By पं. संजीव शर्मा
जानिए अष्टम भाव का वैदिक महत्व, जीवन में रहस्य, गहन परिवर्तन, आकस्मिक घटनाएँ, गूढ़ विद्या और पुनर्जन्म पर इसका प्रभाव

वैदिक ज्योतिष में अष्टम भाव को अत्यंत गूढ़ माना गया है। यह वह क्षेत्र है जहाँ जीवन के छिपे हुए सत्य खुलते हैं और आत्मा स्वयं के साथ गहरे स्तर पर संवाद करती है। अष्टम भाव जीवन के ऐसे अध्यायों को उजागर करता है जिनसे व्यक्ति भीतर से बदलता है। चाहे वह अचानक आने वाली घटनाएँ हों पैतृक संपत्ति हो या आध्यात्मिक जागरण इस भाव का प्रभाव जीवन को नई दिशा देता है।
शनि ग्रह: कर्म का कठोर न्यायाधीश और आध्यात्मिक मार्गदर्शक
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| भाव संख्या | आठवां भाव |
| स्वाभाविक राशि | वृश्चिक |
| कारक ग्रह | शनि |
| तत्त्व | जल |
| भाव का प्रकार | दुष्ट भाव गूढ़ और कर्मफलिक क्षेत्र |
अष्टम भाव का प्रभाव सूक्ष्म स्तर पर कार्य करता है और व्यक्ति को जीवन के अप्रत्याशित मोड़ों से परिचित कराता है। नीचे इसकी विस्तृत सारणी दी गई है।
| क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| मृत्यु और दीर्घायु | आयु मृत्यु की प्रकृति मृत्यु का स्थान और मृत्यु के बाद सम्मान या अपमान |
| अचानक घटनाएँ | जीवन में अचानक परिवर्तन धार्मिक और मानसिक रूपांतरण दुर्घटनाएँ और धोखे |
| रहस्य और गूढ़ विद्या | तंत्र मंत्र ज्योतिष आयुर्वेद और रहस्य विज्ञान की गहरी समझ |
| आकस्मिक धन और पैतृक संपत्ति | वसीयत बीमा राशि लॉटरी अनपेक्षित लाभ और शेयर बाजार से धन प्राप्ति |
| वैवाहिक जीवन में प्रभाव | विशेषकर स्त्री की कुंडली में पति की आयु संघर्ष और गुप्त संबंधों की स्थिति |
| मानसिक और शारीरिक कष्ट | रीढ़ की हड्डी गुप्त रोग पुराने रोग और वसा संचय |
| विदेश यात्रा और स्थान परिवर्तन | समुद्र पार यात्रा विदेश बसने की संभावना |
| ससुराल पक्ष | विवाह के बाद जीवन में सुख दुख और ससुराल के साथ संबंध |
| आध्यात्मिकता और मोक्ष | भौतिकता से विरक्ति आत्मचिंतन और मोक्ष की ओर झुकाव |
| परिवर्तन और पुनर्जन्म | जीवन में गहरे बदलाव और आत्मा का आध्यात्मिक विकास |
| ग्रह | शुभ प्रभाव | अशुभ प्रभाव |
|---|---|---|
| सूर्य | गूढ़ ज्ञान नेतृत्व क्षमता | स्वास्थ्य समस्या ससुराल तनाव |
| चंद्रमा | भावनात्मक गहराई विरासत से लाभ | मानसिक असंतुलन जलजनित रोग |
| मंगल | गुप्त विद्या में दक्षता साहस | दुर्घटना और अचानक संकट |
| बुध | अनुसंधान लेखन कौशल | आर्थिक हानि साझेदारी में धोखा |
| गुरु | दार्शनिक दृष्टि दीर्घायु | उतार चढ़ाव स्वास्थ्य में |
| शुक्र | विरासत और सौंदर्य | गलत संबंध भोग की प्रवृत्ति |
| शनि | धैर्य अनुसंधान आध्यात्मिकता | दीर्घकालिक रोग मानसिक तनाव |
| राहु | अचानक लाभ गुप्त शक्तियाँ | भ्रम दुर्घटना |
| केतु | आध्यात्मिकता मोक्ष | संबंधों में दूरी स्वास्थ्य समस्या |
अष्टम भाव का स्वामी यदि उच्च राशि में हो या शुभ दृष्टि से युक्त हो तो जातक गूढ़ विज्ञानों में गहरी पकड़ रखता है। उसकी अंतर्दृष्टि तीव्र होती है और उसे अचानक धन अथवा गहन आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होते हैं। यदि अष्टमेश पीड़ित हो तो जीवन में संघर्ष बीमारी और मानसिक असंतुलन की संभावना बढ़ती है।
यह संबंध जातक को गहन अंतर्ज्ञान अद्भुत पूर्वानुमान क्षमता और आकस्मिक धन की संभावना देता है।
बुध गुरु शुक्र चंद्रमा इस भाव में होने पर व्यक्ति अनुसंधान आध्यात्मिक अभ्यास और विरासत में उन्नति प्राप्त करता है।
शनि मंगल राहु केतु संकट दुर्घटना मानसिक तनाव और संबंधों में उतार चढ़ाव का संकेत देते हैं।
यह भाव पति की आयु दांपत्य स्थिरता और ससुराल पक्ष के सुख दुख का महत्वपूर्ण आधार है।
अष्टम भाव उस परिवर्तन का प्रतीक है जो मनुष्य को भीतर से नया बनाता है। यह भाव सिखाता है कि कठिनाइयाँ केवल बाधा नहीं बल्कि आत्मविकास का साधन बन सकती हैं। इस भाव की ऊर्जा व्यक्ति को पुराने बोझ से मुक्त कर नई राह दिखाती है।
अष्टम भाव रहस्य भाव क्यों कहलाता है
क्योंकि यह गूढ़ ज्ञान तंत्र मंत्र और आत्मिक अनुभवों से जुड़ा होता है।
क्या अष्टम भाव आकस्मिक धन देता है
हाँ विरासत बीमा राशि और लॉटरी इसी भाव से देखे जाते हैं।
अष्टम भाव का वैवाहिक जीवन पर क्या प्रभाव होता है
विशेषकर स्त्री की कुंडली में यह पति की आयु और दांपत्य स्थिरता का संकेतक है।
अष्टम भाव में शनि होने पर क्या होता है
धीमी प्रगति मानसिक दबाव और दीर्घकालिक रोग संभव हैं।
क्या अष्टम भाव आध्यात्मिकता को दर्शाता है
हाँ यह भाव तपस्या मोक्ष और आत्मचिंतन की प्रवृत्ति को बढ़ाता है।
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