क्या ज्योतिष में अस्त ग्रह जीवन को प्रभावित करते हैं और उनके उपाय क्या हैं?

By पं. अमिताभ शर्मा

अस्त ग्रहों के प्रभाव और उनके विस्तृत उपायों की ज्योतिषीय चर्चा

अस्त ग्रह: प्रभाव और विस्तृत उपाय

वैदिक ज्योतिष में जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यधिक समीप आ जाता है तो उसे अस्त या दहन ग्रह कहा जाता है। सूर्य की तेज आभा के कारण वह ग्रह अपनी शक्ति खो देता है और उसकी सकारात्मक विशेषताएँ कमजोर हो जाती हैं। दहन ग्रह केवल ज्योतिषीय दृष्टि से ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि यह स्थिति आत्मा को शुद्ध करने वाली अग्नि के समान कार्य करती है।

अस्त ग्रह क्या होते हैं?

जब ग्रह सूर्य से एक निश्चित डिग्री के भीतर आ जाए तो वह अस्त माना जाता है। इस स्थिति में सूर्य उस ग्रह की ऊर्जा को जला देता है और उसका स्वतंत्र प्रभाव कम हो जाता है।

दहन की डिग्री इस प्रकार है:

ग्रहसूर्य से दूरी (डिग्री)
चंद्रमा12 डिग्री के भीतर
मंगल17 डिग्री के भीतर
बुध14 डिग्री (वक्री होने पर 12 डिग्री)
बृहस्पति11 डिग्री के भीतर
शुक्र10 डिग्री (वक्री होने पर 8 डिग्री)
शनि15 डिग्री के भीतर

राहु और केतु सामान्य रूप से दहन ग्रह नहीं माने जाते, परंतु जब वे सूर्य के साथ युति करते हैं तो सूर्य को ग्रहण कर उसकी शक्तियाँ कम कर देते हैं।

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दहन ग्रह जीवन में किस प्रकार का प्रभाव डालते हैं?

(जैसा पहले बताया गया - चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि और राहु-केतु दहन की स्थिति में कैसे प्रभावित करते हैं…)

अस्त ग्रहों के विस्तृत उपाय

जब कोई ग्रह दहन होता है तो उसका प्रभाव कम करने और संतुलन स्थापित करने के लिए ज्योतिष में कई प्रकार के उपाय बताए गए हैं। ये उपाय ग्रह की ऊर्जा को संतुलित करने और जीवन में शांति लाने के लिए किए जाते हैं।

सामान्य उपाय सभी दहन ग्रहों के लिए

  • प्रतिदिन प्रातः सूर्य को अर्घ्य दें और सूर्य नमस्कार करें।
  • आदित्य हृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करें।
  • पितृवत पुरुषों का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें।
  • प्रतिदिन प्रातः ध्यान और प्राणायाम करें ताकि भीतर की कमजोरियों को समझकर सुधारा जा सके।
  • शनिवार को प्रातः 12 बजे से पहले शिवलिंग पर दूध अर्पित करें।

चंद्रमा दहन के उपाय

  • सोमवार को शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाएँ।
  • ‘ॐ चन्द्राय नमः’ मंत्र का 108 बार जप करें।
  • चाँदी का दान करें और माँ का आशीर्वाद लें।
  • मन की शांति के लिए ध्यान और भजन-संगीत का सहारा लें।

मंगल दहन के उपाय

  • मंगलवार को हनुमानजी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएँ।
  • ‘ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः’ मंत्र का जप करें।
  • लाल वस्त्र और मसूर की दाल का दान करें।
  • क्रोध पर नियंत्रण के लिए योग और अनुशासन अपनाएँ।

बुध दहन के उपाय

  • बुधवार को गणेशजी की पूजा करें।
  • ‘ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः’ मंत्र का जप करें।
  • हरे वस्त्र पहनें और हरे मूंग का दान करें।
  • संवाद कौशल बढ़ाने के लिए वाणी पर संयम रखें।

बृहस्पति दहन के उपाय

  • गुरुवार को पीली वस्तुएँ जैसे चना दाल, हल्दी या पीला कपड़ा दान करें।
  • ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का जप करें।
  • बड़ों और गुरुओं का सम्मान करें।
  • धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें और गरीब विद्यार्थियों की मदद करें।

शुक्र दहन के उपाय

  • शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा करें और सफेद वस्त्र पहनें।
  • ‘ॐ शुक्राय नमः’ मंत्र का जप करें।
  • दही, चावल और सफेद वस्तुओं का दान करें।
  • विवाह और रिश्तों में मधुरता लाने के लिए संयम और विनम्रता अपनाएँ।

शनि दहन के उपाय

  • शनिवार को शनि मंदिर में तिल का तेल चढ़ाएँ।
  • ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जप करें।
  • गरीबों और मजदूरों की सेवा करें।
  • आलस्य और नकारात्मकता से बचें, कर्म में नियमितता रखें।

राहु और केतु से प्रभावित सूर्य के उपाय

  • राहु के प्रभाव में सूर्य के लिए शनिदेव और कालभैरव की पूजा करना उत्तम है।
  • केतु के प्रभाव में सूर्य के लिए गणेशजी और भगवान शिव की उपासना करें।
  • नियमित ध्यान और योग अभ्यास आत्मविश्वास को स्थिर करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या हर ग्रह दहन से कमजोर हो जाता है?
हाँ, दहन की स्थिति में सभी ग्रह प्रभावित होते हैं लेकिन बुध और शुक्र कुछ विशेष परिस्थितियों में अपना असर बनाए रखते हैं।

2. शुक्र के दहन का जीवन पर सबसे बड़ा प्रभाव क्या होता है?
शुक्र का दहन विवाह में विलंब और संबंधों में तनाव पैदा करता है, साथ ही करियर और रिश्तों में संघर्ष भी लाता है।

3. क्या राहु और केतु भी दहन ग्रह होते हैं?
नहीं, परंतु जब वे सूर्य या चंद्रमा के साथ युति करते हैं तो उन्हें ग्रहण कर उनकी शक्तियों को कम कर देते हैं।

4. क्या दहन ग्रह का प्रभाव केवल नकारात्मक होता है?
नहीं, दहन आत्मा के शुद्धिकरण और जीवन में आवश्यक सीख दिलाने का भी माध्यम होता है।

5. अस्त ग्रहों के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपाय क्या है?
सूर्य की उपासना, मंत्रजप और दान, ध्यान और पितृसम्मान अस्त ग्रहों के प्रभाव को कम करने के लिए श्रेष्ठ उपाय हैं।

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लेखक

पं. अमिताभ शर्मा

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