By अपर्णा पाटनी
जानिए हनुमान जी के अमरत्व के पीछे की आध्यात्मिक कारण, इतिहास और प्रेरणा

हनुमान जी भारतीय धर्म और अध्यात्म में चिरंजीवी के रूप में पूजित हैं। वे वायु देव के पुत्र, अटूट भक्ति के प्रतीक और संकटमोचन के रूप में प्रसिद्ध हैं। चिरंजीवी शब्द केवल कुछ महापुरुषों के लिए प्रयुक्त होता है और उनमें हनुमान जी सबसे प्रमुख माने जाते हैं। वे सदैव अपने भक्तों के लिए सन्निहित और सक्रिय माने जाते हैं क्योंकि उनका अस्तित्व काल के बंधन से परे है।
लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को वरदान दिया कि जब तक संसार में राम का नाम गाया जाएगा, तब तक हनुमान जी पृथ्वी पर रहेंगे। राम का नाम सनातन है, इसलिए हनुमान जी का अस्तित्व भी अनन्त है।
हनुमान जी की अमरता का मूल कारण उनका सेवाभाव है। उन्होंने कभी अपना हित नहीं चाहा। उनका संकल्प केवल राम की सेवा था। सेवा वह सद्गुण है जो कभी समाप्त नहीं होता, इसलिए जो सेवा को जीता है वह स्वयं अमर हो जाता है।
बचपन में इन्द्र के वज्र प्रहार से बचने पर उन्होंने देवताओं से विशेष आशीर्वाद प्राप्त किए। अग्नि से सुरक्षा, जल से अभेद्यता, वायु से ऊर्जा और आत्मिक शक्ति, इन सबने उन्हें अजेय और अमरत्व प्रदान किया।
सात चिरंजीवियों में हनुमान जी एक हैं। कलयुग में धर्म, भक्ति और साधना के संरक्षण का दायित्व उनका है। भक्तों के अनुसार जब भी धर्म संकट में आता है, हनुमान जी की उपस्थिति अनुभव होती है।
आध्यात्मिक दृष्टि से हनुमान जी प्राण शक्ति के स्वरूप हैं। उनके पिता वायु देव सांस के माध्यम से जीवन को गति देते हैं। जिस प्रकार प्राण शाश्वत है, उसी प्रकार हनुमान जी की ऊर्जा भी अनन्त मानी जाती है।
हनुमान जी भय और बाधाओं को नष्ट करने वाले देवता हैं। हनुमान चालीसा में भी बताया गया है कि उनकी कृपा से शत्रु और संकट दूर होते हैं। उनका अमर स्वरूप बताता है कि साहस और सच्चा मनोबल कभी नष्ट नहीं होता।
संत तुलसीदास सहित अनेक संतों ने हनुमान जी की जीवंत उपस्थिति का अनुभव किया। आधुनिक साधक भी इस अनुभूति को साझा करते हैं। यह मान्यता उन्हें युगों से जीवित देवता के रूप में स्थापित करती है।
अन्य देवता स्वर्ग में निवास करते हैं, पर हनुमान जी लोक में विचरण करते हैं। वे दीनों के सहायक, दुःखी के रक्षक और भक्तों के सच्चे मित्र हैं। उनका चिरंजीवी रूप संसार और आध्यात्मिक जगत के बीच स्थायी सेतु है।
हनुमान जी की अमरता केवल कथा नहीं है। यह सेवा, साहस, सद्भाव, समर्पण और प्रेम जैसे गुणों की अमरता का संकेत है। मृत्यु इन सद्गुणों को स्पर्श नहीं कर सकती। हनुमान जी का नाम लेने से उनकी शक्ति भक्त को नवीन जीवन प्रदान करती है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| अमरता का वरदान | भगवान राम का शाश्वत आशीर्वाद |
| निस्वार्थ सेवा | सेवा की ऊर्जा अमर मानी जाती है |
| देवताओं के आशीर्वाद | अग्नि, जल, वायु, इन्द्र आदि से संरक्षण |
| कलयुग में भूमिका | धर्म और भक्ति के रक्षक |
| प्राण शक्ति का स्वरूप | श्वास और ऊर्जा का आध्यात्मिक प्रतीक |
| अनन्त साहस | भय विनाशक और बल का स्रोत |
| युगों से उपस्थिति | भक्तों के साथ निरंतर संबंध |
| दिव्य और मानव सेतु | संसार में सक्रिय उपस्थिति |
1. हनुमान जी को चिरंजीवी क्यों कहा जाता है
भगवान राम ने उन्हें वरदान दिया कि जब तक राम का नाम रहेगा, वे पृथ्वी पर रहेंगे।
2. क्या हनुमान जी आज भी पृथ्वी पर हैं
परंपराओं के अनुसार वे कलयुग में धर्म के रक्षक के रूप में अभी भी सक्रिय हैं।
3. देवताओं के आशीर्वाद से उन्हें क्या मिला
अग्नि, जल, वायु और इन्द्र से रक्षा, शक्ति और अमरत्व का आधार।
4. हनुमान जी प्राण के प्रतीक क्यों माने जाते हैं
क्योंकि वे वायु पुत्र हैं और सांस से संबंधित ऊर्जा जीवन की मूल शक्ति है।
5. क्या हनुमान जी का दर्शन आज भी संभव है
अनेक संत और साधक उनकी उपस्थिति का अनुभव होने की गवाही देते हैं।
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