By पं. अमिताभ शर्मा
जानिए नागलोक के रहस्य और आठ प्रमुख नागों की उत्पत्ति की कथा, भारतीय सांस्कृतिक विरासत का विशिष्ट हिस्सा।

एक प्राचीन कथा जब किसी सभ्यता की आत्मा को छू लेती है तो वह केवल शब्दों का संग्रह नहीं रहती. नागलोक से जुड़ी कहानियाँ मनुष्य की गहरी आध्यात्मिक जिज्ञासाओं को स्पर्श करती हैं. इन कथाओं में केवल भय नहीं बल्कि वह ऊर्जा दिखाई देती है जो परिवर्तन और संरक्षण को साथ लेकर चलती है. नागों का नाम लेते ही भारतीय चेतना में शक्ति संतुलन स्थिरता और गहन ज्ञान की उपस्थिति महसूस होती है.
नागलोक को सात पाताल लोकों के मध्य स्थित एक दिव्य क्षेत्र माना गया है जहाँ सामान्य दृष्टि नहीं पहुँच सकती. यह लोक अंधकार रहित माना जाता है क्योंकि रत्नों और मणियों का नैसर्गिक प्रकाश इसे आलोकित करता है. यहाँ भव्य महल अलौकिक जलधारा और शांत वातावरण का वर्णन मिलता है.
नाग कुलों की संतति नागकन्याएँ और अनेक दिव्य प्रहरी यहाँ निवास करते हैं. उनके विषय में कहा गया है कि आयु अत्यंत दीर्घ होती है और स्मृति तथा तांत्रिक क्षमता अत्यंत प्रखर होती है. संरक्षण और तप उनका स्वभाविक गुण माना जाता है.
महाभारत और पुराणों में नागलोक का वर्णन अनेक बार मिलता है. नागपंचमी जैसे पर्व नागों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं. उज्जैन कश्मीर सतपुड़ा पर्वत और नागद्वार जैसे प्राचीन स्थलों में नाग पूजा की परंपराएँ आज भी जीवित हैं.
कश्यप की पत्नी कद्रू ने एक सहस्र नाग पुत्रों का वर माँगा था. वर प्राप्त होने के बाद नागों की विशाल संतति का जन्म हुआ. इस संतति में आठ नाग इतने प्रसिद्ध हुए कि उन्हें अष्टनाग कहा गया.
अष्टनाग हैं
शेष
वासुकी
तक्षक
कर्कोटक
कालिया
मणिभद्र
ऐरावत
धनंजय
इनके अतिरिक्त कुछ ग्रंथों में पद्म शंख कुलिक आदि के नाम भी मिलते हैं.
नागों के विषय में कई कथाएँ मिलती हैं जो तप संतुलन परिवर्तन और धैर्य का संदेश देती हैं. नीचे सारणी इनके मूल संदर्भ और संकेत प्रस्तुत करती है.
| नाग | उत्पत्ति या कहानी | प्रतिष्ठात्मक अंतर्दृष्टि |
|---|---|---|
| शेष | कद्रू के ज्येष्ठ पुत्र. पृथ्वी को फन पर धारण करने का वर | अनंतता, संतुलन, विष्णु का आधार, स्थिरता |
| वासुकी | शिव के गले का आभूषण. समुद्र मंथन में रस्सी | भक्ति, त्याग, नेतृत्व |
| तक्षक | परीक्षित के वध की कथा. इंद्र की शरण | अस्तित्व, रक्षा, शक्ति, न्याय |
| कर्कोटक | तपस्या के बाद कर्कोटेश्वर से जुड़ाव | परिवर्तन, अनुशासन, कर्मजागरण |
| कालिया | यमुना में वास. कृष्ण द्वारा दमन | अहंकार का अंत, करुणा, शुद्धि |
| मणिभद्र | वासुकी के वंशज. उज्जैन में प्रतिष्ठित | रक्षकभाव, लोककल्याण |
| ऐरावत | इंद्र का वाहन. कद्रू का पुत्र | जल, शक्ति, दैवी उपस्थिति |
| धनंजय | अष्टकुल में स्थान. नागपंचमी में पूजित | संपन्नता, सुरक्षा |
कद्रू और विनता की कथा - नागों की उत्पत्ति और गरुड़-नाग शत्रुता
हिमालय की घाटियाँ कश्मीर की झीलें उज्जैन के मंदिर और मध्य भारत के सतपुड़ा अंचल में नाग पूजा के विविध रूप देखने को मिलते हैं. लोकमानस में यह विश्वास आज भी जीवित है कि नाग प्रकृति और ऊर्जा के रक्षक हैं.
नागपंचमी के दिन दूध पुष्प दूर्वा और कंकण से नागों की पूजा की जाती है. आस्थावान लोग मानते हैं कि नागों का आशीर्वाद वर्षा कृषि सुरक्षा और परिवार की समृद्धि में सहायक होता है.
नाग अनंतता संतुलन तांत्रिक ऊर्जा आत्मरक्षा और ज्ञान के प्रतीक हैं. शेषनाग द्वारा पृथ्वी धारण करने का उल्लेख संतुलन के सिद्धांत को दर्शाता है. वेदों में नागों को प्रकृति के प्रहरी कहा गया है.
शेष का धैर्य वासुकी की सेवा कर्कोटक का तप कालिया का अहंकार त्याग मणिभद्र की लोकसेवा और तक्षक की आत्मरक्षा यह सब जीवन के गहरे सिद्धांत बताते हैं. यह कथाएँ संकेत देती हैं कि शक्ति का उपयोग संरक्षण के लिए होना चाहिए और परिवर्तन को स्वीकार करना ही आगे बढ़ने का मार्ग है.
नागलोक की कथाएँ भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों से जुड़ी हैं. यह मनुष्य को सिखाती हैं कि संतुलन विनम्रता सेवा ज्ञान और आत्मरक्षा जीवन को स्थिर रखते हैं. परिवर्तन निरंतर चलता रहता है पर धैर्य और संतुलन मार्गदर्शक बनते हैं.
अष्टनागों को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है
अष्टनागों की शक्तियों कथाओं और दैवी भूमिकाओं के कारण उन्हें प्रकृति के रक्षक माना जाता है.
नागलोक को पाताल से क्यों जोड़ा जाता है
क्योंकि इसे धरती के नीचे स्थित एक दिव्य लोक कहा गया है.
नागपंचमी में नाग पूजा का क्या अर्थ है
नागों की कृपा वर्षा कृषि और सुरक्षा में सहायक मानी जाती है.
शेषनाग विष्णु का आधार क्यों कहलाते हैं
क्योंकि वे अनंतता और स्थिरता के प्रतीक हैं.
कालिया नाग की कथा क्या संदेश देती है
यह बताती है कि अहंकार का अंत करुणा से होता है.
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