By पं. संजीव शर्मा
जानिए तक्षक नाग, राजा परीक्षित, नाग यज्ञ और आस्तिक मुनि की करुणा से भरी कहानी, जिसमें छुपे हैं क्षमा और संतुलन के संदेश।

महाभारत और पुराणों में तक्षक नाग की कथा प्रतिशोध, करुणा, धर्म और संतुलन का गहन संदेश देती है। यह कथा न केवल नागों के इतिहास को दर्शाती है, बल्कि मानव जीवन में क्षमा, विवेक और संतुलन के महत्व को भी उजागर करती है।
महाभारत युद्ध के बाद पांडव वंश के परीक्षित हस्तिनापुर के राजा बने। एक दिन शिकार के दौरान वे ऋषि शमीक के आश्रम पहुँचे। ऋषि ध्यान में लीन थे और उत्तर न मिलने पर परीक्षित ने क्रोधवश मृत सर्प को उनके गले में डाल दिया।
यह अपमान देखकर ऋषि के पुत्र श्रृंगी ने परीक्षित को शाप दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु होगी।
सातवें दिन, शाप के अनुसार तक्षक नाग ने छल से परीक्षित तक पहुँचकर उन्हें डस लिया। परीक्षित की मृत्यु के साथ ही कुरुवंश का अंत भी हो गया।
नागलोक और नागों की उत्पत्ति - रहस्य, शक्ति और सांस्कृतिक विरासत
राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने पिता की मृत्यु का बदला लेने का निश्चय किया। उन्होंने विशाल नाग यज्ञ किया, जिसमें मंत्रों की शक्ति से सभी नागों को यज्ञकुंड में खींचा जा रहा था।
नाग यज्ञ से बचने के लिए तक्षक नाग इंद्र की शरण में गए। इंद्र ने उन्हें अपने सिंहासन के नीचे छुपा लिया। लेकिन यज्ञ की शक्ति इतनी प्रबल थी कि इंद्र सहित तक्षक भी यज्ञकुंड की ओर आकर्षित होने लगे।
आस्तिक मुनि, जो ब्राह्मण माता और नाग पिता के पुत्र थे, नागों के विनाश से दुखी हुए। वे यज्ञ स्थल पहुँचे और जनमेजय से यज्ञ रोकने का आग्रह किया।
उनकी विद्वता और विनम्रता से प्रभावित होकर जनमेजय ने उनसे वर माँगने को कहा। आस्तिक ने नागों की रक्षा के लिए यज्ञ रोकने का वर माँगा और जनमेजय ने इसे स्वीकार किया। इस प्रकार तक्षक सहित असंख्य नागों का जीवन बच गया।
तक्षक नाग की कथा सिखाती है कि प्रतिशोध केवल विनाश की ओर ले जाता है, जबकि क्षमा और करुणा जीवन में शांति लाते हैं।
नागों की रक्षा प्रकृति और जीवों के प्रति कर्तव्य और संतुलन का प्रतीक है।
आस्तिक मुनि बताते हैं कि धर्म और करुणा से ही समाज में संतुलन और सद्भाव बना रहता है।
| पात्र | भूमिका / घटना | संदेश |
|---|---|---|
| तक्षक नाग | परीक्षित वध, इंद्र की शरण | शक्ति, अस्तित्व, रक्षा |
| राजा परीक्षित | ऋषि का अपमान, तक्षक से मृत्यु | अहंकार, शाप, परिणाम |
| जनमेजय | नाग यज्ञ, प्रतिशोध | क्रोध, विनाश |
| आस्तिक मुनि | नागों की रक्षा, यज्ञ का रोकना | करुणा, धर्म, संतुलन |
1. तक्षक नाग कौन थे?
तक्षक नाग शक्तिशाली नागों में से एक थे और कश्यप व कद्रू के पुत्र माने जाते हैं।
2. राजा परीक्षित की मृत्यु कैसे हुई?
ऋषि के पुत्र श्रृंगी के शाप के अनुसार तक्षक नाग ने डसकर उनकी मृत्यु की।
3. नाग यज्ञ क्यों हुआ?
राजा जनमेजय ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए नाग यज्ञ किया।
4. आस्तिक मुनि ने नागों को कैसे बचाया?
उन्होंने जनमेजय से यज्ञ रोकने का वर माँगा और स्वीकार करवाया।
5. तक्षक नाग की कथा हमें क्या सिखाती है?
यह कथा करुणा, क्षमा, संतुलन और विवेक के महत्व को दर्शाती है।
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