By पं. नरेंद्र शर्मा
जानें 24 अगस्त को व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भगवान बलराम से जुड़ी पावन कथा।

जब धरती अपनी सौंधी महक से वातावरण को पवित्र करती है और एक माँ अपने बच्चों की रक्षा के लिए प्रार्थना में लीन होती है, तब आता है हल षष्ठी का दिव्य पर्व। इस व्रत को ललही छठ या चंदन छठ भी कहा जाता है। यह केवल व्रत नहीं, बल्कि भगवान बलराम के प्रति श्रद्धा और मातृत्व के अदम्य समर्पण का उत्सव है। बलराम का शस्त्र हल कृषि, उर्वरता और सम्पन्नता का प्रतीक है, इसलिए यह व्रत धरती और माँ दोनों की संरक्षण शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
• षष्ठी तिथि आरंभ: 24 अगस्त 2024, दोपहर 12:30 बजे
• षष्ठी तिथि समाप्त: 25 अगस्त 2024, सुबह 10:11 बजे
पूजा मध्याह्न में की जाती है। षष्ठी तिथि 24 अगस्त को दिन में उपस्थित रहेगी, इसलिए
हल षष्ठी व्रत 24 अगस्त 2024, शनिवार को शास्त्रसम्मत माना जाएगा।
| विवरण | तिथि और समय |
|---|---|
| षष्ठी प्रारंभ | 24 अगस्त 12:30 PM |
| षष्ठी समाप्त | 25 अगस्त 10:11 AM |
| व्रत की श्रेष्ठ तिथि | 24 अगस्त, शनिवार |
यह व्रत माताओं द्वारा संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए रखा जाता है। बलराम के आशीर्वाद से बच्चों को रोग, भय और संकटों से रक्षा मिलती है। घर में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है।
• सुबह स्नान कर महुआ की दातुन करें
• आंगन में गोबर से चौक बनाएं
• चौक पर हल का प्रतीक बनाकर पूजा करें
• बिना हल जोते उगे अन्न और हल्दी चावल का उपयोग करें
• हल से जुते अन्न का सेवन वर्जित है
• पसही का चावल, भैंस का दूध और घी ग्रहण किया जाता है
रोहिणी ने बलराम के जन्म से पूर्व यह व्रत किया था जिससे उन्हें बल, आरोग्य और लंबी आयु प्राप्त हुई।
ग्वालिन ने लालच में झूठ बोलकर गाय के दूध को भैंस का बताया। उसकी भूल से छठ माता रुष्ट हुईं और उसके पुत्र का जीवन छिन गया। पश्चाताप के बाद माता ने उसकी संतान को पुनर्जीवित किया। यह कथा सत्य, ईमान और मातृत्व की शक्ति सिखाती है।
यह व्रत केवल परंपरा नहीं, बल्कि यह स्मरण है कि माँ की प्रार्थना में अद्भुत ऊर्जा होती है। सच्चे मन से रखा गया यह व्रत बच्चों के जीवन में सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
1. हल षष्ठी 2024 का व्रत किस दिन रखा जाएगा?
24 अगस्त 2024, शनिवार को। पूजा मध्याह्न में की जाती है और तिथि दोपहर में विद्यमान रहती है।
2. इस दिन क्या खाना वर्जित है?
हल से जुता हुआ अन्न नहीं खाया जाता। केवल प्राकृतिक रूप से उगे अन्न जैसे पसही का चावल खाया जाता है।
3. पूजा में कौन सी सामग्री आवश्यक है?
हल का प्रतीक, हल्दी, चावल, बिना जोते उगे अन्न, फल, भैंस का दूध और घी।
4. व्रत का मुख्य उद्देश्य क्या है?
संतान की दीर्घायु, सुरक्षा और स्वास्थ्य।
5. हल षष्ठी को ललही छठ क्यों कहा जाता है?
यह नाम लोकभाषा में इस व्रत के प्रचलित स्वरूप को दर्शाता है और इसका संबंध बलराम तथा मातृत्व की शक्ति से है।
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