By पं. नीलेश शर्मा
विष्णु की नाभि से निकले कमल से ब्रह्मा के प्राकट्य की दिव्य कथा

भारतीय आध्यात्मिकता में ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता माना गया है। विष्णु पुराण में यह बताया गया है कि ब्रह्मा का प्राकट्य भगवान विष्णु की नाभि से निकले दिव्य कमल से हुआ। इस दृष्टिकोण में विष्णु को परम आधार और ब्रह्मा को सृष्टि के विस्तार का दायित्व सौंपा गया है। यह कथा केवल सृष्टि के उद्भव को नहीं समझाती बल्कि ब्रह्मांड के आध्यात्मिक और दार्शनिक रहस्यों को भी प्रकाश में लाती है।
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जब सृष्टि का आरंभ हुआ, तब पूरा ब्रह्मांड एक अंधकारमय जलराशि में विलीन था। इसी जल में भगवान विष्णु योगनिद्रा में शयन कर रहे थे। विष्णु की नाभि से एक दिव्य कमल प्रकट हुआ और उसी कमल से ब्रह्मा का प्राकट्य हुआ। यह कमल चेतना, जीवन और सृजन की शक्ति का प्रतीक है, और ब्रह्मा ने इसी ऊर्जा के आधार पर समस्त सृष्टि की रचना आरंभ की।
इस दृष्टिकोण में विष्णु को अंतिम आधार, पालनकर्ता और सृष्टि के संरक्षक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उनके नाभि से निकला कमल यह संकेत देता है कि ब्रह्मा का जन्म दिव्य चेतना से हुआ और सृष्टि का विस्तार उसी चेतना की शक्ति से संभव हुआ।
विष्णु पुराण में वर्णित ब्रह्मा की उत्पत्ति यह दिखाती है कि सृष्टि का आधार दिव्य चेतना और ऊर्जा है। विष्णु की नाभि से निकले कमल से ब्रह्मा का प्राकट्य यह संदेश देता है कि ब्रह्मांड का विस्तार उसी दिव्य शक्ति से संचालित है। यह कथा सृष्टि, चेतना और ऊर्जा के गहरे संबंध को समझने में मार्गदर्शक है।
1. विष्णु की नाभि से कमल क्यों प्रकट हुआ?
क्योंकि कमल दिव्य ऊर्जा, चेतना और सृजन की शुद्ध शक्ति का प्रतीक है।
2. ब्रह्मा कमल से ही क्यों उत्पन्न हुए?
कमल सृष्टि की शुरुआत और पवित्रता का प्रतीक है, इसलिए ब्रह्मा का प्राकट्य इसी माध्यम से माना गया।
3. इस कथा में विष्णु की क्या भूमिका है?
विष्णु परम आधार, पालनकर्ता और सृष्टि की ऊर्जा के स्रोत के रूप में प्रस्तुत हैं।
4. ब्रह्मा को सृष्टि का रचनाकार क्यों कहा जाता है?
क्योंकि उन्होंने जीवन, प्रकृति और समस्त लोकों की रचना की।
5. क्या यह कथा केवल प्रतीकात्मक है?
यह कथा दार्शनिक, प्रतीकात्मक और आध्यात्मिक संदेशों से परिपूर्ण है, जो सृष्टि के गूढ़ रहस्यों को समझाने के लिए दी गई है।
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