By पं. अभिषेक शर्मा
जानिए स्वाहा की चतुराई, अग्निदेव के प्रेम और कार्तिकेय के जन्म की रहस्यमयी वैदिक कथा

यह कथा ऋग्वेद (मंडल 1, सूक्त 31) और शतपथ ब्राह्मण (2.2.4) में वर्णित है। इसमें अग्निदेव के प्रेम, स्वाहा की चतुराई और कार्तिकेय के दिव्य जन्म का रहस्य छिपा है।
एक बार अग्निदेव यज्ञ के हवि को स्वर्ग तक ले जाते समय सप्तऋषियों की पत्नियों को देखते हैं। उनके सौंदर्य से मोहित होकर अग्नि उनसे प्रेम निवेदन करते हैं: “हे दिव्यांगनाओ! तुम्हारे सौंदर्य ने मुझे आकृष्ट किया है। मैं तुम्हारे साथ विहार करना चाहता हूँ।”
ऋषि-पत्नियों ने विनम्रता से कहा: “हे अग्निदेव! हम पातिव्रता स्त्रियाँ हैं। यह प्रस्ताव धर्म के विपरीत है।”
दक्ष प्रजापति की पुत्री स्वाहा गुप्त रूप से अग्नि से प्रेम करती थीं। उन्होंने एक योजना बनाई:
इन मिलनों से सात ज्वालाएँ प्रकट हुईं। स्वाहा ने उन्हें एक स्वर्ण कलश में रखा और सरस्वती नदी के तट पर एक सरोवर में छिपा दिया। वहाँ:
सप्तऋषियों को जब सत्य पता चला, तब अग्नि ने:
| घटना | आध्यात्मिक संदेश |
|---|---|
| अग्नि का मोह | इंद्रियों पर विजय की आवश्यकता |
| स्वाहा की योजना | प्रेम को धर्मसम्मत रूप देना |
| ज्वालाओं का सरोवर | आत्मशुद्धि और रूपांतरण |
| कार्तिकेय का जन्म | तपस्या से उत्पन्न दिव्य ऊर्जा |
अग्नि देव: वैदिक अग्नि, शुद्धि और ज्योतिष की ज्वाला
“स्वाहा ने अग्नि को दिखाया कि प्रेम वह अग्नि है जो स्वार्थ को जलाकर कर्तव्य का प्रकाश बढ़ाती है।”
1. स्वाहा ने ऋषि-पत्नियों का रूप क्यों धारण किया?
अग्नि से अपने प्रेम को धर्मसम्मत दिशा देने और किसी का अपमान न करने के लिए।
2. सात ज्वालाओं का क्या महत्व है?
वे ऊर्जा के सात स्तरों का प्रतीक हैं, जो अंततः कार्तिकेय के रूप में प्रकट हुईं।
3. क्या अग्निदेव ने कोई प्रायश्चित किया?
हाँ, उन्होंने तपस्या की और स्वाहा को पत्नी रूप में स्वीकार किया।
4. कार्तिकेय का जन्म अग्नि और स्वाहा से कैसे जुड़ा है?
स्वाहा द्वारा धारण की गई अग्नि-ऊर्जा ही बाद में कार्तिकेय रूप में प्रकट हुई।
5. इस कथा का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
धर्म, संयम, प्रेम और रूपांतरण में निहित जीवन की उच्चतम ऊर्जा।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
अनुभव: 19
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