By अपर्णा पाटनी
कार्तिकेय की उत्पत्ति, कृतिकाओं का मातृत्व और कृतिका नक्षत्र का अग्नि से संबंध

कृत्तिका नक्षत्र वैदिक ज्योतिष में अग्नि, शुद्धिकरण, साहस और पुनर्जन्म की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। इसका नाम “कृत्त” से लिया गया है जिसका अर्थ है “जो काटता है”। यह नक्षत्र अग्नि देव, सूर्य और भगवान कार्तिकेय की दिव्य कथा से अविच्छेद रूप से जुड़ा है।
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| डिग्री सीमा | मेष 26°40′ से वृषभ 10°00′ |
| नक्षत्र स्वामी | सूर्य |
| अधिष्ठाता देवता | अग्नि देव |
| प्रतीक | दरांती, चाकू, ज्वाला |
| तत्व | अग्नि |
| गण | राक्षस |
| वर्ण | वैश्य |
| योनि | भेड़ (स्त्री) |
| नाड़ी | मध्यम |
| शुभ अक्षर | अ, इ, उ, ए |
| वृक्ष | गुलूर |
कृतिका नक्षत्र: अग्नि, शुद्धि और नेतृत्व का वैदिक प्रतीक
प्राचीन काल में तारकासुर नामक असुर ने देवों को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। ब्रह्मा के वरदान के कारण वह केवल शिवपुत्र द्वारा ही मारा जा सकता था। उसी समय शिव के तेज से एक अद्भुत अग्निज्वाला उत्पन्न हुई। यह तेज इतना शक्तिशाली था कि देवता भी इसे संभाल नहीं पाए।
अग्निदेव को वह तेज सौंपा गया, परंतु उसकी प्रचंडता से अग्नि भी व्याकुल हो उठे। तब गंगा माता ने उसे अपने जल में धारण किया। गंगा में वह तेज एक कमल पर ठहर गया। वहीं पर कृतिकाएँ, सप्तऋषियों की पत्नियाँ, आईं और उन्होंने उस तेजस्वी ऊर्जा को देखा।
उनकी मातृत्व शक्ति ने उस तेज को बालक कार्तिकेय का रूप दे दिया। छहों कृतिकाओं ने मिलकर उसका पालन-पोषण किया। स्नेह, अनुशासन और युद्धकला के प्रशिक्षण ने उसे अदम्य योद्धा बनाया।
बड़े होकर कार्तिकेय ने देवताओं के सेनापति बनकर तारकासुर का वध किया और स्वर्ग को मुक्त कराया। यह कथा अग्नि की शुद्धि, मातृत्व के त्याग और वीरता की सर्वोच्च विजय का प्रतीक है।
| पहलू | अर्थ |
|---|---|
| शुद्धिकरण | अशुद्धियों का दाह कर शुद्ध करना |
| रूपांतरण | ऊर्जा को नए रूप में परिवर्तित करना |
| ज्ञान | अंधकार हटाकर प्रकाश देना |
| बलिदान | यज्ञ में आहुति का भाव |
| गुण | पौराणिक स्रोत |
|---|---|
| साहस | कार्तिकेय के पराक्रम से |
| रचनात्मकता | अग्नि के रूपांतरण से |
| नेतृत्व | देवसेनापति कार्तिकेय से |
| शुद्धिकरण | अग्नि ऊर्जा से |
1. कृत्तिका नक्षत्र का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक क्या है?
अग्नि, जो शुद्धि और रूपांतरण का प्रतिनिधित्व करती है।
2. कार्तिकेय का जन्म कृत्तिका नक्षत्र से कैसे जुड़ा है?
कृतिकाओं ने शिव के तेज को मातृत्व से बालक रूप दिया और कार्तिकेय का पालन किया।
3. कृत्तिका जातकों में कौन से गुण प्रमुख होते हैं?
साहस, नेतृत्व, शुद्धि की भावना और रचनात्मकता।
4. कृत्तिका नक्षत्र किस तारामंडल से संबंधित है?
प्लीएडेस, जिसे सप्तकृतिका भी कहा जाता है।
5. इस नक्षत्र का आध्यात्मिक संदेश क्या है?
अग्नि की तरह स्वयं को शुद्ध कर साहस और धर्म के मार्ग पर चलना।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्रअनुभव: 15
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इनके क्लाइंट: म.प्र., दि.
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