By पं. संजीव शर्मा
इस माह दो बार मिलेगा शिव-पार्वती का आशीर्वाद। जानें व्रत की तिथियां, पूजा विधि और प्रदोष काल का महत्व।

अगस्त का महीना जब सावन की हरियाली से भाद्रपद की गहन भक्तिभावना में प्रवेश करता है, तब प्रदोष व्रत आध्यात्म और शिव-तत्व से गहरे जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। देवों के देव महादेव को समर्पित यह व्रत जीवन के दोषों को हरने और शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम माध्यम माना जाता है। अगस्त 2025 में दो प्रदोष व्रत आएंगे, जिनमें प्रत्येक की अपनी दिव्यता और प्रभाव है।
व्रत तिथि: 6 अगस्त 2025, बुधवार
त्रयोदशी प्रारंभ: 6 अगस्त, दोपहर 02:08
त्रयोदशी समाप्त: 7 अगस्त, दोपहर 02:27
शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 06:32 से रात 08:41
व्रत तिथि: 20 अगस्त 2025, बुधवार
त्रयोदशी प्रारंभ: 20 अगस्त, दोपहर 01:58
त्रयोदशी समाप्त: 21 अगस्त, दोपहर 12:44
शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 06:20 से रात 08:33
• यह वह समय है जब भगवान शिव कैलाश पर आनंद-तांडव करते हैं।
• प्रदोष काल में किया गया पूजन तुरंत फल देने वाला माना जाता है।
• शिव और पार्वती की संयुक्त कृपा से स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक शांति मिलती है।
• यह व्रत कष्ट निवारण, दांपत्य सामंजस्य और मनोकामना पूर्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
| लाभ का क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| स्वास्थ्य | रोगों से मुक्ति और आरोग्य प्राप्ति |
| मानसिक शांति | तनाव से राहत, मन का संतुलन |
| आर्थिक समृद्धि | कर्ज से मुक्ति, धन वृद्धि |
| पारिवारिक सुख | दांपत्य और परिवार में सौहार्द |
| मनोकामना | सच्ची निष्ठा से किया व्रत हर इच्छा पूर्ण करता है |
प्रदोष केवल एक मुहूर्त नहीं, बल्कि आत्मा और शिव-शक्ति के मिलन का क्षण है। यह समय भक्त को भीतर से शुद्ध, स्थिर और प्रकाशवान बनाता है। अगस्त के दोनों प्रदोष व्रत जीवन में नई ऊर्जा, शांति और कृपा का प्रवेश कराते हैं।
1. क्या प्रदोष व्रत केवल पुरुष रखते हैं?
नहीं, पुरुष, महिलाएँ और विवाहित-दंपत्ति सभी यह व्रत रख सकते हैं।
2. क्या बिना अभिषेक के प्रदोष व्रत किया जा सकता है?
हाँ, केवल ‘ॐ नमः शिवाय’ के जाप के साथ भी व्रत पूर्ण माना जाता है।
3. क्या प्रदोष व्रत हर महीने दो बार आता है?
हाँ, प्रत्येक मास में शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष होता है।
4. क्या प्रदोष व्रत मनोकामना पूर्ति के लिए श्रेष्ठ है?
हाँ, विशेषकर दांपत्य, संतान और आर्थिक मामलों में यह अत्यंत शुभ है।
5. क्या शिव-पार्वती दोनों की पूजा अनिवार्य है?
समग्र फल के लिए दोनों की संयुक्त पूजा श्रेष्ठ मानी जाती है।
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