By पं. नीलेश शर्मा
शिव आराधना, पितृ तर्पण और आंतरिक शांति के लिए विशेष अमावस्या

भारत की सांस्कृतिक संरचना में अनेक पर्व ऐसे हैं जो केवल धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं होते बल्कि मानव मन की गहराइयों को स्पर्श करते हैं। सोमवती अमावस्या भी एक ऐसा ही पवित्र अवसर है जब व्यक्ति अपने भीतर उतरकर यह अनुभव करता है कि जीवन केवल बाहरी सुख सुविधाओं का संग्रह नहीं है। यह दिन आत्मिक जागरण की ओर ले जाने वाला एक सुकोमल दीपक है। इस वर्ष यह शुभ तिथि 26 मई 2025 को आ रही है और देश भर में इसे श्रद्धा और भावनाओं के साथ मनाया जाएगा।
सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इसका महत्व अत्यंत विशेष बताया गया है क्योंकि यह तिथि देवत्व और पितृ कृपा दोनों से जुड़ती है। इस दिन व्यक्ति अपने पूर्वजों का स्मरण कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है और भगवान शिव की उपासना से मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक बल प्राप्त करता है।
गरुड़ पुराण के अनुसार इस दिन किया गया तर्पण पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करता है। मन में यदि कोई भारीपन हो तो यह तिथि उसे हल्का करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन जाती है। पद्म पुराण में भी इसका उल्लेख है कि सोमवती अमावस्या पर दान और ध्यान का फल बहुत तेजी से प्राप्त होता है।
एक समय युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा कि वह कौन सा व्रत है जो व्यक्ति को दीर्घ आयु और पवित्रता की ओर ले जाता है। श्रीकृष्ण ने बताया कि सोमवती अमावस्या वह तिथि है जब शरीर और मन दोनों की अशुद्धियाँ पिघलने लगती हैं। श्रीकृष्ण ने यह भी कहा कि इस दिन किया गया स्नान दान और तर्पण व्यक्ति को जन्म जन्मांतर के पापों से दूर ले जाता है और पुण्य में वृद्धि करता है।
धर्मशास्त्रों में यह उल्लेख मिलता है कि अमावस्या के समय सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में विराजते हैं जिससे मन की स्थिरता प्रभावित होती है। इसी कारण यह तिथि ध्यान साधना और आत्मनिरीक्षण के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। मानव मन इस समय एक दर्पण जैसा हो जाता है जो उसे भीतर की छाया और प्रकाश दोनों दिखाता है।
तिथि: वैदिक ज्योतिष में समय का सूक्ष्मतम आयाम
नीचे दिए गए विवरण इस वर्ष की सोमवती अमावस्या के महत्वपूर्ण समय को दर्शाते हैं।
| विवरण | समय |
|---|---|
| अमावस्या आरंभ | 26 मई 2025, दोपहर 12:11 बजे |
| अमावस्या समाप्त | 27 मई 2025, शाम 8:31 बजे |
| पुण्यकाल और श्राद्धकाल | 26 मई को प्रातःकाल से सूर्यास्त तक |
| पर्व तिथि | उदयातिथि के अनुसार 26 मई 2025 |
सोमवती अमावस्या केवल व्रत का दिन नहीं है बल्कि यह मन को कोमल बनाने और जीवन के प्रति कृतज्ञता को अनुभव करने का समय है। इस तिथि पर किए गए निम्न कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं।
सूर्योदय से पहले गंगाजल मिले जल से स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। यदि किसी पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो घर में स्नान करते समय मन में पवित्र तीर्थों का ध्यान करने से भी पुण्य प्राप्त होता है। जल केवल शरीर को नहीं छूता बल्कि मन पर भी प्रभाव डालता है।
सूर्य को अर्घ्य देना धर्मग्रंथों में एक महत्वपूर्ण साधना मानी गई है। तांबे के पात्र में जल लाल पुष्प और तिल मिलाकर अर्घ्य दिया जाता है। यह क्रिया सूर्य देव के तेज को आह्वान करती है और मन की ऊर्जा को स्थिर करती है।
सूर्य मंत्र का जाप किया जाता है।
ॐ सूर्याय नमः
शिवलिंग पर जल दूध शहद तिल और बेलपत्र चढ़ाकर रुद्राभिषेक किया जाता है। यह अभिषेक मन को शांति प्रदान करता है और नकारात्मक विचारों को दूर करता है।
इस दिन शिव मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है।
ॐ नमः शिवाय
हथेली में जल लेकर अंगूठे की ओर से तर्पण करते समय पितरों का स्मरण किया जाता है। यह वह क्षण है जब व्यक्ति अपने भीतर के संस्कारों और पूर्वजों के आशीर्वाद को अनुभव करता है।
तर्पण मंत्र बोला जाता है।
ॐ पितृदेवाय नमः
शिव मंदिर में दीपक जलाना और पितरों की शांति की प्रार्थना करना इस दिन का आवश्यक अंग है।
अपनी शक्ति और संकल्प को दृढ़ करने के लिए सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है। यह साधना मन में धैर्य और साहस का संचार करती है।
