By पं. संजीव शर्मा
शैव पुराण में वर्णित कथा जिसमें शिव से ब्रह्मा और विष्णु की उत्पत्ति और सृष्टि का आरंभ होता है

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में सृष्टि की उत्पत्ति को लेकर कई दृष्टिकोण मिलते हैं। जहाँ विष्णु पुराण में ब्रह्मा को विष्णु की नाभि से उत्पन्न माना गया है, वहीं शैव पुराण में शिव को सृष्टि का परम आधार बताया गया है। इस दृष्टिकोण में ब्रह्मा और विष्णु दोनों शिव से जन्मे माने जाते हैं। यह कथा न केवल त्रिमूर्ति की एकता को दिखाती है, बल्कि सृष्टि के चक्र और ब्रह्मांड के गहरे रहस्यों को भी प्रकट करती है।
ब्रह्मा देव: रोहिणी नक्षत्र के अधिष्ठाता और सृजन के देवता
आदिकाल में न आकाश था, न पृथ्वी और न ही दिशाएँ। केवल अनंत, असीम और दिव्य ऊर्जा का विस्तार था। इस शून्य में केवल महेश्वर शिव ही विद्यमान थे।
शैव पुराण के अनुसार, शिव ने अपनी दिव्य शक्ति के साथ सृष्टि आरंभ करने का संकल्प किया।
इस प्रकार ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों एक ही परम सत्ता के विभिन्न रूप हैं जो सृष्टि, पालन और संहार के चक्र को संचालित करते हैं।
शैव पुराण में यह भी कहा गया है कि विभिन्न कल्पों में कभी शिव से ब्रह्मा और विष्णु उत्पन्न होते हैं, तो कभी ब्रह्मा से शिव और विष्णु तथा कभी विष्णु से शिव और ब्रह्मा। यह चक्र दिखाता है कि ब्रह्मांड में कोई भी सत्ता पूर्णतः स्वतंत्र नहीं, बल्कि सभी एक ही परम ऊर्जा से जुड़े हैं।
“त्रिमूर्ति महेश्वर की ही शक्ति के तीन रूप हैं जो ब्रह्मांड को गति, संतुलन और परिवर्तन प्रदान करते हैं।”
एक बार ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। तभी एक अनंत अग्नि-स्तंभ प्रकट हुआ, जिसे ज्योतिर्लिंग कहा गया।
ब्रह्मा ऊपर की ओर और विष्णु नीचे की ओर उसके अंत की खोज में गए, पर कोई भी अंत तक नहीं पहुँच सका।
अंततः शिव उस ज्योतिर्लिंग से प्रकट हुए और दोनों को बताया कि वही आदि और अनंत हैं तथा सृष्टि के मूल कारण हैं।
यह प्रसंग अहंकार के विनाश और परम सत्य की अनुभूति का प्रतीक है।
| देवता | उत्पत्ति (शैव पुराण) | कार्य |
|---|---|---|
| ब्रह्मा | शिव के दाएँ अंग से | सृष्टि |
| विष्णु | शिव के बाएँ अंग से | पालन |
| रुद्र (शिव) | स्वयं शिव | संहार |
शैव पुराण के अनुसार ब्रह्मा और विष्णु दोनों शिव से उत्पन्न हुए। यह दृष्टिकोण यह दिखाता है कि सृष्टि का हर कार्य—रचना, पालन और परिवर्तन—एक ही दिव्य ऊर्जा द्वारा संचालित है। शिव ही आदि हैं और शिव ही अनंत, जो सृष्टि के मूल कारण और उसके अंतिम सत्य दोनों हैं।
1. शैव पुराण के अनुसार ब्रह्मा कहाँ से उत्पन्न हुए?
वे शिव के दाएँ अंग से प्रकट हुए।
2. विष्णु की उत्पत्ति कैसे हुई?
विष्णु शिव के बाएँ अंग से प्रकट हुए।
3. ज्योतिर्लिंग का क्या महत्व है?
यह शिव के अनंत और निराकार स्वरूप का प्रतीक है।
4. ब्रह्मा और विष्णु के विवाद का क्या संदेश है?
यह दिखाता है कि अहंकार के ऊपर केवल परम सत्य की शक्ति ही मान्य है।
5. त्रिमूर्ति को एक ही शक्ति क्यों माना जाता है?
क्योंकि सृष्टि, पालन और परिवर्तन एक ही दिव्य चेतना के तीन अलग-अलग कार्य हैं।
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