By पं. अभिषेक शर्मा
जानिए ११वें भाव का वैदिक महत्व, आय, सामाजिक मित्रता, इच्छाओं की पूर्ति और लाभ के योगों पर इसका प्रभाव

वैदिक ज्योतिष में एकादश भाव को उन प्रमुख स्थानों में माना गया है जहाँ जीवन के वास्तविक फल प्रकट होते हैं। यह भाव केवल धन या आय का संकेत मात्र नहीं है बल्कि यह दर्शाता है कि व्यक्ति अपने सपनों को किस हद तक साकार कर पाएगा। इस भाव के माध्यम से यह भी जाना जाता है कि सामाजिक संबंध कितने सार्थक होंगे और जीवन में सहयोग कहाँ से प्राप्त होगा। यह भाव जीवन में बनने वाले अवसरों, मित्र मंडली, सामाजिक प्रतिष्ठा और आकांक्षाओं की पूर्ति का आधार है।
शनि ग्रह: कर्म का कठोर न्यायाधीश और आध्यात्मिक मार्गदर्शक
| तत्त्व | विवरण |
|---|---|
| भाव संख्या | एकादश 11वां |
| प्राकृतिक राशि | कुंभ Aquarius |
| तत्त्व Element | वायु |
| स्वाभाविक ग्रह | शनि |
| कारक ग्रह | बृहस्पति Jupiter |
| भाव का प्रकार | उपचय उन्नति वर्धक लाभ भाव |
| क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| लाभ और आय | जातक को जीवन में आय के कितने स्रोत मिलेंगे और वह कितना लाभ कमा पाएगा इसका निर्धारण इस भाव से होता है। यह भाव नियमित वेतन बिजनेस से लाभ शेयर बाजार पुरस्कार बोनस इनाम आदि का सूचक है। यह भाव यह भी दर्शाता है कि लाभ वैध होगा या अवैध साधनों से। |
| इच्छाओं की पूर्ति | यहाँ वही पाठ पुनः आता है जो आय के अंतर्गत था और वैदिक परंपरा में यह दोहराव इस बात की ओर संकेत करता है कि आय और इच्छाएँ गहराई से जुड़ी हैं। इसलिए इस भाव में इच्छाओं की पूर्ति वही मार्ग अपनाती है जो लाभ से होकर गुजरता है चाहे वह वेतन हो पुरस्कार हो या व्यापारिक सफलता। |
| मित्र और सामाजिक संबंध | एकादश भाव जातक के मित्रों सहयोगियों और सामाजिक जुड़ाव को दर्शाता है। इससे यह भी जाना जा सकता है कि मित्रता कितनी स्थायी होगी और क्या मित्र लाभकारी सिद्ध होंगे। |
| बड़े भाई बहन | विशेषतः बड़े भाई बहनों बहनों के पति दामाद आदि से संबंधित जानकारियाँ इसी भाव से प्राप्त होती हैं। |
| वरिष्ठ अधिकारी और सहयोगी संबंध | वरिष्ठों या अधिकारियों से कैसा व्यवहार मिलेगा और उनके सहयोग का स्तर कैसा रहेगा यह भी इसी भाव में देखा जाता है। |
| छिपी हुई संपत्ति और बचत | गोपनीय आय अप्रत्याशित लाभ और संचित धन की स्थिति इसी भाव से निर्धारित होती है। |
| सामाजिक प्रतिष्ठा | समाज में पहचान सम्मान प्रतिष्ठा और प्रसिद्धि का आधार। |
| शारीरिक संकेत | टखने पिंडलियां और बायां कान। |
| स्वार्थ और व्यावसायिक दृष्टिकोण | जातक लाभ के लिए किस हद तक जा सकता है और क्या वह सम्बन्धों में अपनी आवश्यकता को प्रधानता देता है इसका ज्ञान इसी भाव से होता है। |
| मामा और ससुराल पक्ष | मामा से सहयोग और संबंध। |
| ग्रह | प्रभाव |
|---|---|
| सूर्य | उच्च महत्वाकांक्षा नेतृत्व प्रभावशाली मित्र राजनीतिक संबंध |
| चंद्रमा | भावुक मित्र कलाकारों नाविकों या यात्रियों से मित्रता |
| मंगल | खिलाड़ी पहलवान साहसी मित्र प्रतिस्पर्धा में सफलता |
| बुध | व्यापारी वर्ग मित्र संचार में कुशलता |
| गुरु | धार्मिक दार्शनिक बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र के मित्र |
| शुक्र | कला अभिनय सुंदरता आकर्षक सामाजिक संबंध |
| शनि | वरिष्ठ अनुशासित मित्र नौकरीपेशा लोग |
| राहु केतु | विदेशी मित्र असामान्य लाभ छद्म संबंध |
ग्यारहवाँ भाव आय लाभ मित्रता और पूर्णता का केंद्र है। यह भाव शक्तिशाली हो तो जातक जीवन में अवसरों को पकड़ता है और बड़े लक्ष्य पूरे करता है। कमजोर होने पर लाभ में बाधाएँ और मित्रता में अस्थिरता बनी रहती है। एकादश भाव का अध्ययन व्यक्ति को यह समझने में सहायता करता है कि वह समाज में किस दिशा में आगे बढ़ सकता है और किस प्रकार अपने प्रयासों को परिणाम में बदल सकता है।
ग्यारहवाँ भाव धन के कितने स्रोत बताता है
यह भाव वेतन व्यापार कमिशन पुरस्कार बोनस शेयर बाजार और अचानक मिलने वाले लाभों तक सभी स्रोत दर्शाता है।
क्या एकादश भाव मित्रों के लाभ को भी दिखाता है
हाँ यह बताता है कि मित्र जीवन में कितने सहायक या बाधक होंगे।
यदि ग्यारहवाँ भाव कमजोर हो तो क्या होता है
लाभ में रुकावट मित्रता में अस्थिरता और इच्छाओं की पूर्ति में देरी होती है।
क्या यह भाव बड़े भाई बहन को भी दर्शाता है
हाँ बड़े भाई और उनसे मिलने वाले सहयोग का मुख्य संकेतक यही भाव है।
क्या पाप ग्रह यहाँ शुभ फल दे सकते हैं
उपचय भाव होने के कारण पाप ग्रह भी सही स्थितियों में लाभ प्रदान करते हैं।
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