नीचे दिए गए कार्य पुण्य और शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने गए हैं।
| कार्य | महत्व |
|---|---|
| पीपल की पूजा और परिक्रमा | पितृ कृपा प्राप्त होती है |
| श्रीमद्भगवद्गीता का सप्तम अध्याय पढ़ना | मन में स्थिरता आती है |
| पशुओं को अन्न और दूध देना | करुणा और सेवा का विस्तार |
| दीपदान | जीवन में प्रकाश और कृतज्ञता का भाव |
धर्मग्रंथों में कहा गया है कि अमावस्या के दिन पीपल में पितरों का वास होता है। इस कारण इस दिन पीपल की जड़ में मीठा जल चढ़ाना सात परिक्रमा करना और दीपक जलाना पितृदोष शांत करने में अत्यंत प्रभावी माना गया है। इसके अतिरिक्त जल में तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर तर्पण करना भी शुभ माना जाता है।
गरीबों ब्राह्मणों और पशुओं को भोजन करवाना और धन अन्न तथा घास का दान करना पितरों को संतुष्ट करता है।
शाम के समय ईशान कोण में लाल दीपक जलाना भी मन को स्थिर करता है।
दूध में अपनी छाया देखकर उसे काले कुत्ते को पिलाने से मानसिक तनाव कम होता है।
अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में स्थित होते हैं। इसका प्रभाव मन पर सीधा पड़ता है। यदि व्यक्ति के विचार पिछले कुछ समय से अस्थिर हों तो यह दिन उन्हें संतुलित करने का अवसर बन सकता है। ध्यान साधना और जाप इस दिन मन के विकारों को दूर करने में अत्यंत सहायक होते हैं।
जिन लोगों की जन्मकुंडली में चंद्र दोष उपस्थित हो उन्हें इस दिन विशेष पूजा और ध्यान करने की सलाह दी जाती है। इससे मन और भावनाओं पर नियंत्रण बढ़ता है।
इस वर्ष सोमवती अमावस्या दो बार आएगी। पहली 26 मई को और दूसरी 20 अक्टूबर को। दोनों तिथियाँ अत्यंत शुभ मानी जाएंगी परंतु ज्येष्ठ मास में आने वाली सोमवती अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व अधिक माना जाता है। यह तिथि पितृ तर्पण का श्रेष्ठ अवसर बनती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान करती है।
जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब हम अपने प्रियजनों को याद करते हैं जो अब इस संसार में नहीं हैं। यह स्मरण केवल कर्तव्य नहीं बल्कि हृदय की स्वाभाविक अनुभूति है। सोमवती अमावस्या इस स्मरण को स्वर देती है।
एक वृद्ध पिता की आत्मा जो अपने बेटे के आंगन के पीपल के नीचे बैठने की अभ्यस्त थी वह तब शांति पाती है जब बेटा एक दीपक जलाकर कहता है कि पिता आज भी आप मेरे हर विचार में उपस्थित हैं।
यह दिन संबंधों की उन डोरों को फिर से महसूस करने का अवसर देता है जिनसे मन शक्ति प्राप्त करता है।
सोमवती अमावस्या केवल एक पर्व नहीं है बल्कि यह मन के भीतर उतरकर जीवन को नए दृष्टिकोण से समझने का एक पवित्र क्षण है। पितृ तर्पण शिव पूजन दान और ध्यान ये सब मिलकर व्यक्ति के मन में कृतज्ञता और विनम्रता का भाव उत्पन्न करते हैं।
यह तिथि आत्मा को शुद्ध करने और जीवन के मूल मूल्यों को पहचानने का अवसर बन जाती है।
इस वर्ष की सोमवती अमावस्या पर स्वयं को शांत करने अपने पूर्वजों को स्मरण करने और अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाने का एक सुंदर मार्ग खुलता है।
क्या सोमवती अमावस्या पर पितृ तर्पण अनिवार्य है
पितृ तर्पण इस दिन अत्यंत शुभ माना गया है और इसे करने से पितृ कृपा प्राप्त होती है।
क्या इस दिन शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना आवश्यक है
रुद्राभिषेक मन की शुद्धि और मानसिक संतुलन के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है और इस दिन विशेष फल देता है।
क्या महिलाएं भी इस व्रत को रख सकती हैं
सोमवती अमावस्या का व्रत पुरुष और महिलाएं दोनों रख सकते हैं और ध्यान तथा दान के माध्यम से शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।
क्या अमावस्या के दिन यात्रा वर्जित होती है
पुराणों में यात्रा के लिए निषेध का उल्लेख है परंतु आवश्यक होने पर शिव मंत्र का जाप करके यात्रा की जा सकती है।
क्या पीपल की पूजा करना पितृदोष को शांत करता है
धर्मग्रंथों में पीपल को पितृवास का स्थान बताया गया है इसलिए उसकी पूजा और परिक्रमा पितृदोष को शांत करती है।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएंअनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi






इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ
500+
USERS
100K+
TRUSTED ASTROLOGERS
20K+
DOWNLOADS