By पं. अभिषेक शर्मा
वैदिक ज्योतिष के पाँच मूल तत्वों की विस्तृत जानकारी और यह कैसे आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करते हैं।

भारतीय वैदिक ज्योतिष सिर्फ ग्रह-नक्षत्रों की गणना नहीं है, बल्कि यह एक सुव्यवस्थित प्रणाली है जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए पाँच मुख्य घटकों पर आधारित है। इन घटकों की सही समझ ज्योतिषीय विश्लेषण को अधिक सटीक और उपयोगी बनाती है। सटीक विश्लेषण के लिए पांचों घटक महत्त्वपूर्ण हैं।
ज्योतिष में नवग्रहों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ये हैं - सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति (गुरु), शुक्र, शनि, राहु और केतु। इनमें से प्रत्येक ग्रह एक खास प्रकार की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है:
ज्योतिष शास्त्र: जीवन का मार्गदर्शक प्राचीन विज्ञान
बारह राशियाँ - मेष से लेकर मीन तक - व्यक्ति के स्वभाव, प्राथमिकताओं और सोचने के ढंग को परिभाषित करती हैं। हर राशि का एक स्वामी ग्रह होता है और वह ग्रह उस राशि के लोगों के चरित्र और जीवन के फैसलों को प्रभावित करता है। उदाहरण:
कुंडली को बारह भागों में बाँटा गया है जिन्हें भाव कहा जाता है। हर भाव जीवन के एक विशिष्ट क्षेत्र को दर्शाता है: उदाहरण:
27 नक्षत्र (जैसे अश्विनी, मृगशिरा, रोहिणी) राशियों से भी अधिक गहराई से व्यक्ति की मानसिकता और प्रवृत्तियों को दर्शाते हैं। हर नक्षत्र का एक देवता और एक स्वामी होता है, जो उस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति के कर्मों और सोच पर सूक्ष्म प्रभाव डालता है। नक्षत्रों पर आधारित ज्योतिष, जिसे "नक्षत्र ज्योतिष" कहा जाता है, आज के समय में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
कोई भी ग्रह हर समय एक जैसा प्रभाव नहीं देता। उसका प्रभाव तब अधिक होता है जब वह दशा में आता है या गोचर करता है।
इन पाँच घटकों - ग्रह, राशियाँ, भाव, नक्षत्र और दशा/गोचर - की सम्यक समझ से ही एक सटीक और अर्थपूर्ण ज्योतिषीय विश्लेषण संभव होता है। यह सिर्फ भविष्यवाणी नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला एक प्राचीन वैज्ञानिक उपकरण है।
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