| गुरु | ज्ञान विस्तार और भाई बहनों को मार्गदर्शन |
| शुक्र | कला संगीत और आकर्षक व्यक्तित्व |
| शनि | संबंधों में दूरी प्रयास धीमे पर स्थिर |
| राहु केतु | अस्थिरता भ्रम और अचानक घटनाएं |
मजबूत तृतीय भाव जातक में संघर्ष करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। इसमें निम्न गुण देखे जाते हैं
ऐसी स्थिति में निम्न परिणाम देखने को मिलते हैं
इस युति से जातक में बुद्धि और साहस दोनों बढ़ते हैं जिससे तकनीकी क्षेत्र सेना या प्रशासन में सफलता मिलती है।
यह कठिनाई बढ़ाती है पर व्यक्ति को धैर्यवान और अनुशासित बनाती है।
अचानक यात्राएं संवाद में भ्रम और गुप्त विरोधी इसकी पहचान हैं।
कुंडली का तीसरा भाव व्यक्ति के आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति की जड़ है। यह भाव जितना मजबूत होता है व्यक्ति उतना ही दृढ़ और साहसी बनता है। कमजोर होने पर कई बाधाएं और अस्थिरता जीवन में सामने आती है पर सही प्रयास और जागरूकता से इन स्थितियों को सुधारा जा सकता है।
तृतीय भाव कौन से जीवन क्षेत्रों को प्रभावित करता है
यह भाव साहस भाई बहन संचार और छोटी यात्राओं का प्रतिनिधित्व करता है।
तृतीय भाव में मंगल होने पर क्या फल मिलता है
मंगल से साहस बढ़ता है और व्यक्ति निर्णायक स्वभाव का होता है।
क्या तृतीय भाव से लेखन क्षमता देखी जाती है
हां बुध या शुक्र शुभ हों तो लेखन संवाद और कला में सफलता मिलती है।
राहु केतु का तृतीय भाव पर क्या प्रभाव होता है
इनसे अस्थिरता भ्रम और अचानक परिवर्तन आते हैं।
तृतीय भाव मजबूत कैसे माना जाता है
जब शुभ ग्रह स्थित हों तृतीयेश उच्च हो या शुभ दृष्टि से युक्त हो तो भाव मजबूत माना जाता है।
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