By पं. अमिताभ शर्मा
तुलसीदास की यह दिव्य चौपाई क्यों है आध्यात्मिक रूपांतरण का मंत्र, जानें अर्थ, प्रभाव और पाठ विधि

तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस की यह दिव्य चौपाई साधक के जीवन से अज्ञान दोष और भय को दूर करने वाली मानी जाती है।
जा पर कृपा राम की होई ।
ता पर कृपा करहिं सब कोई ॥
जिनके कपट दम्भ नहिं माया ।
तिनके हृदय बसहु रघुराया ॥
अर्थ
जिस व्यक्ति पर श्रीराम की कृपा होती है, उस पर संसार भी कृपा करता है। जिनके मन में छल, अहंकार और मोह नहीं होता, उनके हृदय में स्वयं श्रीराम निवास करते हैं।
कहु तात अस मोर प्रनामा ।
सब प्रकार प्रभु पूरनकामा ॥
दीन दयाल बिरिदु संभारी ।
हरहु नाथ मम संकट भारी॥
अर्थ
हे प्रभु, मेरा प्रणाम स्वीकार करें। आप सभी इच्छाओं के पूर्ण करने वाले हैं। दीनों पर दया करना आपका स्वभाव है, कृपा कर मेरे सभी संकट दूर करें।
होइहि सोइ जो राम रचि राखा ।
को करि तर्क बढ़ावै साखा ॥
अस कहि लगे जपन हरिनामा ।
गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा ॥
अर्थ
जो कुछ भी होगा, वही होगा जो श्रीराम ने पहले से लिखा है। व्यर्थ तर्क करने से कोई लाभ नहीं। ऐसा कहकर भगवान शिव हरि नाम जपने लगे और सती वहां गईं जहां श्रीराम सुखपूर्वक विराजमान थे।
इन चौपाइयों में श्रीराम की कृपा, निष्कपट भक्ति, समर्पण, जीवन के सत्य और संकटों से मुक्ति का मार्ग विस्तार से व्यक्त है। मन की शुद्धता और निर्मल भाव से स्मरण करने पर श्रीराम स्वयं साधक के जीवन में प्रकाश भरते हैं।
• जन्मों के पाप शुद्ध होते हैं और पितृ दोष शांत होता है
• राहु केतु तथा चंद्र संबंधी मानसिक अशांति समाप्त होती है
• प्राण ऊर्जा संतुलित होती है और रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है
• संचित कर्मों के बंधन ढीले पड़ते हैं और मार्ग सुगम होता है
• घर परिवार में शांति, प्रेम और सद्भाव का वातावरण बनता है
समय
• प्रातः ब्रह्म मुहूर्त 4 से 6 बजे तक
• सायंकाल सूर्यास्त से पूर्व
स्थान
• पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर बैठें
• पवित्र और शांत वातावरण रखें
विधि
• ॐ श्री रामाय नमः मंत्र से प्रारंभ करें
• चौपाई का 11, 21 या 108 बार पाठ करें
• पाठ के बाद 5 मिनट आँखें बंद कर श्रीराम का ध्यान करें
• तुलसी माला, घी दीपक और स्वच्छ आसन का प्रयोग करें
• पाठ से पूर्व स्नान और शुद्ध वस्त्र पहनें
• मन को शांत रखें और एकाग्रता बढ़ाएं
• अंत में श्री राम जय राम जय जय राम मंत्र का जाप करें
• संभव हो तो हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ भी करें
• पाठ के दौरान क्रोध, नकारात्मकता या मोह न लाएं
• बिना भावना के यांत्रिक ढंग से पाठ न करें
• पाठ के बीच किसी से वार्तालाप न करें
यह चौपाई तीन गहरे सूत्र सिखाती है
• कृपा का सिद्धांत: राम कृपा के लिए निष्कपट भक्ति आवश्यक है
• शुद्धता का मंत्र: मन से छल अहंकार और मोह हटे तो प्रभु का निवास होता है
• कर्म का विज्ञान: पाठ से कर्मों का बोझ हल्का होता है
राम कृपा बिनु भवनाश न होई
यह तुलसीदास जी का अमर सत्य साधक को स्थिरता और साहस प्रदान करता है।
• क्या यह चौपाई सच में जन्मों के पाप मिटाती है
हाँ जब श्रद्धा और शुद्ध भाव से इसका पाठ किया जाता है तो संचित पाप कर्मों का प्रभाव अत्यंत कम होता है।
• कितनी बार पढ़ने से अधिक लाभ मिलता है
दैनिक 11 बार सामान्य साधना है, 21 बार मनोकामना सिद्धि और 108 बार गहन साधना मानी जाती है।
• क्या इस पाठ से पितृ दोष भी शांत होता है
हाँ यह चौपाई राहु केतु संबंधी समस्याओं और पितृ दोष को शांत करने में प्रभावी मानी गई है।
• क्या बिना नियम के भी लाभ मिलता है
हाँ परंतु नियम और पवित्रता से किया गया पाठ कई गुना अधिक फलदायी होता है।
• क्या संध्या समय भी इसका पाठ किया जा सकता है
हाँ सुबह और शाम दोनों समय इसका पाठ अत्यंत शुभ माना गया है।
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