By पं. अभिषेक शर्मा
जानें 12 अगस्त को कजरी तीज व्रत की सही तिथि, अंगारकी चतुर्थी का शुभ संयोग और अखंड सौभाग्य के लिए पूजा विधि।

जब भादों की फुहारें धरा को शीतलता देती हैं और वातावरण में सौंधी सुगंध फैलती है, तब कजरी तीज का पावन पर्व आता है। यह व्रत केवल परंपरा नहीं, बल्कि सुहागिनों के प्रेम, समर्पण और अखंड सौभाग्य की कामना का आध्यात्मिक उत्सव है। माता पार्वती की तपस्या और शिव-पार्वती के अटूट प्रेम का स्मरण कर यह दिन विशेष रूप से मनाया जाता है।
पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि इस प्रकार है:
तृतीया प्रारंभ: 11 अगस्त 2025, सुबह 10:34 बजे
तृतीया समाप्ति: 12 अगस्त 2025, सुबह 08:41 बजे
उदयातिथि के सिद्धांत के आधार पर, सूर्योदय पर तृतीया 12 अगस्त को होने से
कजरी तीज 12 अगस्त 2025, मंगलवार को मनाई जाएगी।
इस वर्ष एक अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है।
12 अगस्त को तृतीया समाप्त होने के बाद चतुर्थी तिथि आरंभ हो जाएगी।
मंगलवार को चतुर्थी पड़ने से यह दिन अंगारकी चतुर्थी कहलाएगा।
साथ ही बहुला चतुर्थी का भी योग रहेगा।
एक ही दिन में दो अत्यंत मंगलकारी व्रतों का संयोग बनने से यह तिथि कई गुना अधिक प्रभावशाली हो जाती है।
| विवरण | समय / तिथि |
|---|---|
| तृतीया तिथि प्रारंभ | 11 अगस्त, 10:34 AM |
| तृतीया तिथि समाप्त | 12 अगस्त, 08:41 AM |
| कजरी तीज व्रत | 12 अगस्त 2025, मंगलवार |
| विशेष संयोग | अंगारकी चतुर्थी + बहुला चतुर्थी |
कजरी तीज का व्रत विवाह की स्थिरता, पति की दीर्घायु, दांपत्य सौख्य और पारिवारिक कल्याण के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने कड़े तप से भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। इसलिए विवाहित महिलाएं सौभाग्य और समृद्धि के लिए, तथा अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
यह शिव-पार्वती के प्रेम, धैर्य, त्याग और समर्पण की प्रेरणा देता है।
• निर्जला उपवास: इस व्रत में पूरे दिन जल भी ग्रहण नहीं किया जाता।
• षोडश श्रृंगार: महिलाएं सोलह श्रृंगार कर सौभाग्य का आशीर्वाद ग्रहण करती हैं।
• शाम की पूजा: मिट्टी की शिव-पार्वती प्रतिमा बनाकर या स्थापित कर पूजा की जाती है।
• अर्घ्य: चंद्र उदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है।
• श्रृंगार सामग्री, पुष्प, रोली, चंदन और फल अर्पित किए जाते हैं।
यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास की गहराई का प्रतीक है।
यह हमें याद दिलाता है कि रिश्तों का आधार समर्पण, आदर और श्रद्धा है।
कजरी तीज दांपत्य जीवन में नई ऊर्जा, मिठास और सकारात्मकता भरती है।
1. कजरी तीज 2025 किस दिन है?
12 अगस्त 2025, मंगलवार को, क्योंकि सूर्योदय पर तृतीया विद्यमान होगी।
2. तिथि को लेकर भ्रम क्यों था?
क्योंकि तृतीया 11 और 12 दोनों दिनों में पड़ रही है, पर उदयातिथि के अनुसार 12 अगस्त मान्य है।
3. अंगारकी चतुर्थी क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
मंगलवार को चतुर्थी तिथि आने पर अंगारकी चतुर्थी कहलाती है। यह अत्यंत शुभ और मनोवांछित फल देने वाली मानी जाती है।
4. क्या कजरी तीज में निर्जला उपवास आवश्यक है?
परंपरा में इसे निर्जला रखा जाता है, पर स्वास्थ्य के अनुसार नियम बदला जा सकता है।
5. व्रत का पारण कब किया जाता है?
शाम में चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात ही उपवास खोला जाता है।
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