By पं. नरेंद्र शर्मा
समुद्र मंथन की कथा में अग्निदेव की उत्पत्ति और उनके दार्शनिक महत्व की विवेचना

एक समय की बात है जब देवता और असुर दोनों अमरत्व प्राप्त करना चाहते थे। देवताओं ने श्राप के कारण अपनी शक्ति खो दी थी और असुरों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। भगवान विष्णु ने समाधान बताया कि क्षीर सागर का मंथन करके अमृत प्राप्त किया जाए। दोनों पक्षों ने मिलकर तैयारी की और ब्रह्मांड के इतिहास की सबसे महान प्रक्रिया आरंभ हुई।
| तत्व | उपयोग | विशेषता |
|---|---|---|
| मंदराचल पर्वत | मथनी | विश्व का सबसे विशाल पर्वत |
| वासुकी नाग | रस्सी | 1000 फनों वाला दिव्य सर्प |
| श्रीविष्णु | कच्छप अवतार | पर्वत को डूबने से बचाया |
असुरों ने वासुकी का सिर पकड़ा, देवताओं ने पूंछ पकड़ी। मंथन शुरू होते ही पर्वत डूबने लगा, तब भगवान विष्णु ने कच्छप अवतार धारण कर पर्वत को अपनी पीठ पर स्थिर किया।
मंथन तेज होते ही समुद्र से एक दिव्य ज्वाला प्रकट हुई। वह इतनी प्रचंड थी कि संपूर्ण ब्रह्मांड प्रकाश से भर उठा। ब्रह्मा ने उसे देख कहा
"यह तेज सृष्टि की रक्षा करेगा।"
उन्होंने इस ज्वाला को अग्निदेव का स्वरूप प्रदान किया। अग्नि तीन रूपों में प्रतिष्ठित हुए:
मंथन जारी रहा और समुद्र से हलाहल विष प्रकट हुआ जिसने समस्त लोकों को संकट में डाल दिया। भगवान शिव ने विष का पान किया और अग्नि ने उनकी उष्णता को संतुलित कर ब्रह्मांड की रक्षा की। इसी कारण शिव नीलकंठ कहलाए।
अग्नि देव की उत्पत्ति: ब्रह्मा के मस्तक से जन्मी दिव्य ज्वाला
धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए और देवता–असुरों में संघर्ष हुआ। विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर अमृत देवताओं तक पहुँचाया। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में अग्नि का महत्व था:
समुद्र मंथन मानव जीवन का प्रतीक है:
"अग्नि वह दिव्य ज्वाला है जो अंधकार को जलाकर ज्ञान का प्रकाश बन जाती है।"
1. समुद्र मंथन से अग्नि देव क्यों उत्पन्न हुए?
तीव्र मंथन से समुद्र से ज्वाला प्रकट हुई जिसे ब्रह्मा ने अग्नि रूप में प्रतिष्ठित किया।
2. अग्नि देव के तीन रूप क्या दर्शाते हैं?
पृथ्वी, आकाश और सूर्य में स्थित तीन प्रकार की ऊर्जा।
3. हलाहल प्रकट होने पर अग्नि की क्या भूमिका थी?
अग्नि ने शिव की उष्णता को संतुलित कर ब्रह्मांड को स्थिर रखा।
4. समुद्र मंथन का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?
जीवन के संघर्षों से ही मूल्यवान उपलब्धियाँ जन्म लेती हैं।
5. अग्नि देव की उत्पत्ति का मनोवैज्ञानिक संदेश क्या है?
दबाव और कठिनाई से आंतरिक शक्ति और नई दिशा प्रकट होती है।
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