By पं. संजीव शर्मा
जानिए गुरु पूर्णिमा 2025 की तिथि, पूजा विधि, ऐतिहासिक महत्व और गुरु के प्रति कृतज्ञता का संदेश

गुरु पूर्णिमा वह पवित्र दिवस है जब साधक अपने गुरु शिक्षकों और जीवन मार्गदर्शकों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करते हैं। यह केवल एक पर्व नहीं बल्कि ज्ञान परंपरा साधना और आत्मिक उन्नति का गहरा उत्सव है। इस दिन की आध्यात्मिक ऊर्जा और गुरु का आशीर्वाद साधक के जीवन में नई दिशा और प्रकाश देता है।
गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई 2025 गुरुवार
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 10 जुलाई 2025 सुबह 1:36 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त 11 जुलाई 2025 सुबह 2:06 बजे
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को शुद्ध करें।
गुरु वेदव्यास भगवान शिव या अपने ईष्ट गुरु की प्रतिमा स्थापित करें।
पुष्प फल अक्षत चंदन वस्त्र माला और दक्षिणा अर्पित करें।
गुरु मंत्र वेद मंत्र या "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु" का जाप करें।
गुरु के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और विनम्रता से सम्मान करें।
माता पिता बड़ों और अपने सभी शिक्षकों को प्रणाम करें।
जरूरतमंदों को अन्न वस्त्र पुस्तक या धन का दान करें।
विद्यार्थियों के लिए यह दिन गुरु उपासना और सेवा का संकल्प लेने का विशेष अवसर है।
यह दिन वेदव्यास जयंती के रूप में मनाया जाता है जिन्होंने वेदों का विभाजन महाभारत और पुराणों की रचना की।
बौद्ध परंपरा में यह दिवस सारनाथ में बुद्ध के प्रथम उपदेश की स्मृति में मनाया जाता है।
जैन समुदाय में यह गुरुओं आचार्यों और आध्यात्मिक मार्गदर्शकों को समर्पित है।
नेपाल में यह दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है जहां गुरुजनों को सम्मान दिया जाता है।
वैदिक अर्थ में गुरु अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला है।
गु का अर्थ अंधकार और रु का अर्थ प्रकाश माना गया है।
गुरु के आशीर्वाद से साधक के जीवन में संतुलन शांति तथा आत्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।
गुरु पूर्णिमा पर चंद्रमा पूर्ण होता है जिससे मन बुद्धि और भावनाएं शुद्ध और शांत होती हैं।
यह दिन साधना मनन आत्मचिंतन और गुरु उपासना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
गुरु पूर्णिमा जीवन में कृतज्ञता सीखने की भावना और मार्गदर्शन का महत्व याद दिलाती है।
सच्चा ज्ञान पुस्तकों से नहीं बल्कि गुरु के सान्निध्य अनुभव और उपदेश से मिलता है।
गुरु का आशीर्वाद बाधाओं को दूर करता है और साधक को सही दिशा देता है।
जब साधक अपने गुरु के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करता है तो जीवन में सकारात्मकता और आत्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
गुरु पूर्णिमा सिखाती है कि सच्चा गुरु मिलना जीवन का सर्वोच्च सौभाग्य है।
गुरु ही आत्मा का विकास चेतना का विस्तार और जीवन का वास्तविक मार्ग बताते हैं।
इस पावन दिवस पर अपने जीवन के सभी गुरुजनों को स्मरण करें और उनके मार्ग पर चलकर जीवन को सार्थक बनाएं।
गुरु की कृपा जीवन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान प्रेम और शांति का प्रकाश फैलाती है।
1. गुरु पूर्णिमा को वेदव्यास जयंती क्यों कहा जाता है
क्योंकि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था जिन्होंने वेदों का विभाजन और महाभारत की रचना की।
2. क्या गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक गुरु के लिए मनाई जाती है
नहीं यह दिन माता पिता शिक्षकों मार्गदर्शकों और जीवन में ज्ञान देने वाले हर व्यक्ति को समर्पित है।
3. गुरु पूर्णिमा पर चंद्रमा का पूर्ण होना क्यों महत्वपूर्ण है
पूर्णिमा की चंद्र ऊर्जा मन बुद्धि और भावनाओं को स्थिर शांत और शुद्ध बनाती है।
4. क्या इस दिन दान करना आवश्यक है
यह पुण्य वर्धक माना गया है और गुरु के प्रति सेवा और कृतज्ञता का प्रतीक है।
5. विद्यार्थी गुरु पूर्णिमा पर क्या विशेष कर सकते हैं
विद्यार्थी अपने गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करें सेवा का संकल्प लें और अध्ययन में निष्ठा बढ़ाने का व्रत करें।
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